सैकड़ों किसानों ने ट्रेन रोकने में नाकामयाब होने पर किया सड़क जाम
(शिवशंकर पाण्डेय जिला ब्यूरो)
बालाघाट।किसानों की वर्षो पुरानी मांग नही पूरी होने पर सैकड़ों की संख्या में किसानों ने सोमवार को ट्रेन रोकने में नाकामयाब होने पर सड़क जाम कर अपना रोष जताया।कटंगी से तिरोड़ी रेल मार्ग भूमि अधिग्रहित किसानों ने सोमवार को रेल रोको आंदोलन करने बायपास रेलवे क्रासिंग में एकजुट हो गए।अपनी मांगों को लेकर सरकार, सांसद एवं रेलवे प्रशासन के विरुद्ध नारे लगाते हुए तिरोड़ी से गोंदिया जाने वाली ट्रेन को रोकने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस बल ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।ट्रेन को रोकने में नाकामयाब होने पर किसानों ने सड़क पर बैठकर सुबह सात से 11 बजे तक चकाजाम किया।
प्रदर्शनकारी किसानों ने बताया कि आंदोलन की सूचना ट्रेन विभाग एवं स्थानीय अधिकारियों को दे दी थी।आंदोलनकारी किसान शहरी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक दो अर्जुननाला कटंगी बायपास रेलवे पुल के पास कटंगी बैठकर और ट्रेन रोककर आंदोलन करेंगे।रेलवे प्रशासन ने कटंगी से तिरोड़ी ट्रेन परियोजना के लिए 205 किसानों से 2015 में भूमि अधिग्रहित की थी। जिसमें से 42 किसान परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी मिल चुकी है। लेकिन 163 किसानों को मात्र मुआवजा ही प्रदान किया गया है।इन किसानों के परिवार के एक सदस्य ने भी नौकरी के लिए आवेदन किया था। मगर रेल प्रशासन इन्हें अब तक नौकरी नहीं दे पाया है।
कई बार लगाए डीआरएम कार्यालय के चक्कर
किसानों ने अपने परिवार के सदस्यों को नौकरी लगावाने के लिए कई बार डीआरएम कार्यालय नागपुर और बिलासपुर के चक्कर काट चुके है। नौकरी नहीं मिलने से आक्रोशित बेरोजगार युवा और किसान ट्रेन रोको आंदोलन करने को मजबूर हुए।आंदोलन में अधिग्रहित किसानों के परिवार की महिलाओं बच्चों सहित किसान शामिल रहे।
वर्ष 2015 में की थी भूमि अधिग्रहित
कटंगी से तिरोड़ी रेल परियोजना भू-अर्जन से जुड़ा हुआ है।रेलवे ने इस परियोजना के लिए वर्ष 2015 में 205 किसानों से भूमि अधिग्रहित की थी।भूमि अधिग्रहण के रेलवे ने भू-अर्जन के नियमानुसार प्रभावित किसान के परिवार के एक सदस्य को नौकरी नहीं दी है।कटंगी से तिरोड़ी रेल परियोजना के लिए जिन किसानों की भूमि अर्जन की गई। उनमें से 163 किसान परिवारों के सदस्यों ने रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन किया था। जिसमें रेलवे 42 लोगों को रेलवे नौकरी दे चुका है, लेकिन शेष आवेदकों को लगातार रेल अधिकारी गुमराह कर भ्रामक जानकारी दे रहे है। जिससे युवाओं में आक्रोश पनप रहा है और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की वजह से अब युवा नौकरी नहीं मिलने तक भूख हड़ताल पर बैठ चुके है।इसके पूर्व भी इन बेरोजगार युवकों ने अक्टूबर 2020 और जनवरी 2021 में तिरोड़ी में शांतिप्रिय धरना प्रदर्शन शुरू किया था।जिसके बाद रेल अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए लिखित में शीघ्र ही नौकरी की कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन देकर धरना प्रदर्शन समाप्त करवाया था।लेकिन आज तक रेल प्रशासन ने युवाओं को नौकरी देने के लिए कोई ठोस कागजी कार्रवाई नहीं की है।
2016 में नौकरी के लिए किया था आवेदन
163 आवेदकों ने साल 2016 में पहली बार नौकरी के लिए आवेदन किया। आवेदन करने के बाद युवक नौकरी का इंतजार करने लगे। रेलवे ने इन आवेदकों को नौकरी प्रदान करने की पूरी कागजी कार्रवाई और सत्यापन प्रक्रिया में दो साल का समय गुजार दिया। इस दो साल में दर्जनों बार आवेदकों को नागपुर कार्यालय बुलाया गया और जब नौकरी देने की बारी आई तो अप्रैल 2019 में महज 42 लोगों को नौकरी प्रदान की गई। बाकि के आवेदकों को पहले वैश्विक माहमारी कोरोना का लिखित बहाना और अब भू अर्जन अधिनियम 2013 के नियम कायदे कानूनों का मौखिक रुप से हवाला दिया जा रहा है।आंदोलन का नेतृत्व केशर बिसेन जिला पंचायत सदस्य, युवा नेता इंजीनियर प्रशांत मेश्राम, असंगठित क्षेत्र अध्यक्ष मुल्कराज आनंद एवं किसानों ने किया।
चार घंटे चला चकाजाम
- आंदोलनकारियों ने सुबह 7 बजे से बायपास रेलवे क्रासिंग में इकट्ठा होकर सांसद एवं रेलवे प्रशासन एवं केंद्र सरकार के विरूद्ध जमकर नारेबाजी की।गुस्साए किसानों ने 12 बजे के करीब जाम को खोला।
इनका कहना
किसानों की रेलवे ने भूमि अधिग्रहण किया है। इनमें से 42 किसानों को नौकरी मिली है। अन्य को नहीं मिल पाई है। उसी मांग को लेकर किसान प्रदर्शन कर रहे थे, समझाइश देकर प्रदर्शन बंद कराया गया।
शैलेंद्र राय, तहसीलदार।


















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