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Thursday, January 5, 2023

राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को दिया सेवा का मंत्र

 राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को दिया सेवा का मंत्र 



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट


नई दिल्ली - आप सभी ऐसे समय में सेवाओं में शामिल हुये हैं , जब भारत ने अमृत काल में प्रवेश किया है और जी-20 की अध्यक्षता भी ग्रहण की है। यह वह समय है जब विश्व नये नवाचारों और समाधानों के लिये भारत की ओर देख रहा है। सैन्य इंजीनियर सेवाओं के अधिकारी के रूप में आप सभी रक्षा बलों यानि सेना , वायु सेना , नौसेना , तटरक्षक और अन्य संगठनों को रियर लाइन इंजीनियरिंग सहायता प्रदान करने में सहायक होंगे। आप सशस्त्र बलों को जिस तरह की समर्पित इंजीनियरिंग सहायता प्रदान करते हैं , उनके समग्र प्रदर्शन में बढ़ोत्तरी करता है और उन्हें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिये तैयार रखता है।

                        उक्त बातें महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन में सैन्य इंजीनियरिंग सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात कर उनको संबोधित करते हुये कही। उन्होंने कहा कि निर्माण के क्षेत्र में युवा अधिकारियों के रूप में एमईएस अधिकारियों का प्रमुख कर्तव्य पर्यावरण की देखभाल करना भी है। हमें सतत विकास के लिये नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक उपयोग करना चाहिये। इस दौरान राष्ट्रपति ने मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेस में अधिक संख्या में महिला सशक्तिकरण को बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक देश और देशवासियों की सेवा के लिये अपनी जान की परवाह भी नहीं करते हैं। आप सभी बहादुर बेटे और बेटियों को मातृभूमि की सेवा और सहायता करने का सौभाग्य मिला है और इसे महसूस करना चाहिये। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मैं मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेस में अधिक संख्या में महिला अधिकारियों की आवश्यकता पर भी जोर देना चाहूंगी। हाल के दिनों में हमने सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि देखी है। रक्षा बलों में कॉम्बैट रोल और मेडिकल सर्विसेस में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सकारात्मक बदलाव मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेस में भी दिखाई देगा। उन्होंने आगे कहा कि एमईएस बड़ी संख्या में सौर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं को पूरा करके राष्ट्रीय कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में काफी योगदान दे रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि वे नई निर्माण सामग्री का नवाचार और उसका उपयोग कर सकते हैं , जो निवासियों को खतरनाक रसायनों से बचाती है। उन्होंने कहा कि मानव कल्याण प्राकृतिक सामग्रियों से घिरे होने पर समग्र रूप से बढ़ता है। राष्ट्रपति ने कहा कि निर्माण क्षेत्र बहुत गतिशील है और तकनीकें बहुत तेजी से बदल रही हैं। यह क्षेत्र आर्थिक वृद्धि और विकास में प्रमुख भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि एमईएस अधिकारी परियोजना प्रबंधन के आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर बुनियादी ढांचे के विकास में अपना काफी योगदान दे सकते हैं। राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों से अपने भविष्य की परियोजनाओं में अत्याधुनिक तकनीकों जैसे कि मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे निर्माण के लिए अधिक कुशल डिजाइन और कम समयसीमा को लेकर सहायता मिलेगी। राष्ट्रपति ने इस पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि एमईएस ने गुजरात के गांधीनगर में अब तक का पहला थ्री डी प्रिंटेड आवास का निर्माण पूरा कर लिया है। उन्होंने एमईएस अधिकारियों से बड़ी संख्या में ऐसी तकनीकों के उपयोग को लेकर प्रयास करने का अनुरोध किया , जो लागत प्रभावी हैं और बर्बादी से बचने में सहायता करती हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति ने यथासंभव सामग्रियों के फिर से उपयोग को बढ़ावा देने का भी अनुरोध किया। इस कार्यक्रम में भारतीय रक्षा सेवा इंजीनियर्स, आर्किटेक्ट कैडर और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेस के सर्वेयर कैडर के अधिकारी प्रशिक्षु उपस्थित रहे।

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