23 फरवरीको जिला मुख्यालय मोहला में कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ तहसील का मांगको लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन..
कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा देते हुए राजस्व विभाग का शासकीय कर्मचारी घोषित करने तथा मालगुजारी माफ़ी जमीन का मालिकाना हक वापस देने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 23/02/2023 सौंपा जाएगा ज्ञापन ।
मुख्यमंत्री द्वारा 2019 में पाटन सम्मेलन में की गई घोषणा को पूरा करने ध्यानाकर्षण | कोटवार आजादी के पूर्व से पीढ़ी दर पीढ़ी ग्रामीण स्तर में रहकर अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं परन्तु सभी विभागों की चाकरी करने के बाद भी कोटवारों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है लम्बे अवधी तक सेवा देने के बाद सेवा निवृत्त होने पर कोटवारों को पेंशन, ग्रेच्यूटी की सुविधा नहीं मिल पाती नाम मात्र के मानदेय से अपने परिवार का गुजर बसर बने में कोटवारों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। झारखंड, उड़ीसा, महाराष्ट्र जैस निकटवर्ती राज्यों में कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा देकर उन्हें सम्मान जनक वेतन देने के अलावा अन्य सुविधाएँ भी दी जा रही है। परन्तु छत्तीसगढ़ जैसे सम्पन्न राज्य में कोटवारों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। प्रदेश के कोटवारों को नियमित करते हुए उन्हें राजस्व विभाग का शासकीय कर्मचारी घोषित करने की मांग रखी गई है। वैसे ही मुख्यमंत्री द्वारा23 फरवरी 2019 को कोटवारों के प्रांतीय सम्मेलन पाटन में यह आश्वासन दिया था कि स्वतंत्रता के पूर्ण (1950 के पूर्व भू.पू. मालगुजारों द्वारा दी गई जमीन जो आपके राजस्थ मंत्रीत्व कातन काल में भूमिस्वामी हक में दिया गया था और उक्त जमीन वापस छीन ली गई है तो विधिवत से कोटवारों के हक में दे दिया जाएगा, परन्तु आज पर्यन्त उस पर अमल नहीं हो पाया बल्कि उल्टे कोटवारों के नाम राजस्व अभिलेखों से विलुप्त कर उसे शासकीय भूमि दर्ज किया जा रहा है। जिसके कारण कोटवार उनके दादापरदादाओं से माफी जमीन के रूप में मिली जमीन जिस पर उनके परिवार 100 वर्षों से भी अधिक समय से निर्वाध रूप से काबीज है वंचित होते जा रहे है।
भूरा. संहिता में वांछित संशोधन करने मात्र से कोटवारों को उनके हक की जमीन वापस मिल जाएगी जिसे आप कर सकते है, क्योंकि आपकी सरकार ने बेजा कलाधारियों को जिस पे पिछले 20 वर्षों से काबिज है को उन्हें भूमि स्वामी हक में दिये जाने का भूरा संहिता में संशोधन कर प्रावधान लाया है।
आपके द्वारा दिये गये आश्वासन के अनुरूप भूरा. संहिता में वांछित संशोधन करते हुये कोटवारों को मालगुज़ारों से प्रदत्त भूमि पर मालिकाना हक दिलाये जाने के संबंध में उचित कार्यवाही कर अनुग्रहित करेंगे।
छ.ग. के आम जन मानस के दिल की आवाज के अनुरूप प्रदेश के 16,000 कोटवार एवं उनका परिवार भी इसी उम्मीद में है कि-
आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप कोटवारों की भावनाओं को गंभीरता से लेते हुये तथा सहानुभूतिपूर्वक विचार कर कोटवारों के निम्न दो प्रमुख मांगों की पूर्ति कर शासनादेश जारी करने की कृपा करेंगे।
1. कोटवारों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देते हुये राजस्व विभाग में संविलयनकिया जावे।
2. मालगुजारों द्वारा 1950 को पूर्व दी गई माफी भूमि पर कोटवारों को भूमिस्वामी वापस दिया जायें।
प्रेस विज्ञप्ति के लिए यह जानकारी कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ तहसील अध्यक्ष कलाराम कुलदीप ने दी है। कार्यक्रम को सफल बनाने दुर्गेश मंडावी मोहला, उत्तम कचलामे मुनगाडीह,ढेलूदास चापाटोला, कलीराम पेंदाकोड़ो,जीवन दास मानिकपुरी मोहभट्ठा आदि जुटे हुए हैं।
सी एन आई न्यूज मोहला से योगेन्द्र सिंगने की रिपोर्ट...


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.