बंजारपुर से निकली बंजर नदी उदगम स्थल मंडला में नर्मदा नदी में संगम लेकिन मुर्त रुप में आने तरस रही ।
सी एन आई न्युज साल्हेवारा से चन्द्रभूषण यदु की रिपोर्ट।
साल्हेवारा - सदियों से अविरल बहती बंजर नदी उदगम स्थल बंजार पुर ग्राम पंचायत छुईखदान विकासखंड जिला राजनांदगांव में है । जहां ग्राम वासी बंजार पुर वाले पूस मास की पूर्णिमा को पुजा अराधना कर छोटा सा मंडई का आयोजन करते आ रहे है ।पर आज तक शासन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया है ।
जबकी यह बंजर नदी जैसे नर्मदा अमरकंटक से निकल कर मंडला में इसी बंच्जर नदी में समाहित होकर वृहद रुप से संगम बन जा मिली जहां पर हजारों दर्शनार्थियों को दर्शन लाभ दे रही वहीं इलाहाबाद प्रयाग राज जैसी अस्थि कलश विसर्जन किया जा रहा है ।
हर हर नर्मदे हे गंगे बोल तीर्थ यात्री मंदिरों में पुजा अर्चना करते है पवित्र धारा प्रवाहित होकर गंगा जैसी विराज मान है ।वही बंजर नदी बंजारपुर से रामपुर खादी में मकर संक्रांति को वृहद रुप से भारी भरकम मेला भरते आ रही है ।दर्री घाट भाजीडोंगरी में कार्तिक पूर्णिमा पर मेला भरती है और आगे जाने पर खर्राधार का मेला भरता है जहां श्रद्धालू मनोकामना पुर्ण होने पर आज भी भेट स्वरुप मनचाही वस्तु चढ़ावा करते हैं ।इसी प्रकार कई स्थानों से गुजरते हुये मां बंजर नदी मंडला में जाकर नर्मदा नदी के साथ मिलकर संगम की रुप धारण कर विशालकाय समुद्र की तरह फैलकर पापीयों की पाप धोकर निर्मल व पवित्र कर रही है जो बंजारपुर में किसान की खेत में अविरल बारो माह पुर्ण मासी गंगाजल जैसी पवित्र धारा प्रवाहित हो रही है । वहां अभी तक कुंड का निर्माण नहीं किया गया है ।शासन प्रशासन अगर ध्यान दे तो अमरकंटक की तरह बंजारपुर ग्रामपंचायत तीर्थ स्थल के रुप में जाने पहचाने लगेगा बंजर नदी की पवित्र भूमि में विशाल मेला का आयोजन करते हुए तीर्थ स्थल घोषित कर दिया जाना चाहिए ।
बंजारपुर ग्राम का नाम बंजर नदी की उत्पत्ति के कारण ही ही पड़ा जो आज दयनीय हालत में है जो मुर्त रुप में आने को तरस रही है कुछ नही तो एक कुंड बना दिया जाय तालाब पार में मंदिर निर्माण किया गया है वही लोग पुजा करते है ।ग्राम पंचायत ना शासन प्रशासन को अभी तक पता ही नही है ।
चूनाव आता है तो सभी नेता वोट बैंक की राजनीति करने में जुट जाते है लेकिन आज तक वनांचंल क्षेत्र के की इस महान धरोहर बंजर नदी को किसी ने आज तक निहार कर नहीं देखा जो आज तक बंजर नदी की उदगम स्थल को नहीं देखे है कृपया जाकर जरुर देखे और विचार करें की आज तक किसी ने इसका ख्याल नही किया रमेश कुमार बांहे के परिवार का जमीन है रमेश बांहे से हमारे संवाददाता चन्द्रभूषण यदु ने पूछा की ऐ जमीन किसकी है तो उनने कहा हमारा परिवार की जमीन है तो आज तक कुंड बनाने का विचार क्यो किसे ने नही किया तो रमेश बांहे ने कहा ग्राम वासी छोटा सा मेला भराकर पौष पूर्णिमा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं ।
तो चन्द्रभूषण यदु ने कहा आप पांच डिसमिल जमीन दे जहां पर एक कूंड बना सके और यदि फसल की नूकसानी चाहिये तो जो हर साल जितना अनाज उठाते है उतना हम देने तैयार है यह हमारी भागीरती गंगा जी के विकास के लिये शासन प्रशासन ध्यान देते हुये अतिशीघ्र ही उदगम स्थल को पर्यटक स्थल घोषित करने की जरूरत है ।

















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.