सुकमा से जिला ब्यूरो संजय सिंह भदौरिया
मो-9424222500
सुकमा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को लगातार प्रशासन के सम्मुख रख रही अधिवक्ता दीपिका
सुकमा- 8 मार्च महिला दिवस के अवसर पर यदि सुकमा जिले में सामाजिक या राजनीतिक क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ती हुई महिलाओं की बात की बात करें तो जिले के छिंदगढ़ विकास खण्ड के छोटे से गांव पाकेला की अधिवक्ता दीपिका शोरी का नाम आगे आता है दीपिका बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही उन्होंने बीएससी बायोटेक्नोलॉजी से होने के बाद एलएलबी में गोल्डमेडल हासिल करने के बाद एलएलएम भी किया उन्होंने केमेस्ट्री में एमएससी भी किया है,गोंड समाज से ताल्लुक रखने वाली दीपिका शुरू से ही बहुत भावुक प्रव्रत्ति की रही व बचपन से ही अपने समाज व महिलाओं,शोषित,पीड़ित वर्ग को देखकर उनके हक में कुछ करने की सोच रखती थी जिसके आड़े उनकी सरकारी नौकरी आड़े रहती थी इस वजह से उन्होंने दो दफा शिक्षिका के पद से त्यागपत्र देकर समाजसेवा की शुरुवात करने के बाद राजनीति के क्षेत्र में अपना कदम रखा वर्तमान में भाजयूमो प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर रहने के साथ साथ दीपिका सुकमा व्यवहार न्यायालय में बतौर अधिवक्ता शोषित वंचितों महिलाओं के हित मे कार्य करते हुए सुकमा जिले के विभीन्न गाँव में भ्रमण कर जन समस्याओं को प्रशासन के सम्मुख रखकर उसे दूर करने का प्रयास कर रही हैं
*100 से अधिक गाँव का दौरा कर चुकी हैं दीपिका*
दीपिका का कहना है कि सुकमा जिले में हमारे ग्रामीण भाई एवं बहन अशिक्षित होने के कारण ही समस्याओं से सबसे ज्यादा पीड़ित हैं उन्होंने कहा कि पिछले 3 सालों में मैं सुकमा जिले के बुर्कापाल, इरपागुडा, पोंदुम,अर्कातोंग, सुरभीरास, डोलेरास,केरातोंग,गुरबे,पालेंम,साडरापाल,गुफ़नपाल, कुमा कोलेंग,बाड़नपाल,नयापारा,पेंदलनार,कुन्दनपाल,सौतनार, मड़कामी रास,कोकावाडा, पुसपाल,चितलनार जैसे लगभग 100 गाँव का दौरा कर चुकी हूं व लगातार इन गाँव के ग्रामीण,युवा,बच्चे महिलाओं के सम्पर्क में हूँ मैंने देखा है इन गाँव मे सबसे ज्यादा अभाव शिक्षा का है जिसके कारण लोग अपने अधिकार नहीं समझते उन्होंने कहा कि कानूनी जानकारी व कानूनी अधिकार के ही कारण गत वर्ष टहकवाडा व कनकापाल के ग्रामीणों ने झीरम घाटी में जंगल के बीच रहने वाले अपने ही आदिवासी भाइयों के सात घरों को जला दिया था मैं स्वयं उनके बीच जंगल मे जाकर उस वाकये को देखा था व उसके बाद दोनों गाँव के सैकड़ो ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकार बताए जिसके बाद उन्होंने अपनी गलती भी स्वीकार की थी इस क्षेत्र में लोगों को कानूनी रूप से जागरुक करने की नितांत आवश्यकता है और मैं इस कार्य को पूरी ईमानदारी करने का प्रयास कर रही हूं,आज गांव में जाकर देखिए पीएम आवास का मामला हो या मजदूरी भुगतान का या सामाजिक सुरक्षा पेंशन का जानकारी के अभाव में ग्रामीणों को इन समस्त योजनाओं में शोषित होना पड़ रहा है

















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