भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी एक और योजना, 2 साल के अंदर ही सड़क हुई खस्ताहाल
जिला ब्यूरो सुरेंद्र मिश्रा
बिलासपुर जिले में सरकारी योजना में धांधली जोरों शोरों से हो रही है.सड़क निर्माण के 2 साल के अंदर ही सड़क जर्जर हो चुकी है. हर साल मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपयों की निकासी होती है, लेकिन मेन्टेनेंस सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह जाता है. अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही इस धांधली का दंश आम जनता झेल रही है.छत्तीसगढ़ में विकास की बात तो होती है, योजनाएं बनती हैं, काम भी शुरू होता है, लेकिन अंत में तमाम योजनाएं बिचौलियों की धांधली की भेंट चढ़ जाती है.सरकार ने ग्रामीण इलाकों को पक्की सड़क से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण शुरू करवाया. निर्माण पूरा भी हुआ, लेकिन कुछ ही समय में सड़क की हालत खस्ताहाल हो गई.
2 साल के अंदर ही सड़क हुई खस्ताहाल
कोटा विकासखंड में पंडरा पथरा से राम मंदिर तक जाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से लगभग 16.7 किलोमीटर सड़क निर्माण किया गया. 2021 में सड़क बनी, लेकिन 2 साल के अंदर ही सड़क जर्जर होने लगी है. रास्ते गड्ढों से भर गए हैं. गाड़ियों की आवाजाही मुश्किल हो रही है. यहां हैरान करने वाली बात ये है कि हर साल इस सड़क के मेन्टेनेंस के नाम पर लाखों रुपए निकाले जाते हैं, लेकिन वो पैसा जाता कहां है ये किसी को नहीं पता. क्योंकि सड़क में ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं. सड़कों की दुर्दशा के लिए अधिकारी भी जिम्मेदार हैं.क्योंकि जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से ही भ्रष्टाचार हो रहा है. गुणवत्ता जांच के नाम पर सिर्फ दिखावा होता है और मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई की जाती है. ठेकेदार बिना मेंटेनेंस किए सरकार से पूरा पैसा ले रहे हैं, लेकिन पैसों को मेंटेनेंस पर कितना खर्च किया जाता है इसकी पोल तो सड़कें ही खोल रही है. ग्रामीणों की बार-बार शिकायत के बाद भी भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई नहीं होती.
सिर्फ कागजों पर होता है सड़क का मेन्टेनेंस
2021 में जब सड़क का निर्माण हुआ था तब पंडरा पथरा रतखंडी व सभी पंचायत के लोगों में उत्साह चरम पर था. उन्हें लगा कि अब पक्की सड़क होगी तो आवाजाही आसान हो जाएगा, लेकिन निर्माण के बाद ही सड़क की बदहाली दिखने लगी. 2 सालों में सड़क जर्जर हो गई लेकिन आज तक किसी अधिकारी और ठेकेदार ने इसकी सुध नहीं ली. बस कागजों पर मेंटेनेंन किया जाता है और सरकारी पैसों को भ्रष्टाचारी डकार जाते हैं.
वहीं, मामले को लेकर निर्माण विभाग के अधिकारी SDO इंजिनियर फ़ोन नहीं उठाते


















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