विदिशा गंजबासौदा भोपाल।
अयोग्य व्यक्ति को प्राचार्य का प्रभार से विद्यालय में विवाद
गंजबासौदा शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में प्राचार्य की सेवानिवृति के कारण रिक्त पद का प्रभार जिस व्यक्ति महेश चंद्र शर्मा, को सौंपा गया है,वह इस पद के पूरी तरह से अयोग्य है ।
जिला कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले दिनों व्याख्याता से हाई स्कूल प्राचार्य का उच्च पद प्रभार सौंपा गया था, जिसमें इनकी सी .आर. खराब होने के कारण इन्हें इस उच्च प्रभार के लिए अयोग्य माना गया किंतु !
विभाग का बड़ा चौंकाने वाला निर्णय यह है कि इन्हें सीधे हायर सेकंडरी स्कूल का प्रभार सौंप दिया ?
जबकि यह हाई स्कूल के प्रभारी के लिए ही योग्य नहीं माने गए थे । अब विभाग की इन्हें प्रभार देना, क्या मजबूरी है यह तो अधिकारी ही बता सकते है ।
पिछले दिनों इनके उग्र एवं अभद्र व्यवहार के कारण शिक्षिका दीपिका श्रीवास्तव से विवाद के कारण सुर्खियों में बने हुए है । इनके दहशत से चलाए जाने वाले प्रशासन
के विरुद्ध दीपिका श्रीवास्तव ने आवाज उठाई है । जिसे दबाने की हर तरह से कोशिश हो रही है ।
इनके बारे में जब
जब गहराई से जांच पड़ताल की गई तो पता चला है कि यह अपने स्वभाव के कारण सदैव अपने अधिकारियों के विवाद करते रहे,पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी एच एन नेमा, एस पी त्रिपाठी या इनके पूर्व प्राचार्य जिनके साथ इन्होंने काम किया जिसमें,
श्री एस पी सिंह जादौन,अनिल मरखेडकर, जी पी भार्गव सभी से इनका विवाद होता रहा है ।
इनके स्वभाव के कारण इनकी पत्नी से भी विवाद रहा है यह प्रकरण भी न्यायालय में चल रहा है ।
पूर्व प्राचार्य
अनिल मखेडकर के द्वारा इनके अभद्र कार्य व्यवहार की लिखित शिकायत तो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में की गई थी ।जिसे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कभी भी देखी जा सकती है ।
मजेदार बात यह भी है कि
यह विद्यालय में एक भी पीरियड नहीं पढ़ाते है,जबकि इन्हें कमसे कम 4 पीरियड पढ़ाना चाहिए क्यों कि यह व्याख्याता है । खाना पूर्ति के लिए विद्यालय टाइम टेबल में अपना नाम लिख रखा है ।जिला अधिकारी ने आज तक यह नहीं पूछा कि आप मोटी तनख्वा लेकर भी क्यों नहीं पढ़ाते ?
इन्होंने पिछले वर्षों में अनिल श्रीवास,व्याख्याता को पवई विद्यालय से अपने पीरियड पढ़ाने अटैच कर रखा है, जबकि एक व्याख्याता योगेश चौरसिया और इनके विषय के पूर्व से ही विद्यालय में कार्यरत है, जिससे यह विद्यालय में अतिशेष कर्मचारी है , इन्हें इस विद्यालय से दूसरी जगह ट्रांसफर होना चाहिए । किंतु कहीं भी कोई देखने बाला नहीं है । जबकि मालूम हो कई विद्यालयों में भौतिक शास्त्र का एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है ।
यह स्टाफ सदस्यों को तनाव देने के आदि है,
इसकी पुष्टि इनके कार्यकाल में स्टाफ सदस्यों को दिए जाने वाले नोटिसो से हो सकती है ।
एक प्रकरण विकलांग सफाई कर्मचारी सूरज बाल्मीकि का है ,जिसे बहुत कम वेतन केवल 3000/ रूपये मिलता है ।
उसे आए दिन प्रताड़ित किया जाता है कई बार उसका वेतन काट लिया जाता है । जो अपनी पीड़ा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को बता चुका है ।
एक स्टाफ सदस्य अनिल शर्मा,मनोज भार्गव को यह आए दिन प्रताड़ित करते रहे,जिससे मनोज ने आत्म हत्या कर लेने तक का लिखित आवेदन अधिकारियों को दिया था । इसकी जानकारी ऑफिस रिकॉर्ड में मिल जायेगी।
सबसे गंभीर मामला महिला स्टाफ रूम में सी सी कैमरा लगाए जाने का है ,जिससे महिला कर्मचारियों को बड़ी दिक्कत होती है । जबकि महिला स्टाफ रूम में सी सी कैमरा लगाया जाना पूर्णतः गलत है ।
इनके विरुद्ध शिकायतों का लंबा सिलसिला है,देखना यह है कि अब जिला प्रशासन इनके विरुद्ध क्या कार्यवाही करता है ।



















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