संतान की दीर्घायु और कुशलता की कामना के लिए जिला मुख्यालय सहित नगर की महिलाएं प्रतिवर्ष हलषष्ठी का व्रत रख पूजा करती आ रही हैं।
योगेश चौहान जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
जांजगीर चांपा जिले में संतान की दीर्घायु और कुशलता की कामना के लिए जिला मुख्यालय सहित नगर की महिलाएं प्रतिवर्ष हलषष्ठी का व्रत रख पूजा करती आ रही हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
बलराम जी का मुख्य शस्त्र हल और मूसल है इसलिए उन्हें हलधर भी कहा जाता है एवं उन्हीं के नाम पर इस पावन पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा है, हलषष्ठी के दिन माताओं को महुआ की दातुन और महुआ खाने का विधान है। हलषष्ठी के दिन महिलाएं व्रत का संकल्प लेकर, भगवान गणेश,कार्तिक,शंकर और माता पार्वती एवं छठ माता की पूजा किए
एवं हल षष्ठी की कथा सूने। मान्यता के अनुसार इस व्रत में इस दिन भैंस केदूध, घी, सूखे मेवे, लाल चावल आदि का सेवन किया जाता है। इस दिन गाय के दूध व दही का सेवन नहीं किया जाता है। इन सभी मान्यताओं का नियमता के साथ पालन करते हुए महिलाओं ने पूजा संपन्न किए।




















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