बजरंग घाट पर भालू की आहट से लोगो मे फैला दहशत
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बालाघाट।वन्यजीवों का शहरी क्षेत्र में आना किसी खतरे से कम नही है।साफ होते जंगल, पानी की समस्या, खाने की समस्या के चलते वन्यजीवों का आबादी वाले क्षेत्रों में जाना प्रमुख कारण है।ऐसा ही एक ताजा मामला बजरंग घाट का है जहाँ लोगो ने भालू की आवाजें सुनी जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उसके बाद वन विभाग ने भी इसे गंभीरता से लिया है। जिसके बाद वन विभाग ने टीम गठित कर बजरंग घाट क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया, हालांकि अब तक भालू की मौजूदगी के कोई प्रमाण तो नही मिले है, लेकिन वन विभाग ने सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।
वन अधिकारी अमित पटौदी ने बताया कि सुबह घूमने वालो से हमे सूचना मिली थी कि बजरंग घाट शंकर घाट के बीच स्थित वनक्षेत्र में भालू दिखाई दिया है। हमारी टीम वनक्षेत्र में लगातार सर्चिंग कर रही है अभी तक ऐसा कोई प्रमाणिक साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ हैं, लेकिन
भालू से बचाव के लिए हमने लोगो से अभी कुछ समय तक सावधानिया बरतने का अनुरोध किया है। लोग, अभी अकेले जंगल में भ्रमण ना करें। समूह में भ्रमण करें, जंगल में अकेले जाना आवश्यक हो तो साथ में बांस की लाठी या आवाज करने वाले उपकरण जैसे घंटी या सीटी साथ में रखें। जंगल के मुख्य मार्ग से अंदर घने जंगल में प्रवेश ना करें। रात्रि एवं अंधेरे में जंगल में आना जाना ना करें। यदि भ्रमण के दौरान भालू से आमना-सामना हो तब संयम रखें और धीरे-धीरे दूरी बनाते हुए पीछे हटे। भालू से सामना होने पर भागना एवं हड़बड़ी नहीं दिखाना चाहिए। यदि ऐसी परिस्थिति निर्मित हो जाए कि भालू आप पर हमला करने का प्रयास करें तब ऐसी स्थिति में अपने बाजू को फैलाकर अपने आप को बड़ा दिखाने का प्रयास करें एवं जोर-जोर से चिल्लाना शुरू करें।
भालू द्वारा हमला करने पर अपने पैर छाती के पास चिपका कर अपने संवेदनशील अंगों को सुरक्षित रखें। भालू की दृष्टि एवं सुनने की क्षमता कमजोर होती है। सामान्य तौर पर भालू अनावश्यक मानव पर हमला नहीं करता है परिस्थितिजनक खतरा होने पर ही भालू द्वारा हमला किया जाता है। कृपया सतर्क रहें सुरक्षित रहें।
उन्होंने कहा कि यदि भालू के प्रमाण मिलते है तो कुछ समय के लिए लोगो का बजरंग घाट में सैर को बंद किया जाएगा।
इधर इस मामले में रोजाना घूमने जाने वालो ने कहा कि प्रतिदिन सैकड़ो लोग बजरंग घाट की ओर प्राकृतिक वातावरण में सैर करने जाते है, कई बार अन्य वन्यप्राणियों में चीतल, खरगोश, जंगली सुअर, अजगर सहित अन्य प्राणी देखे गए है। जिसके बाद अब भालू के आने से लोग दहशत में है। लगातार वन्यप्राणियों का रहवासी क्षेत्र और पेयजल स्त्रोत की ओर आना, यह साबित करता है कि इस भीषण गर्मी में जंगल में जलस्त्रोत की कमी है, जिस पर वनविभाग को ध्यान दिया जाना चाहिये, यदि भालु के प्रमाण मिलते है तो विभाग उसे सुरक्षित जंगल की ओर भिजवाने का प्रबंध करें।
चूंकि बजरंग घाट का क्षेत्र, जंगल से लगा होने से वहाँ वन्यप्राणियों की आवाजाही होती है, यह तो खुशी की बात है कि हमारे जंगलो में वन्यप्राणियों की बहुलता है, वनविभाग को चाहिये कि जब तक भालु का मूवमेंट की खबर मिल रही है तब तक वहां सैर पर प्रतिबंध लगाकर भालू को सुरक्षित पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाय।


















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