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Thursday, May 12, 2022

नर्सों के बिना स्वास्थ्य सेवायें अधूरी है - आयुषी शुक्ला

 


नर्सों के बिना स्वास्थ्य सेवायें अधूरी है - आयुषी शुक्ला

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 

बिलासपुर - नर्सों के योगदान को याद करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिये प्रतिवर्ष 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। इस संबंध में चर्चा के दौरान अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में सेवा दे रही आयुषी शुक्ला ने अरविन्द तिवारी को बताया कि डॉक्‍टरों के साथ बीमारों के उपचार में पूरा सहयोग करने वाली नर्सों की कोरोना महामारी से पीड़ित लोगों के ईलाज में भी अहम भूमिका है। नर्सों के साहस और उनके सराहनीय योगदान , कार्यों हेतु सम्‍मान जताने के लिये यह दिवस मनाया जाता है। कोविड-19 महामारी से लड़ने में नर्सें सबसे आगे हैं।डॉक्टर्स और दूसरे हेल्थ केयर वर्क्स की तरह नर्सें भी बिना आराम किये लगातार मरीज़ों की देखभाल कर रही हैं। नर्स अपने पूरे ज्ञान, अनुभव और मेहनत से एक मरीज की देखभाल करती हैं। आयुषी ने इस बात पर पूरा जोर देते हुये कहा कि नर्सों के बिना स्वास्थ्य सेवायें अधूरी है। रोगियों की देखभाल करना इतना आसान नहीं होता है। किसी भी मरीज के स्वस्थ होने में नर्सों का जो योगदान है , उसे हम भूल नहीं सकते हैं। नर्सों के काम को समझना , समाज में अधिक लोगों को इस पेशे के लिए प्रोत्साहित करना और सम्मान देना इस दिन का मुख्य उद्देश्य है।गौरतलब है कि इसी दिन 1820 को इटली के फ्लोरेंस में दुनियां की सबसे प्रसिद्ध नर्स फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था। वे एक इंग्लिश नर्स , एक समाज सुधारक और एक स्टैटस्टिशन थीं जिन्होंने आधुनिक नर्सिंग के प्रमुख स्तंभों की स्थापना की। फ्लोरेंस एक संभ्रात परिवार से ताल्लुक रखती थीं , उनके पिता विलियम एडवर्ड नाइटिंगेल एक समृद्ध जमींदार थे इसलिये जब उन्होंने 1845 में गरीब-असहाय लोगों की सेवा का प्रण लिया तो उन्हें अपने परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा था। लेकिन फिर इन्होंने जर्मनी में प्रोटेस्टेंट डेकोनेसिस संस्थान से नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की।प्रीमिया युद्ध के दौरान फ्लोरेंस ने लालटेन लेकर सभी सैनिकों की नि:स्वार्थ भाव से सेवा की थी और इसी वजह से उन्हें “लेडी विद द लैंप” के नाम से संबोधित किया जाता है। वे पेशेवर नर्सिंग की नींव रखने वाली पहली व्यक्ति थीं। उन्होंने वर्ष 1959 में अपनी किताब नोट्स आन नर्सिंग एंड नोट्स आन हास्पिटल्स प्रकाशित की। वर्ष 1860 में सेंट थामस अस्पताल और नर्सों के लिये नाइटिंगेल प्रशिक्षण स्कू‍ल की स्थापना की थी। यह दुनियां का पहला नर्सिंग स्कूल था जो अब लंदन के किंग्स कालेज का एक हिस्सा है। फ्लोरेंस की काम की वजह से नर्सों के पेशे और अस्पतालों के रंग-रूप में बदलाव आने लगे जिससे नर्सों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा। नर्स अपने पूरे ज्ञान , अनुभव और मेहनत से एक मरीज की देखभाल करती हैं। रोगियों की देखभाल करना इतना आसान नहीं होता है इसलिये नर्सों को इसके लिये विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। कोरोना से लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहीं नर्स, जान पर खेलकर मरीजों का इलाज करने में मदद कर रही हैं। जनवरी 1974 में फ्लोरेंस नाइटिंगेल की याद और सम्मान में 12 मई को इंटरनेशनल काउंसिल आफ नर्स द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाये जाने का प्रस्ताव यूएस में पारित हुआ था। किसी भी मरीज के स्वस्थ होने में नर्सों का जो योगदान है, उसे हम भूल नहीं सकते हैं। नर्सों के काम को समझना , समाज में अधिक लोगों को इस पेशे के लिए प्रोत्साहित करना और सम्मान देना इस दिन का मुख्य उद्देश्य है।


इस बार की थीम


इस वर्ष 2022 में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस की थीम है- 'नर्सेस : ए वॉयस टू लीड- इन्वेस्ट इन नर्सिंग एंड रिस्पेक्ट राइट्स टू सिक्योर ग्लोबल हेल्थ'. इस अर्थ है कि नर्सेस: नेतृत्व के लिए एक आवाज नर्सिंग में निवेश करें और ग्लोबल हेल्थ को सुरक्षित रखने के अधिकारों का सम्मान करें।भविष्य में इसके आधार पर नर्सों का स्वास्थ्य सेवाओं में महत्व और उनके नेतृत्व को लेकर काम किया जायेगा। अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस उनके लिये हमारी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का एक शानदार अवसर है।


फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार


नर्सिंग व्यवसाय को समाज में उचित सम्मान प्राप्त हो। इस वजह से हर साल 12 मई को देश में नर्सिंग में विशिष्ट सेवा के लिये राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार दिया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1973 में भारत सरकार के परिवार एवं कल्याण मंत्रालय ने की थी। रेडक्रास की अंतर्राष्ट्रीय समिति द्वारा प्रदान किया जाने वाला फ्लोरेंस नाइटिंगेल मेडल किसी नर्स को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। इस पुरस्कार की अहमियत इसी बात से प्रकट होती है कि इसे देश के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। इस पुरस्कार में 50 हजार रुपए नकद , एक प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया जाता है।

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