Breaking

अपनी भाषा चुने

POPUP ADD

सी एन आई न्यूज़

सी एन आई न्यूज़ रिपोर्टर/ जिला ब्यूरो/ संवाददाता नियुक्ति कर रहा है - छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेशओडिशा, झारखण्ड, बिहार, महाराष्ट्राबंगाल, पंजाब, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटका, हिमाचल प्रदेश, वेस्ट बंगाल, एन सी आर दिल्ली, कोलकत्ता, राजस्थान, केरला, तमिलनाडु - इन राज्यों में - क्या आप सी एन आई न्यूज़ के साथ जुड़के कार्य करना चाहते होसी एन आई न्यूज़ (सेंट्रल न्यूज़ इंडिया) से जुड़ने के लिए हमसे संपर्क करे : हितेश मानिकपुरी - मो. नं. : 9516754504 ◘ मोहम्मद अज़हर हनफ़ी - मो. नं. : 7869203309 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ आशुतोष विश्वकर्मा - मो. नं. : 8839215630 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ शिकायत के लिए क्लिक करें - Click here ◘ फेसबुक  : cninews ◘ रजिस्ट्रेशन नं. : • Reg. No.: EN-ANMA/CG391732EC • Reg. No.: CG14D0018162 

Monday, November 8, 2021

नहाए खाए से शुरू हुआ छठ महापर्व, जानें पूजा विधि, सामग्री और संध्या अर्घ्य का समय

 


पंंकज शर्मा, रायपुर दिवाली के 6 दिनों के बाद छठ पर्व मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार छठ पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। छठ पर्व नहीं बल्कि महापर्व है, भगवान सूर्य जो कि साक्षात देवता है उनकी पूजा का विशेष पर्व है छठ इस पर्व में व्रती कठिन व्रत करती हैं, जो कि किसी तपस्या से कम नहीं। कार्तिक मास की चौथ से ही इस पर्व की शुरुआत हो जाती है। पहला दिन नहाय खाय का होता है। फिर खरना और संध्या अर्घ्य के बाद सप्तमी को उषा अर्घ्य के साथ व्रत की समाप्ति होती है। कहते हैं कि माता सीता ने छठ व्रत की शुरूआत की थी। वहीं कई जगहों में वर्णित है कि द्रौपदी और कर्ण ने भी इस व्रत को किया था। यानी कि रामायण और महाभारत काल में भी इस व्रत को किया गया था।


छठ पूजा 2021


चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा होती है। इस बार छठ का मुख्य त्योहार 10 नवंबर को है जिसमें शाम के समय ढ़लते हुए सूर्य को अर्ध्य देते है फिर अगली सुबह सूर्यदेव को जल अर्पित कर व्रत का पारण करते हैं। जैसे दिवाली का पर्व 5 दिनों का, नवरात्रि का पर्व 9 दिनों का होता है उसकी प्रकार से छठ पूजा 4 दिनों तक चलने वाला एक लोक पर्व है। इस पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और सप्तमी तिथि को समापन हो जाता है। छठ पर्व माताएं अपनी संतान के सुख-समृद्धि,अरोग्यता और लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं। 



पहला दिन-नहाए खाए( कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी)


इस साल छठ पर्व का शुभारंभ 08 नवंबर से नहाए-खाए के प्रारंभ हो रहा है। नहाए खाए छठ पूजा का पहला दिन होता है। इसमें सुबह-सुबह घर की साफ-सफाई करते हुए स्नान करके मन में पूजा और व्रत का संकल्प लेते हुए शाकाहारी भोजन किया जाता है।


दूसरा दिन- खरना( कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी)


खरना छठ पर्व का दूसरा दिन होता है। खरना के दिन पर जो व्रत रखता है उस दिन वह बिना जल की ग्रहण किए व्रत रखा जाता है। शाम के समय खरना में गुड़ की खीर, रोटी के घी और फल आदि को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।


तीसरा दिन- संध्या का अर्घ्य( कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी)


तीसरा दिन छठ पर्व का मुख्य दिन होता है। इसमें षष्ठी तिथि पर शाम के समय सूर्यदेव को अर्ध्य दिया जाता जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने से पहले नदियों के किनारे लोग एकत्रित होकर बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, लड्डू और अन्य पूजन सामग्री को सूप में सजाया जाता है। व्रती छठी माई की पूजा करती हैं और सूर्य को अर्घ्य देते हुए अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना करती है।


चौथा दिन- ऊषा अर्घ्य 


चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठी माई को याद करते हुए माताएं अपने परिवार की सुख और समृद्धि का वर मांगती है और प्रसाद खाकर व्रत का पारण करते हैं। 


कौन है छठी मैया


शास्त्रों के अनुसार छठ देवी भगवान ब्रह्माजी की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन हैं, उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए ये पर्व मनाया जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि ब्रह्माजी ने सृष्टि रचने के लिए स्वयं को दो भागों में बांट दिया, जिसमें दाहिने भाग में पुरुष और बाएं भाग में प्रकृति का रूप सामने आया। सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया। इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी या देवसेना के रूप में जाना जाता है। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इनका एक नाम षष्ठी है, जिसे छठी मैया के नाम से जाना जाता है। शिशु के जन्म के छठे दिन भी इन्हीं की पूजा की जाती है। इनकी उपासना करने से बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। पुराणों में इन्हीं देवी का नाम कात्यायनी बताया गया है, जिनकी नवरात्रि की षष्ठी तिथि को पूजा की जाती है।



छठ पूजा आवश्यक सामग्री 


बांस की टोकरी या सूप, दूध, ठेकुआ, जल, पत्ते लगे गन्ने, पानी वाला नारियल, चावल, सिंदूर, दीपक, धूप, अदरक का हरा पौधा, हल्दी, मूली, मीठा नींबू, शरीफा, केला, नाशपाती, शकरकंदी, सुथनी, अगरबत्ती, धूप बत्ती, कपूर, मिठाई, गुड़, चावल का आटा, गेहूंपान, सुपारी, शहद, कुमकुम, चंदन।


छठ पूजा 10 11 नवंबर 2021 :  अर्घ्य समय 


10 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय :17:30:16

11 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय :06:40:10

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.

Hz Add

Post Top Ad