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Saturday, March 5, 2022

जाल बांधा में रामकथा समागम का शुभारभ विचारवान को ही मिलता है विवेक पं राजन

 


जाल बांधा में रामकथा समागम का शुभारभ विचारवान को ही मिलता है विवेक पं राजन

 ग्राम जालबांधा में आयोजित पांच दिवसीय रामकथा समागम का शुभारंभ गुरुवार को करतें ख्याति प्राप्त कथा वाचक पं. राजन महाराज ने प्रथम दिवस हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान कराया । इससे पूर्व बुधवार को 24 घंटे चल रहे अखंड राम नाम संकीर्तन का समापन हुआ। जालबांधा पहुंचने पर पं. राजन का श्रद्धालुओं ने रामकथा के संयोजक पं. मिहिर झा की अगुवाई में स्वागत किया । कथा सुनने पूर्व विधायक गिरवर जंघेल, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव नीलेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ नेता निलाम्बर वर्मा, सुनीलकांत पांडेय, प्रोफेशनल्स कांग्रेस के जिला अध्यक्ष उत्तम सिंह, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष यशोदा वर्मा, मंडल भाजपा अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, पूर्व जनपद अध्यक्ष टीलेश्वर साहू सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे.


विचारवान को ही मिलता है विवेक


रामकथा के प्रसंग का शुभारंभ करते हुये पं. राजन महाराज ने प्रभु राम के प्रति भगवान शिव की अगाध भक्ति की कथा सुनाई और बताया कि जब भगवान राम वनवास के दौरान रावण द्वारा सीता हरण के बाद दारूण होकर माता सीता की खोज करते हुये दक्षिण की ओर जा रहे थे तब अनायास भगवान शिव से उनकी भेंट हुई । शिव जी ने श्रीराम को प्रणाम किया यह देखकर माता सती आश्चर्य चकित I हुई और उनके मन में संशय उठा कि जगत में पूजे जाने वाले भगवान शिव रोते-बिलखते हुये किस मानव का वंदन कर रहे हैं। शिव जी द्वारा बताये जाने पर भी कि बिलखते हुये राम और कोई नहीं साक्षात जगदीश है सती माता का संशय कम नहीं हुआ। इस प्रसंग को लेकर पं.राजन जी महाराज ने बताया कि मानव जीवन में हर रोग से मुक्ति का उपचार है किंतु संशय और शंका का कोई उपचार नहीं। इसलिये मनुष्य को सदैव विवेकवान होना चाहिये । लेकिन विवेक केवल उन्हें ही प्राप्त होता है जो विचारवान होते हैं साथ ही उन्होंने कथा प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह भी बताया कि अपने से श्रेष्ठ व्यक्ति पर कभी भी कोई संशय नहीं करना चाहिये । ऐसा करने से केवल हानि ही होती है । उन्होंने कथा प्रसंग के माध्यम से मानव जीवन को नाशवान व नश्वर बताते हुये कहा कि शरीर मुक्ति के लिये ही है लेकिन आत्मा की मुक्ति प्रभु भक्ति से ही मिल सकती है।


*सीएनआई खैरागढ़ से सोमेश कुमार की रिपोर्ट*

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