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Wednesday, January 19, 2022

बड़गांव में मशरूम बीज (स्पॉन) उत्पादन पर दिया गया प्रशिक्षण

 बड़गांव में मशरूम बीज (स्पॉन) उत्पादन पर दिया गया प्रशिक्षण



     बालाघाट।राणा हनुमान सिंह कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव, बालाघाट में 5 दिवसीय मषरूम बीज (स्पॉन) उत्पादन पर दिनांक 15 से 19 जनवरी 2022 तक प्रशिक्षण दिया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एल. राऊत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण आयोजित किया गया।


     कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. रमेश अमूले, वैज्ञानिक (पौध संरक्षण) ने 20 प्रशिक्षणार्थियों को विधिवत स्पॉन उत्पादन के बारे में बताया । जिसमें स्पॉन उत्पादन कैसे करें, इसमें लगने वाली आवश्यक सामग्री एवं उत्पादन विधि में संवर्धन बनाना, एक बीजाणु संवर्धन विधि, बहु-बीजाणु संवर्धन विधि, उत्तक संवर्धन विधि, बीज (स्पॉन) बनाने की प्रक्रिया के दौरान ध्या रखने योग्य बाते बताई गई। इसके साथ ही बीज का भण्डारण भी बताया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को अपना स्वयं का रोजगार स्थापित करके आय का स्त्रोत बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।


     कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एल. राऊत द्वारा बताया गया कि मशरूम की खेती को छोटी जगह और कम लागत शुरू किया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त मशरूम का उत्पादन कर ग्रामीण अंचल के युवा/युवतियां स्वरोजगार प्राप्त कर सकते हैं। मशरूम की खेती को छोटी जगह और कम लागत शुरू किया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त मशरूम का उत्पादन कर ग्रामीण अंचल के युवा/युवतियां स्वरोजगार प्राप्त कर सकते हैं। डॉ. अमूले ने बताया कि मशरूम विशेष प्रकार की फफूंदो का फलनायक हैं। जिसे छतरी, कुकुरमुत्ता, खुंभी या पिहरी आदि नामों से जाना जाता हैं, जो पोष्टिक, रोग रोधक, स्वादिष्ट तथा विशेष महक के कारण आधुनिक युग का एक महत्वपूर्ण खाद्य आहार हैं। इसके अतिरिक्त जानकारी दी गई कि मशरूम में लगभग 35-40 प्रतिशत उच्च कोटी का प्रोटीन पाया जाता हैं। जिसका पाचन लगभग 70-75 प्रतिशत होता हैं। इसमें आवश्यक सभी अमीनों अम्ल ल्यूसिन, लाइसिन, मेथियोनिन, वैलीन और आइसोल्यूसिन पाया जाता हैं, जो अनाज एवं दालों में प्रचुर मात्रा में नही होता हैं।


     तकनीकी सत्र के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. एस.आर. धुवारे द्वारा बताया गया कि वर्तमान समय में भारतीय बाजार में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी हैं। परन्तु आवश्यकतानुसार इसका उत्पादन नहीं हो पा रहा हैं। ऐसे में किसान मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. धर्मेन्द्र आगाशे द्वारा मशरूम उत्पादन के लिए मौसम संबंधी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. एस.के. जाटव, डॉ. एम.पी. इंगले, अंजना गुप्ता एवं जितेन्द्र नगपुरे उपस्थित रहें।

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