नेरली गांव में 15 साल से न्याय का इंतज़ार
दंतेवाड़ा जिले में IED विस्फोट में गंवाया पैर,
अब 355 रुपये में काट रहा जिंदगी
मुआवजे के लिए 15 साल से भटक रहा हूंगा तेलाम
दंतेवाड़ा। ग्राम पंचायत नेरली मे साल 2012 में जब नक्सली हिंसा अपने चरम पर थी, तब नेरली गांव के ओयाम पारा निवासी हूंगा तेलाम की जिंदगी एक पल में बदल गई। बुधवार सुबह करीब 6 बजे वह अपनी मां नन्दे तेलाम के साथ जंगल में लकड़ी लेने गया था।
हूंगा आगे चल रहा था और उसकी मां पीछे थीं, तभी नेरली मोड़ के पास उसका पैर नक्सलियों द्वारा प्लांट किए गए आईईडी पर पड़ गया।
जोरदार विस्फोट में हूंगा का दाहिना पैर घुटने से ऊपर तक उड़ गया, वहीं दाएं हाथ की तीन उंगलियां भी चली गईं। गंभीर हालत में उसे बचेली के अपोलो अस्पताल ले जाया गया, फिर जगदलपुर रेफर किया गया। करीब चार महीने तक इलाज चला।
आज, हादसे के 15 साल बाद, हूंगा तेलाम फॉरेस्ट विभाग में महज 355 रुपये की दिहाड़ी पर काम कर अपने परिवार का पेट पाल रहा है। उसके परिवार में पत्नी, तीन छोटे बच्चे और बूढ़ी मां हैं, जिनकी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर है।
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद उसे मात्र 30 हजार रुपये का मुआवजा मिला। बाकी इलाज गांव वालों ने चंदा जुटाकर कराया, ताकि उसका घर-ज़मीन बिकने से बच सके।
आज भी हूंगा तेलाम सरकार से उचित मुआवजे और न्याय की आस लगाए बैठा है। सवाल यह है कि नक्सली हिंसा के पीड़ितों के लिए बनी योजनाएं आखिर जमीन पर कब उतरेंगी, और कब तक हूंगा जैसे लोग अपने ही दर्द के साथ सिस्टम से लड़ते रहेंगे?
CNI NEWS दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ से असीम पाल की रिपोर्ट




















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