खैरागढ़-महाशिवरात्रि पर्व विशेषशिव और शक्ति के उपासक राजा वीरेन्द्र बहादूर सिंह ने 75 वर्ष पहले की थी स्थापना
दस वर्ष में तैयार हुआ शहर का वीरेश्वर महादेव मंदिर, शहर में आस्था और मनोकामना सिद्धी का प्रतीक,
महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भीड़, चार पहर में होती है पूजा, दिनभर चलता है अभिषेक
खैरागढ़ । शहर के शिवमंदिर मार्ग में स्थापित विख्यात रियासत कालीन वीरेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 75 वर्ष पूर्व तत्कालीन खैरागढ़ के राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने करवाया था । लगातार आस्था का केन्द्र बनचुके इस मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है । मंदिर प्रांगण में मेले का आयोजन भी कराया जाता है। मंदिर का निर्माण दस वर्षो में पूर्ण कराया गया था । जिसके बाद यहाँ भगवान शिव की प्रतिमा और शिवलिंग की स्थापना प्राणप्रतिष्ठा के साथ राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने की थी । शिव और शक्ति के उपासक राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह रानी पदमावती सिंह ने मंदिर निर्माण की आधारशिला 12 मार्च 1938 को रखी थी । दस वर्ष तक चले निर्माण कार्य के बाद मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा कार्यक्रम महाशिवरात्रि पर्व पर 19 फरवरी 1947 को राजा और रानी द्वारा कराया
गया था ।
चार पहर की होती है पूजा
शहर के वीरेश्वर महादेव मंदिर में शिवरात्रिपर्व पर चार पहर की पूजा होती है। मंदिर के पुजारी पं विभाष पाठक ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व के दौरान ब्रम्हमूहूर्त, सुबह, दोपहर शाम को शिवपूजन की परंपरा है। दिनभर भगवान भोलनाथ का अभिषेक जारी रहता था। इस दौरान शहर सहित ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहाँ दर्शन और पूजन के लिए पहुँचतें है । रात को आखिरी पहर की पूजा श्रमिक वर्ग केद्वारा की जाती है । परंपरानुसार इस दौरान रात्रि पूजन की सारी व्यवस्था पूजन करने वाली मंडली बनाती है। । फिलहाल इस मंडली का संचालन भारत यादव कर रहे है ।
पांच पंथ की होती है यहाँ पूजा
पं विभाष पाठक ने बताया कि वीरेश्वर महादेव मंदिर में पांच पंथ की पूजा होती है। यह आसपास इलाके में कहीं नहीं होती । यहाँ शिवलिंग के साथ शिव की प्रतिमा भी स्थापित है। शिवपरिवार के अलावा अन्य गणों को भी यहाँ विराजित किया गया है। वीरेश्वर महादेव मंदिर आस्था और मनोकामना सिद्धी मंदिर माना जाता है। मंदिर का निर्माण वास्तुशिल्प के हिसाब से कराया गया है । उस दौरान इसके निर्माण में पुरानी पद्धति से चुना गोंद, चेल सहित सामानों का उपयोग बेजोड़ तरीके से किया गया है। शिवलिंग और प्रतिमा भी विशेष ग्रेनाइट से निर्मित है। पं विभाष पाठक ने बताया कि मंदिर के ऊपर स्थापित कलश की कलशारोपण की प्रक्रिया आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को राजा साहब वीरेन्द्र बहादुर द्वारा कराई गई थी ।
आज उमड़ेगी भीड़
महाशिवरात्रि पर्व पर आज वीरेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में विशेष तैयारी की गई है। बस स्टैण्ड में स्वागत द्वार के साथ पूरे रास्तें को तोरण पताकों से सजाया गया है । वीरेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर आज भक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी । इस दौरान यहाँ वीरेश्वर महादेव समिति द्वारा भंडारे की व्यवस्था भी हर वर्ष के अनुसार की गई है ।
*
सीएनआई खैरागढ़ से सोमेश कुमार की रिपोर्ट।

















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.