चार दशक की शिक्षा साधना को मिला सम्मान : सेजेस साल्हेवारा में वरिष्ठ व्याख्याताओं का गरिमामय विदाई एवं सम्मान समारोह संपन्न
खैरागढ़।
शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों तक निष्ठा, समर्पण और उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय (सेजेस) साल्हेवारा के वरिष्ठ व्याख्याता श्री बहादुर सिंह खुशरो एवं श्री गिरधारी लाल वर्मा के सेवा निवृत्ति अवसर पर विद्यालय परिवार द्वारा एक भावपूर्ण एवं गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में दोनों शिक्षकों की दीर्घकालीन सेवाओं, अनुकरणीय कार्यशैली एवं विद्यार्थियों के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए भावभीनी विदाई दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यालय परिवार की ओर से दोनों सेवानिवृत्त व्याख्याताओं को अभिनंदन पत्र, शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही संकुल केंद्र साल्हेवारा, नचनिया, सरईपतेरा सहित विभिन्न विद्यालयों से आए प्राचार्यों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक गणमान्य नागरिकों ने भी पुष्पमालाओं एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
अपने संबोधन में श्री बहादुर सिंह खुशरो एवं श्री गिरधारी लाल वर्मा ने अपने लंबे सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि शिक्षक का वास्तविक सम्मान उसके विद्यार्थियों के प्रेम, स्नेह और सफलता में निहित होता है। उन्होंने विद्यालय परिवार, सहकर्मियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों तक मिले सहयोग और आत्मीयता की स्मृतियां सदैव उनके हृदय में बनी रहेंगी।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि दोनों शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देते हुए अनेक विद्यार्थियों का भविष्य संवारा है। उनका अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा एवं शिक्षण के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री गगन अग्रवाल, ग्राम पंचायत साल्हेवारा के सरपंच श्री दशरथ पटेल, जनपद सदस्य श्री मन्नु मरकाम, पंवार मेरावी, पंचगण, मोहित रजक, संस्था के प्राचार्य श्री विनीत दास, नचनिया के प्राचार्य श्री शत्रुघन लाल साहू, रामपुर के प्राचार्य श्री दशरथ पटेल, जगदीश राम, नरेन्द्र कुमार पटले, महेंद्र ठाकुर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, जनप्रतिनिधि, अभिभावक एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान कई वक्ताओं ने दोनों शिक्षकों के साथ बिताए गए संस्मरण साझा किए, जिससे वातावरण भावुक हो उठा। अंत में सभी उपस्थितजनों ने उनके स्वस्थ, सुखद एवं सम्मानपूर्ण जीवन की कामना करते हुए शिक्षा जगत में उनके अमूल्य योगदान को नमन किया।
"शिक्षक सेवा से निवृत्त हो सकता है, लेकिन समाज और विद्यार्थियों के हृदय में उसका स्थान कभी समाप्त नहीं होता" — इसी भाव के साथ दोनों शिक्षकों को भावभीनी विदाई दी गई।




















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