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Friday, December 10, 2021

आंदोलन का-11-वा दिन...ट्रेनों के स्टॉपेज होने तक...14-दिसंबर से कोयला-स्लीपरों के परिवहन पर लगेगी रोक नगर-संघर्ष-समिति।

 आंदोलन का-11-वा दिन...ट्रेनों के स्टॉपेज होने तक...14-दिसंबर से कोयला-स्लीपरों के परिवहन पर लगेगी रोक नगर-संघर्ष-समिति।

गुरुवार की बैठक में  नगरवासियों की उपस्थिति में नगर-संघर्ष-समिति के द्वारा लिया गया निर्णय...स्टॉपेज नही तो परिवहन भी नही।


14-दिसंबर-मंगलवार नगर पूरी तरह से बंद...आंदोलन स्थल पर इकट्ठा होकर जिला प्रशासन के माध्यम से रेलवे प्रबंधन को सौपा जाएगा ज्ञापन।

रतनपुर से ताहिर अली की रिपोट

करगीरोड-कोटा:-पिछले 11-दिनों से लगातार स्टेशन परिसर के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से नगर-संघर्ष-समिति के बैनर तले करगीरोड-स्टेशन में पूर्व में रुकने वाली सुपरफास्ट-एक्सप्रेस-पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव को लेकर चल रहे रहे अनिश्चित-कालीन धरना-प्रदर्शन में नगर संघर्ष समिति में जुड़े कोटा नगर के सभी वर्गों का भरपूर समर्थन मिल रहा है..सितंबर माह में  शुरू किए गए इस आंदोलन में सांकेतिक-सहित रेल रोको आंदोलन भी किया गया 29-सितंबर को 15-दिनों के अल्टीमेटम के साथ सांसद-विधायक की उपस्थिति में नगर संघर्ष समिति के लोगो के द्वारा पुनः से जीएम/डीआरएम रेलवे बिलासपुर जोन को ज्ञापन भी सौपा गया..30-नवंबर से 01-नवंबर तक नगर संघर्ष समिति के राहुल गुप्ता के द्वारा आमरण अनशन किया गया..02-दिसंबर से कोटा-नगर के सभी वर्गों के द्वारा बारी-बारी से आंदोलन स्थल में पहुचकर आंदोलन को समर्थन देने के साथ धरना प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं बावजूद उसके रेलवे के रेलवे मिनिस्ट्री-रेलवे के महाप्रबंधक-प्रबंधक-व-प्रशासनिक उच्च-अधिकारियों के कानों में जु तक नही रेंग रही है..ना ही जिला-प्रशासन व रेलवे-उपभोक्ता-बोर्ड में सलाहकार-समिति के पद पर आसीन जनप्रतिनिधियों के कानो में आवाज पहुच रही है।

*ट्रेनों का स्टॉपेज नही तो स्लीपर व कोयला का परिवहन भी नही:--नगर संघर्ष समिति कोटा।*

आंदोलन के दसवें दिन गुरुवार 09-दिसंबर को पूरे नगर में आंदोलन को और धारदार बनाने के लिए आपातकालीन-बैठक की मुनादी कराई गई..व्हाट्सएप-सोशल-मीडिया ग्रुप के माध्यम से भी बैठक की सूचना फैलाई गई शाम 06-बजे होने वाले बैठक में ठंड के बावजूद रात होते-होते आंदोलन स्थल का पंडाल पूरी तरह से भर चुका था..कुछ लोग पंडाल के बाहर भी खड़े रहे शांतिपूर्ण-तरीके से चल रहे आंदोलन को लेकर रेलवे-प्रबंधन व जिला-प्रशासन सहित सांसद-विधायक के द्वारा कोई संज्ञान नहीं लेने पर नगर-संघर्ष-समिति के बैठक में कोटा-नगर के सभी वर्ग व्यापारी-बंधु राजनीतिक-दलों के नेता व जनप्रतिनिधि-गण महिला-ब्रिगेड..युवा-ब्रिगेड-कोकालेज स्टूडेंट्स..प्रेस क्लब कोटा के पत्रकार-गण अधिवक्ता-संघ डीजल-ऑटो-रिक्शा-चालक-संघ मजदूर-संघ..सब्जी-फल-विक्रेता संघ..सामाजिक कार्यकर्ता व समाज प्रमुख सहित कोटा नगर के वरिष्ठ नागरिकों-बुद्धिजीवी-वर्ग के उपस्थिति में सर्व-सम्मति से निर्णय लिया गया कि शांतिपूर्ण-तरीके से लगातार चल रहे आंदोलन को रेलवे प्रबंधन व जिला-प्रशासन के द्वारा अनसुना किया जा रहा है.. एक प्रकार से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन को उग्र करने का प्रयास किया जा रहा है..जिसके  बाद नगर-संघर्ष-समिति के द्वारा 14-दिसंबर दिन मंगलवार को नगर बंद के साथ सुबह 10-बजे आंदोलन स्थल पर इकट्ठा होकर जिला-प्रशासन को अवगत कराते हुए के प्रशासन के ही माध्यम से रेलवे प्रबंधन जीएम/डीआरएम के नाम ज्ञापन सौंपने के बाद से करगीरोड-स्टेशन से जाने वाली स्लीपर व कोयला के परिवहन चाहे वह मालगाड़ी से हो या फिर ट्रांसपोर्ट-वाहन को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया जाएगा..यात्री-ट्रेनों के करगीरोड-स्टेशन में स्टॉपेज होने तक..साथ ही नगर-संघर्ष-समिति के द्वारा प्रायवेट-लिमिटेड कंपनी स्लीपर-व-कोयला कंपनी को भी अवगत कराएगी की ट्रेनों के स्टॉपेज होने तक नगर-संघर्ष-समिति का सहयोग करें उसके बाद भी अगर कंपनी के द्वारा स्लीपर या कोयला मालगाड़ी या फिर ट्रांसपोर्ट के माध्यम से परिवहन करने का प्रयास किया जायेगा तो किसी भी प्रकार की होने वाली अप्रिय-घटना की जवाबदेही कंपनी सहित रेलवे-प्रबंधन के साथ जिला प्रशासन की होगी।

लगातार-शांतिपूर्ण आंदोलन को अनसुना कर रही रेलवे प्रबंधन व जिला-प्रशासन के रवैये से पूर्व की खबरों में गुरुवार 09-दिसंबर को शाम 06-बजे नगर-संघर्ष-समिति के होने वाली बैठक में आंदोलन के उग्र होने की सूचना सूत्रों के हवाले से मीडिया ने पहले ही संभावना व्यक्त कर दी थी..जो कि गुरुवार की बैठक में सही साबित हुई..शांतिपूर्ण तरीके से की जा रही है..जन-आंदोलन को उग्र करने का प्रयास रेलवे-जोन बिलासपुर के महाप्रबंधक व प्रबंधक को ही जाता है..इसके अलावा जनहित के मुद्दे पर मुखर वक्ता कहे जाने वाले बिलासपुर सांसद अरुण साव का जो कि वर्तमान में चल रहे संसद-सत्र में मौजूद हैं..उनके द्वारा भी संसद-सत्र के दौरान ट्रेनों के स्टॉपेज को लेकर चल रहे आंदोलन के सवाल को नहीं उठाना..आने वाले समय मे कही उन्हें संसदीय-क्षेत्र की जनता की नाराजगी का सामना न करना पड़े..उसी प्रकार से वर्तमान कोटा-विधायक श्रीमती रेणु जोगी का भी ट्रेनों के स्टॉपेज को लेकर चल रहे आंदोलन में खामोश रहना..कोटा-नगर की जनता को भी नाराज कर सकता है..विधानसभा का शीतकालीन सत्र 13-दिसंबर से शुरु हो रहा है।

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