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Friday, June 5, 2026

मानव जीवन कल्याण के लिए राधा - माधव चरित्र का मनन करे : पंडित अर्पित भाई शर्मा श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के 16 दिवसीय पुरुषोत्तम मास का तीसरा दिन

 मानव जीवन कल्याण के लिए राधा - माधव चरित्र का मनन करे : पंडित अर्पित भाई शर्मा 



श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के 16 दिवसीय पुरुषोत्तम मास का तीसरा दिन


राजनंदगांव 4 जून 2026 

श्री सत्यनारायण मंदिर समिति के तत्वाधान में आयोजित पावन पुरुषोत्तम मास के अवसर पर 16 दिवसीय सत्संग महोत्सव के तीसरे दिन दो दिवसीय श्री राधा - माधव चरित्र कथा की मीमांसा करते हुए व्यासपीठ पर अंचल के सुप्रसिद्ध भगवताचार्य पंडित अर्पित भाई शर्मा ने कहा कि राधा - माधव का चरित्र जीवन को धन्य बनाने वाला है सत्संग के बिना जीवन पूर्ण नहीं होता ।




 भक्ति , ज्ञान एवं सत्कर्म सत्संग से ही प्राप्त होते हैं तथा सत्संग से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है , सत्संग की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि सत्संग से विवेक उत्पन्न होता है तथा जीवन - मृत्यु , दुख - सुख की अनुभूति होती है ।

        कथा व्यास पूज्य अर्पित भाई शर्मा ने राधा - माधव चरित्र की विवेचना करते हुए कहा कि एक ब्रह्म स्वरूप ज्योति जो दो भागों में विभक्त हुई एवं उससे राधा - माधव प्रकट हुए । पूज्य आचार्य श्री ने राधा रानी को शिव स्वरूप और श्री कृष्ण को महाकाली का स्वरूप बताते हुए कहा कि कृष्ण अवतार के समय जब भगवान शिव ने शक्ति स्वरूपा देवी से कृष्ण अवतार की चर्चा की , तब सती ने कहा कि मैंने सती एवं सीता स्वरूप में बहुत दुख प्राप्त किए हैं अतः अब आप राधा स्वरुप और मैं श्री कृष्ण स्वरूप में अवतार लेना चाहती हूं । यही कारण है कि काली स्वरूप में श्री कृष्ण ने एवं शिव स्वरूप में राधा रानी ने अवतार लिया है । हम देखते हैं कि भगवान श्री कृष्णा हमेशा राधा रानी के चरणों की सेवा में लगे रहते हैं वास्तव में यह माता सती का शिव की सेवा का स्वरूप है । सनातन संस्कृति में पति की चरण सेवा पति द्वारा करना वर्जित है फिर भी भगवान श्री कृष्ण जी राधा के चरणों की सेवा में निरंतर लगे रहते हैं एक कहावत भी है कि " वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का , मेरा श्याम दीवाना है राधे रानी का" ।

         पूज्य पंडित अर्पित भाई शर्मा ने प्रेम की व्याख्या करते हुए गोपियों के प्रेम की मीमांसा की , उद्धव गोपी प्रेम संवाद के माध्यम से प्रेम की पराकाष्ठा का अनुभव कराया ।  वर्तमान समय में सांसारिक व्यक्ति प्रेम को नहीं समझ पाते । माचिस की तीली का उदाहरण देते हुए आचार्य श्री ने कहा कि तीली के अंतिम छोर तक अग्नि के पहुंचने के पूर्व तीली छोड़नी पड़ती है । गोविंद दामोदर श्लोक में गोपियों का श्री कृष्ण के प्रति प्रेम के दर्शन की स्तुति है गोपिया प्रेम रूपी मथनी से मथ  कर श्री कृष्ण चरित्र का गायन करती है ।

*श्रीराधा नाम की महिमा* - 

पूज्य अर्पित भाई शर्मा ने कहा कि राधा नाम संकीर्तन की अपार महिमा है । सत्यभामा प्रसंग के माध्यम से राधा नाम की महिमा बताते हुए कहा कि तुला के एक और श्री कृष्णा बैठे थे और दूसरी और सत्यभामा सहित सभी रानियां की बहुमूल्य वस्तुएं रखी थी, किंतु तुला अंश पर भी नहीं सरका । तब रुक्मणी जी ने सारे हीरे जवाहरात हटाकर एक तुलसी दल को गंगाजल से सिंचित करके उसमें अष्टगंध से श्री राधा नाम लिखकर तुला के दूसरी ओर रखा और देखते ही देखते श्री कृष्ण की ओर का तराजू अपने आप ऊपर उठ गया । श्री प्रेमानंद जी महाराज का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 14 वर्षों से दोनों किडनी फेल होने के बावजूद श्री राधा नाम संकीर्तन करने से आज भी वे स्वस्थ हैं । अजामिल का उदाहरण देते हुए कहा कि अजामिल ने अपने अंतिम समय में अपने पुत्र नारायण के नाम को पुकारा तो प्रभु उसे श्री धाम लेकर चले गए  । हम यदि लाडली जी के दास बन जाए तो जीवन सफल हो जाएगा । वेदों की व्याख्या करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जिनकी चरण राज प्राप्त करने परम ब्रह्म परमेश्वर भी लालायित रहते हैं उनको प्रणाम करें तो कल्याण हो जाएगा ।

*प्रसाद की महिमा*- 

प्रसाद की महिमा का बखान करते हुए पूज्य शर्मा ने कहा कि हम भोग लगाते हैं , भोग की थाली प्रभु के सामने रखते हैं जब खाली वापस आती है तो उसमें तुलसी दल भी मिला रहता है , भोजन में तुलसी के आते ही वह प्रसाद बन जाता है । प्रसाद तीन अक्षर से बना है पहला प्र अर्थात प्रत्यक्ष ,सा अर्थात साक्षात एवं द अर्थात दर्शन । प्रत्यक्ष साक्षात दर्शन ही प्रसाद है । उन्होंने प्रसाद की महिमा भगवान जगन्नाथ जी के आनंद बाजार प्रसाद से की । गज एवं ग्राह की कथा की विवेचना करते हुए कहा कि गृह अर्थात मगर हम कथा में नहीं आते तब कहते हैं कि मैं आने ही वाला था मगर । यही ग्राह हमें सत्संग से दूर रखता है । हम स्वान को रोटी देते हैं तो वह भी दिन में 10 बार हमारे पास आता है। किंतु  वर्तमान समय में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है कि जिसका पालन पोषण वह जीवन भर करके बड़ा करता है , वही उसे धिक्कार देता है । दूसरे दिन की कथा में श्री लाडली जी की चरित्र कथा की विवेचना की जाएगी । सत्संग प्रारंभ होने के पूर्व व्यासपीठ का पूजन जिला कांग्रेस के अध्यक्ष जितेंद्र मुदलियार , दैनिक दावा समाचार पत्र के संपादक सूरज बुद्धदेव , अखिल भारतीय खंडेलवाल समाज के शरद खंडेलवाल ने किया एवं व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया । 

प्रेषक : 

अशोक लोहिया

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