खैरागढ़ विधानसभा में राज फैमिली को ध्वस्त करने वाले पहली शख्स है कोमल जंघेल मतदाताओं की पहली पसंद है ।
खैरागढ़ राजनांदगांव। उप चुनाव की घोषणा होते ही दोनों ही पार्टियों में योग्य उम्मीदवार के चयन के लिए माथापच्ची का दौर शुरू हो गया है वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भगवा माहौल में रंगे पूरे देश में खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव में ही भारतीय जनता पार्टी की से उम्मीदवार बना रही है यह काफी दिलचस्प है लेकिन उससे पहले जब जब इस क्षेत्र में भाजपा का नाम आता है कोमल जंघेल ऐसा नाम है जो अनायास ही लोगों के दिलों दिमाग में छा जाता है दरअसल इस विधानसभा क्षेत्र के एक छोटे से गांव गिर गोली से संबंध रखने वाले कोमल जंघेल छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ से एकमात्र राष्ट्रीय सदस्य के रूप में पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल इस मुकाम पर पहुंचे हैं उसके प्रति उसका पार्टी के प्रति समर्पण जनता के प्रति विश्वास काम के प्रति प्रतिबद्धता राजनीतिक परिपक्वता ऐसे ही कारण है भारतीय जनता पार्टी से इस विधानसभा में प्रबल दावेदार कोमल जंघेल की दावेदारी हर वर्ग सभी समाज को लेकर चलने वाला निश्चित रूप से सर्वमान्य है परंतु यह पहला अवसर नहीं है जब पार्टी में अंदर खाने उनके ही राजनीतिक विरोधी जो उनके वर्चस्व को कायम होना नहीं देखना चाहते कई बार नीचा दिखाने का प्रयास किए हैं
लेकिन सफल नहीं हो पाया कोमल जंघेल ने 2007 में पहली बार खैरागढ़ राज परिवार का तिलक तोड़ा उसके पश्चात 2008 के विधानसभा चुनाव में वह शानदार विजयश्री हासिल किया तत्पश्चात 2013 विधानसभा चुनाव में महज 21 सो वोट से हार गए बताया जाता है कि इस हार के पीछे खैरागढ़ के ही भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता अपनी पूरी ताकत झोंक दिए थे क्योंकि कोमल जंघेल की रहते उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा कभी पूरा नहीं हो पाएगी उसके बाद भी कोमल 2018 घूर सत्ता विरोधी लहर में राजनांदगांव जिले में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह एवं पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल ही अपनी सीट बचा पा रहे थे हालांकि कोमल जंघेल महज एक बूथ स्वर्गीय देवव्रत की जीत का अंतर काफी कम था संघात्मक दृष्टिकोण से हुए चुनावी मंथन पर 2013 2018 दोनों में कोमल जंघेल की हार का बहुत बड़ा कारण भाजपा के ही खैरागढ़ के कद्दावर नेता का नाम सामने आ रहा है हालांकि इस मामले में कुछ पदाधिकारियों ने बगावत भितरघात करने वालों पर कार्यवाही करने का सुझाव दिया परंतु उस नेता जी की पकड़ बहुत मजबूत थी उस पर कार्रवाई नहीं हो पाई वर्तमान परिपेक्ष में क्षेत्र से स्वाभाविक दावेदार है किसान मुद्दे को लेकर प्रभाव शील तरीके से बैठी कांग्रेस का इस क्षेत्र से अगर कोई भारतीय जनता पार्टी से कड़ी चुनौती दे सकता है वह एकमात्र सर्वमान्य चेहरा कोमल जंघेल ही हो सकता है लेकिन कोमल जंघेल को दूसरों से नहीं अपने ही लोगों से बच कर रहना होगा हालांकि उनकी पकड़ शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्र में जबरदस्त पकड़ है उनकी काम कराने की शैली और खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्रों में सालों साल लंबित पड़े परियोजनाओं को पूरा कराने में बहुत बड़ा योगदान है हेमंत वर्मा की कलम से

















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