जय महाकाल
बाबा की भस्म आरती चिता की राख से की जाती है।
महाकाल मंदिर के सामने से कोई बारात नहीं निकलती।
सी एन आई न्यूज़ के लिए पुरुषोत्तम जोशी
उज्जैन -महाकाल का यह मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां भगवान शिव धरती फाड़कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए हैं। भगवान श्री शिव जी ने अपनी एक हुंकार से राक्षस,दूषण,, का संहार किया था।
उज्जैन की इस पावन नगरी में स्थित भगवान शिव जी का तीसरा ज्योतिर्लिंग है।यह दक्षिणमुखी इकलौता ज्योतिर्लिंग है।
महाकाल के इस मंदिर में प्रातः भस्म आरती होती है।इस भस्म आरती में शामिल होने के लिए बुकिंग करानी पड़ती है।
पहले भगवान महाकाल की भस्म आरती के लिए चिता की भस्म से आरती की जाती थी, लेकिन आजकल गोबर के कंडे का भी उपयोग किया जाता है।
यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए महीनों पहले बुकिंग करा लेते हैं।
मान्यताओं के अनुसार भस्म आरती के वक्त महिलाओं को घूंघट करने के लिए कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार भस्म आरती के समय भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप में होते हैं।
उज्जैन का प्राचीन नाम, उज्जयिनी, कनकश्रृंगा,अवन्तिका आदि है।
यह मंदिर लगभग 800 से 1000 वर्ष प्राचीन माना जाता है।
यहां पर पूरे वर्ष भर भक्तों एवं श्रृद्धालु एवं पर्यटक दर्शन करने आते हैं।
यहां सच्चे मन से मांगी हुई हर मनोकामना पूरी होती है।























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