आज हलषष्ठी व्रत,
संतान की आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य के लिए
सी एन आई न्यूज के लिए पुरुषोत्तम जोशी की रिपोर्ट
रायपुर -भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हलषष्ठी मनााया जाता है। यह पर्व श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। चूंकि बलराम जी का प्रधान शस्त्र 'हल' और 'मूसल' है। अस्तु इस दिन को हलषष्ठी, हरछठ या ललही छठ के रूप में मनाया जाता है और श्री बलराम को 'हलधर' के नाम से जाना जाता है। इस दिन गाय के दूध और दही का सेवन करना भी वर्जित है। इस दिन व्रत करने का भी विधान है। व्रत करने से जो संतानहीन है, उन्हें श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है और जिनकी पहले से संतान है, उनकी संतान की आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। हलषष्ठी व्रत के दिन श्री बलराम के साथ-साथ भगवान शिव, पार्वती जी, श्री गणेश, कार्तिकेय जी, नंदी और सिंह आदि की पूजा का विशेष महत्व बताया है।
छत्तीसगढ़ में इस त्यौहार का विशेष महत्व है। आज पूरे छत्तीसगढ़ में इस त्यौहार को घर घर में मनाया जा रहा है, और संतान और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए पूजा अर्चना की जा रही है।


















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