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Tuesday, December 3, 2024

_ब्लाक लखनादौन संविधान दिवस के अवसर संविधान दिवस सभा का हुआ सफल आयोजन

 जिला सिवनी मध्यप्रदेश

_ब्लाक लखनादौन संविधान दिवस के अवसर संविधान दिवस सभा का हुआ सफल आयोजन




सी एन आई न्यूज सिवनी/ लखनादौन हम आपको बता दें कि भारतीय संविधान दिवस के अवसर पर समस्त विश्व में भारतीय संविधान दिवस बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम से लगभग एक सप्ताह तक अनेकों कार्यक्रम होते रहते हैं,




उसी कड़ी मे जिला सिवनी के अंतर्गत आने वाले ब्लॉक मे दिनांक 1/12/24 को हीरेंद्र डहेरिया के निज निवास पर (लखनादौन) संविधान दिवस का एक महत्वपूर्ण आयोजन किया गया।

जिसमें मुख्य अतिथि:- मा. यु.एस.कुरचे, जिलाध्यक्ष बामसेफ सिवनी ,विशेष अतिथि:- मा.राजकुमार झारिया, जिला उपाध्यक्ष बामसेफ सिवनी,अध्यक्षता :- मा. शिवनंदन डहेरिया ,बामसेफ प्रभारी जिला सिवनी द्वारा की गई।

 उक्त आयोजन में, एडवोकेट जुगल किशोर नंदौरे, एडवोकेट शिव चंद्रवंशी, सीता राम उइके, शिवकुमार गोल्हानी,चेतराम बकोड़े, अरविंद डोंगरे, धर्मेंद्र सिंह गोयल, द्वारा संविधान दिवस पर अपने विचार प्रस्तुत किये गये,  कार्यक्रम का संचालन श्री राजेश डहेरिया एवं आयोजन कर्ता श्री हीरेंद्र डहेरिया, हीरालाल डहेरिया द्वारा किया गया ।उपस्थित सदस्यों का आभार प्रदर्शन करने के पश्चात् स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई और आयोजन के समापन की घोषणा की गई।

संविधान सभा में शिवनंदन डेहरिया के द्वारा संविधान के महत्वों को बताया गया_

स्वतंत्र भारत के इतिहास में 26 नवंबर 1949 का दिन बेहद यादगार और ऐतिहासिक था। यही वह दिन था जब भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था। भारत ने अपने संविधान (Indian Constitution) को अपनाया था। इसी दिन की याद में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। नागरिकों के बीच संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 19 नवम्बर 2015 को घोषणा की कि भारत सरकार हर वर्ष 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाएगी। इसका पालन राष्ट्र का मार्गदर्शन करने वाले लोकतांत्रिक सिद्धांतों की याद दिलाता है। संविधान दिवस पर सरकारी संस्थानों, स्कूलों और कॉलेजों में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शैक्षणिक संस्थानों में भाषण प्रतियोगिताएं और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

भारतीय संविधान 26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया। भारत का संविधान भारत के लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समतावादी ढांचे को परिभाषित करने वाला आधारभूत दस्तावेज है। पिछले सात दशकों में, इसने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों के माध्यम से राष्ट्र का मार्गदर्शन किया है, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सुनिश्चित किया है - जो भारत के शासन के मूल सिद्धांत हैं। इन मूल्यों को हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। साथियों, इस बार का संविधान दिवस कुछ खास है। संविधान सभा द्वारा संविधान को अपनाने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कें राज्य सरकारें कई तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। स्तर पर संविधान दिवस का जश्न मनाया जा रहा है। हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान अभियान चलाया जा रहा है। संविधान स्वाभिमान यात्रा निकाली जा रही है।

यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है। जहां संविधान के दिए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य हमें हमारी जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं।

साल 2015 में भारत सरकार ने 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया था। भारत का संविधान दुनिया भर के बेहतरीन संविधानों को मिलाकर बनाया गया है और ये दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। इसमें विभिन्न देशों के संविधानों से अच्छी बातें ली गई हैं।

साथियों, भारत भले ही विविधताओं से भरा देश हो, विभिन्न राज्यों में अलग-अलग भाषाओं, जातियों, धर्मों और वेश- भूषाओं वाले लोग रहते हों, सबका रहन-सहन अलग हो, लेकिन संविधान दिवस का दिन सबसे लिए बहुत ज्यादा मह रखता है। देश के सभी लोगों पर जब ही संविधान लागू होता है तो राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलती है। अलग-अलग क्षेत्र अलग अलग संस्कृति के लोग एक संविधान के दायरे में आते हैं। सभी के लिए समान प्रावधान व नियम कायदे हैं।

कोई भी देश बिना संविधान के नहीं चल सकता। देश का शासन और सरकार कैसे चलेगी? सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा कैसी होगी? किस पद की नियुक्ति कैसे होगी और उसके क्या कार्य होंगे? देश के नागरिकों के क्या अधिकार और कर्तव्य होंगे एवं इनकी रक्षा कैसे होगी? कानून क्या होगा? एक देश को चलाने के लिए ये सभी बातें संविधान में ही निहित होती हैं। इसलिए संविधान बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है। 26 नवंबर को संविधान दिवस के साथ साथ राष्ट्रीय कानून दिवस भी मनाया जाता है।

मैं आज आधुनिक भारत का सपने देखने वाले बाबा साहेब अंबेडकर समेत संविधान सभा के सभी सदस्यों को, संविध निर्माताओं को नमन करता हूं। बाबासाहेब अंबेडकर की संविधान निर्माण में सबसे अहम भूमिका रही।

साथियों, संविधान दिवस सिर्फ देश की सरकार और राजनीतिक पार्टियों का पर्व नहीं है बल्कि यह पूरे देश की जनता का पर्व है। देश के हर नागरिक के लिए यह गर्व का दिन है। देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा यह कर्तव्य है कि हम लोग इस उत्सव को पूरे जोश के साथ मनाएं। देश के आजाद होने के बाद हर भारतीय नागरिक संविधान द्वारा उसे दिए गए मौलिक अधिकारों का आनंद लेते आ रहा है। लेकिन हमें इसके साथ-साथ देश के कानून का पालन करने और संविधान में दिए गए मौलिक कर्तव्यों को निभाने का भी संकल्प लेना चाहिए। अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए ही देश को विकास की नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।

जिला ब्यूरो छब्बी लाल कमलेशिया की रिपोर्ट

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