बेलगहना हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक आपस में भिड़े।
बेलगहना..... उच्च माध्यमिक हाई सेकेंडरी स्कूल बेलगहना जहाँ हर रोज बच्चे अपने घर से बड़ी उत्साह के साथ पढ़ाई करने स्कूल पहुंच रहे हैं।
लेकिन जिस स्कूल में प्रिंसिपल और शिक्षक के बीच बच्चों के सामने ही आपस मे तालमेल नहीं बन पाए और बच्चों के सामने ही लड़ने लगे तो फिर बच्चे पढ़ेंगें कैसे, दरसअल एक ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत बेलगहना से सामने आया है,
बेलगहना बालक हाईस्कूल में स्कूल के शाला प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों को दोनों शिक्षक आपस में लड़ते हुए मिले, शाला समिति से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह लगभग 10 बजकर 45 मिनट पर समिति के सदस्य व पदाधिकारीयो द्वारा साला निरीक्षण के लिए पहुंचे थे इसी दौरान प्रिंसिपल मूरत सिंह व शिक्षक छत्रपाल लहरें ,बच्चों के सामने एक दूसरे से लड़ रहे थे ।
मौके पर पहुंचे समिति के सदस्यों द्वारा मना करने पर भी नहीं माने, इसके बाद मौके पर पहुंचे साला समिति द्वारा पंचनामा आवेदन बनाकर दोनों शिक्षक के ऊपर कार्यवाही के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी के लिए समिति द्वारा पंचनामा आवेदन तैयार कर कार्यवाही के लिए अवगत कराया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रिंसिपल मूरत सिंह द्वारा शिक्षक छत्रपाल लहरे को स्कूल से छुट्टी से पहले घर जाने की बात को लेकर पूछा गया तभी छत्रपाल लहरे द्वारा प्रिंसपल को अभद्र तरीके से, चमकाना चालू कर दिया, इसी बीच शाला समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे थे, शाला समिति की माने तो शिक्षक छत्रपाल लहरें हर रोज बिलासपुर से बेलगहना ट्रेन से आना जाना करता है, सुबह आने के लिए ट्रेन स्कूल समय पर तो पहुंच जाता है लेकिन ,बेलगहना से बिलासपुर जाने के लिए शाम को छुट्टी के बाद ट्रेन नहीं मिलता जिसके कारण शिक्षक छत्रपाल लहरे द्वारा दोपहर को पेण्ड्रा से बिलासपुर तक चलने वाली ट्रेन पकड़ने के लिए हर रोज बहाना बनाकर जल्दी स्कूल से निकल जाता है, इसी बात को लेकर प्रिंसपल व शिक्षक के बीच विवाद हो रहा है।
इसके पहले भी प्रिंसिपल व शिक्षक के बीच हो चुका है विवाद
मिली जानकारी के मुताबिक आपको बता दें इसके पहले भी प्रिंसिपल व शिक्षक के बीच विवाद कुछ महीने पहले हो चुका है जिसकी लिखित शिकायत अधिकारियों तक भी जा चुका है। लेकिन अधिकारियों द्वारा खानापूर्ति कर अब तक कोई भी कार्यवाही नहीं किया गया बहरहाल ऐसे लाचार शिक्षा व्यवस्था खुद शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने की बजाय बच्चों के सामने आपस में लड़े तो छोटे छोटे बच्चों को क्या संदेश जाएगा। क्या बच्चों की भविष्य गढ़ने वाले शिक्षक अब लड़ने भी सिखाएंगे।

















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