बारनवापारा के किसान वन अधिकार पत्र पाने सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगते हुए : मजबूर
*कसडोल :-* राज्य सरकार द्वारा वन अधिकार अधिनियम- 2006 के अन्तर्गत पात्र अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वननिवासियों को वन अधिकार पत्र उपलब्ध करावाने एवं सामुदायिक वन अधिकारों से लाभान्वित करने हेतु राज्य में विशेष अभियान चलाया गया था।जिसमें कोई कोई भी पात्र हितग्राही वन अधिकार पत्र(पट्टा)पाने से वंचित न हो।किन्तु बारनवापारा के कुछ किसानों को आज पर्यंत तक वन अधिकार पत्र अप्राप्त होने से राज्य सरकार की चल रही महत्वपूर्ण योजनाओं से लाभ नहीं मिलने अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।जहाँ कसडोल अनुविभागीय अधिकारी के दफ्तर ,व कार्यलय कलेक्टर आदिवासी विकास विभाग बलौदाबाजार दफ्तर के चक्कर काटने को किसान मजबूर हैं।वही इन दफ्तरों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी द्वारा आश्वासन के अलावा कुछ भी हाशिल नहीं हुआ है
सिवाय आज आना, कल आना,परसो आना करते-करते साल भर से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी अभी तक वन अधिकार पत्र नही मिला है।इस संबंध में किसान बेनुराम यादव ने बताया कि मुझे और मेरे गांव के कुछ लोगों को वन अधिकार पत्र नहीं मिला है जिसके चलते मैं कापी परेशान हूँ।मेरे ऊपर सोसायटी का कर्जा है मैं धान नही बेंच पा रहा हूं।खाद-बीज नहीं मिल पा रहा है। शासन की लाभकारी योजनाओं से वंचित हो गया हूं।
बारम्बार मुझे सोसायटी कर्जा का नोटिस थमा देता हैं। ऐसे में मैं क्या करूँ ,मेरे पास कोई अन्य रास्ता नही हैं कि मैं कर्ज अदा कर सकूँ। हम वन अधिकार पत्र(पट्टा)पाने सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हो गए हैं जहाँ हमे आये दिन खाली हाथ ही लौटना पड़ता है।सरकार के नौकरशाही अफसर बेलगाम हो गए हैं।जिसके चलते हमे शारारिक,मानसिक, आर्थिक रूप से कठनाइयों का आये दिन सामना करना पड़ रहा है।
*सी एन आई न्युज से मुकेश साहू की रिपोर्ट*


















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