आजादी के अमृत महोत्सव पर्व में नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव" राष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता का प्रथम चरण का भाग तीन संपन्न
राष्ट्रीय मंच का कुशल संचालन शिक्षक तुलेश्वर कुमार सेन राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) ने अपनी बेहतरीन अंदाज में किया।
शेरों,शायरी,राष्ट्र चिंतन,सामाजिक समस्याओं पर सवाल उठाया
नई दिल्ली / रायपुर । "नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव" के तत्वाधान में राष्ट्रीय प्रतिभा प्रतियोगिता का प्रथम चरण का प्रतियोगिता सँख्या-तीन का काव्यांजलि आनलाइन माध्यम से संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में नृत्य, कला, काव्य पाठ, साहित्य, ड्राइंग, योग, रामायण, गीता, जैन ग्रंथ पाठ आदि शामिल हैं। कार्यक्रम मांँ सरस्वती की वंदना मेनका श्रीवास झरना बाराद्वार (छत्तीसगढ़ ) के सुरम्य स्तुति से प्रारंभ हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता इस मंच के संस्थापक अध्यक्ष डाँ. सुरेश सिंह शौर्य "प्रियदर्शी" एवं सह संस्थापक विक्रम सिन्हा उपस्थिति रहे। *ममता मनीष सिन्हा (झारखंड) एवं तुलेश्वर कुमार सेन राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) के संयुक्त कुशल संचालन से माहौल खुश मिजाज़ बना रहा।
* आज काव्य पाठ में रचनाकारों की साहित्यिक न्यायाधिपति (जज) के रूप में डॉ. बांका बहादुर अरोड़ा जी (मुख्य निर्देशक-- रामा कला मंदिर एवं रंग मंच पठानकोट) रहे । इस मंच के राष्ट्रीय सह संपादक के रूप में राम रतन श्रीवास "राधे राधे" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से एवं इस संस्था के राष्ट्रीय प्रबंधन एवं संयोजक सुश्री नीतू सिंह (कोलकाता) की उपस्थित रही।।
आज के काव्य पाठ प्रतिभागी के रूप मेें देवदीप भट्टाचार्य (कोलकाता) की गीत "ए मेरे प्यारे वतन" । मंजुषा राधे (मध्यप्रदेश) ने " माँ " को परिभाषित किया । राम भरोस तांडेय बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ने माँ की ममता पर कविता पाठ किया। बसवराज मेदार भारद्वाज (कर्नाटक) के द्वारा "दुनिया में प्रेम से बड़ा कोई धर्म नहीं"। नंदलाल त्रिपाठी पितांबर गोरखपुर (उत्तरप्रदेश) ने " ए वतन तुझको दिया ए वचन" से देश भक्ति रंग में रंग दिया। उमेश नाग जयपुर (राजस्थान) द्वारा "वतन परस्ती का जज्बा ए दिल में नहीं होता "। ज्योतिका सक्सेना लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के द्वारा बेहतरीन स्वर में गीत "एक रास्ता है जिंदगी जो थम गए" से नव उमंग पैदा करने का प्रयास किया और समां बांधे रखा । डॉ. बांका बहादुर अरोड़ा जी ने जोश भरे शब्दों से कहा " फिरंगियों से ज़रा पुछो की हिंदुस्तान कैसा है और जीवन में गर जीना है तो मरना सीखो" से देश भक्ति की भावना से प्रेरित किया। राम रतन श्रीवास "राधे राधे" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) "मैं नेता हूँ , संकल्प भारत का नेता हूँ " का काव्यांजलि आजादी के अमृत महोत्सव पर्व प्रस्तुत किया । अमिता मिश्रा (छत्तीसगढ़) दहेजलोभियों को सबक सिखाने का प्रयास किया जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसे घर न ब्याहो बाबा से मंच के सभी साहित्यकारों ने हौसला अफजाई किया। कार्यक्रम के संचालन कर रही ममता मनीष सिन्हा ने " हांँ सत्य है की मुझमें देशभक्ति के अहंकार है" प्रस्तुत किया जिससे तालियों की गड़गड़ाहट होने लगी। और, *तुलेश्वर कुमार सेन राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) ने लव जिहाद और इंटर काष्ट विवाह, माता पिता के निर्णय के विरुद्ध या घर से भाग कर विवाह करने वालों पर कटाक्ष करते तुझे पाने के लिए मेरी बेटी हमने कहां कहां नहीं* की बेहतरीन काव्यांजलि प्रस्तुत किया।पूरे मंच को भाव विभोर कर दिया सभी के आंखों में आसूं ला दिए।और चिंतन करने की आवश्यकता है आज की प्रमुख समस्या है पर बल दिया।
आज प्रथम चरण का प्रतियोगिता संख्या-तीन के विजेता घोषित किए गए जिनके नाम हैं- प्रथम -- मंजुषा राधे द्वितीय- उमेश नाग , तृतीय- देवदीप भट्टाचार्य रहे। साथ ही राम भरोस तांडेय , बसवराज मेदार भारद्वाज , नंदलाल त्रिपाठी पितांबर, अगले भाग के प्रतिभागी के रूप में योग्य पाए गए । देश भर में अंतिम (फाइनल) चरण में आने वाले प्रथम विजेता को टेब/पीसी पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया जाएगा एवं द्वितीय, तृतीय को अन्य उपहार प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय प्रतिभा रत्न सम्मान भी प्रदान किया जायेगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के रचनाकारों के प्रतिभा को संवारने एवं राष्ट्रीय स्तर के मंच में प्रस्तुति देकर भारत को साहित्य जगत में परचम लहराना है। इसमें क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण के माध्यम से आयोजित होंगे और प्रत्येक चरण के प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को अंत के पहले (सेमीफाइनल) में अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा और जो सेमीफाइनल में विजेता घोषित किए जाएंगे। अंतिम (फाइनल) में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रस्तुति देकर साहित्यिक जज के द्वारा दिए गए निर्णय पर विजेता घोषित किए जाएंगे। अंतिम (फाइनल) 8 मार्च 2022 नई दिल्ली में आयोजित होगी। जिसमें मुख्य अतिथि के कर कमलों से विजेता को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह आदि प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक प्रतिभागी को प्रशस्ति पत्र देकर इस मंच के माध्यम से सम्मानित किया जाएगा। वर्चुअल (आनलाईन) माध्यम से काव्य पाठ में शामिल होने पर ई प्रमाण पत्र /प्रशस्ति पत्र और प्रत्यक्ष (आँफलाइन) के माध्यम से होने पर कार्यक्रम में सभी प्रतिभागी को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।
इसी के साथ सभा के अध्यक्ष महोदय सुरेश शौर्य प्रियदर्शी ने सभी साहित्यकारों का बधाई देते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता का उद्देश्य भारतीय संस्कृति परंपरा और विरासत को निखारना है साथ ही सभी का आभार प्रकट किया । इस मंच के सह संपादक राम रतन श्रीवास एवं ममता मनीष सिन्हा ने संयुक्त रूप से सभा समापन की घोषणा की।

















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