बुधवार को होगा भोमा से सिवनी के बीच इलेक्ट्रिफिकेशन का सीआरएस
सी एन आई न्यूज सिवनी से जिला ब्यूरो की रिपोर्ट
सिवनी- रेलवे माह में महज 18 किलोमीटर के हिस्से में हो पाया बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में विद्युतीकरण का काम पूरा!
नागपुर विलंब से ही सही अंततः दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले की सुध ली है। सिवनी जिले में भोमा से सिवनी के बीच महज 18 किलो मीटर के हिस्से में हाल ही में हुए विद्युतीकरण के काम का कमीशन ऑफ रेलवे सर्विस (सीआरएस) का काम बुधवार 28 दिसंबर को किया जाना निश्चित किया गया है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मण्डल रेल प्रबंधक कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी को बताया कि पता नहीं किस दबाव के चलते बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से का काम बहुत ही मंथर गति से संचालित होता आया है जबकि इससे लगे मण्डला संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से और छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र के हिस्से में काम युद्ध स्तर पर पूरा कर लिया गया है।
पूर्व में 18 दिसंबर को प्रसारित इस खबर को वीडियो में जरूर देखिए . . .
शनिवार 24 दिसंबर को हो सकता है भोमा से बरघाट नाका तक के हिस्से के इलेट्रिफिकेशन का सीआरएस!
सूत्रों ने बताया कि पहले यह सीआरएस 24 दिसंबर को प्रस्तावित था, किन्तु सिवनी से भोमा के बीच महज 18 किलोमीटर के हिस्से में कुछ औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाने के चलते सीआरएस की तिथि को आगे बढ़ाया गया है। अब यह बुधवार 28 दिसंबर को सुबह से आरंभ किया जाएगा।
नौ माह पूर्व हुआ था भोमा नैनपुर का सीआरएस
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि मण्डला संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में ट्रेक का सीआरएस लगभग डेढ़ साल पहले पूरा किया जाकर नैनपुर से भोमा के बीच के हिस्से के इलेक्ट्रिफिकेशन का सीआरएस 11 मार्च 2022 को पूरा कर लिया गया था। उसके बाद भी चूंकि भोमा से सिवनी होकर चौरई तक के हिस्से का विद्युतीकरण नहीं हुआ था इसलिए यहां सवारी गाड़ी का परिचालन संभव नहीं हो पा रहा था।
मार्च में हुआ था भोमा से बरास्ता सिवनी होकर चौरई तक के ट्रेक का सीआरएस
यहां यह बताना भी लाजिमी होगा कि बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से में भोमा से सिवनी होकर चौरई तक के लगभग 55 किलो मीटर के हिस्से में बिछाए गए ट्रेक (पटरियों) का सीआरएस 11 एवं 12 मार्च 2022 को कर लिया गया था। इसके बाद साढ़े नौ माह में भी महज 55 किलोमीटर के हिस्से में बिजली के खंबे खड़े करने और तार बिछाने का काम पूरा नहीं किया जा सका है, जबकि इन साढ़े नौ माहों में रेलवे के तकनीकि अधिकारियों के पास न तो कोविड का कोई बहाना था न ही अन्य कोई वजह थी जिसे बताकर इस काम में हुए विलंब को न्यायोचित ठहराया जा सकता।
विलंब का कारण है अज्ञात!
उधर, बिलासपुर स्थित जोनल रेल प्रबंधक कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी को बताया कि यह बात वास्तव में शोध का ही विषय मानी जा सकती है कि मण्डला संसदीय क्षेत्र और छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र में तो रेलवे के अधिकारी पूरी मुस्तैदी के साथ काम करते नजर आए, पर जैसे ही बात बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी जिले के हिस्से की आई, वैसे ही रेलवे के अधिकारियों ने काम को बहुत ही धीमि गति से करवाना आरंभ कर दिया।
सूत्रों का कहना था कि बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन अगर रेलवे के अधिकारियों की मश्कें कसकर रखते तो निश्चित तौर पर यह काम न केवल साल भर पहले ही पूरा हो चुका होता वरन अब यहां लोगों को सवारी रेलगाड़ी चलती दिखाई देती।


















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