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Monday, June 22, 2026

जिला चिकित्सालय कबीरधाम में समय पर उपचार से करैत सर्पदंश पीड़ित 9 माह की बालिका को मिला नया जीवन जिला अस्पताल की तत्परता और चिकित्सकों के प्रयासों ने बचाई करैत सर्पदंश से पीड़ित 9 माह की मासूम की जान

 जिला चिकित्सालय कबीरधाम में समय पर उपचार से करैत सर्पदंश पीड़ित 9 माह की बालिका को मिला नया जीवन



 जिला अस्पताल की तत्परता और चिकित्सकों के प्रयासों ने बचाई करैत सर्पदंश से पीड़ित 9 माह की मासूम की जान


कवर्धा, 22 जून 2026। कबीरधाम जिले में करैत जैसे अत्यंत विषैले सर्प के दंश का शिकार हुई मात्र 9 माह की एक मासूम बच्ची को जिला अस्पताल की चिकित्सा टीम ने समय पर उपचार देकर नया जीवन प्रदान किया। घटना उस समय की है जब एक ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली 9 माह की बच्ची को करैत सांप ने काट लिया। शुरुआत में परिजन स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पाए, लेकिन कुछ ही समय में बच्ची की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। बच्ची सुस्त होने लगी, शरीर में कमजोरी बढ़ने लगी और उसकी हालत चिंताजनक हो गई। परिजनों ने बिना समय गंवाए उसे तत्काल जिला चिकित्सालय कबीरधाम पहुंचाया। 

अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू कर दिया। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के निर्देश एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. डीके तुरे के मार्गदर्शन में चिकित्सा अधिकारी डॉ. त्रिभुवन जायसवाल के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने बच्ची की स्थिति का मूल्यांकन कर आवश्यक जांच एवं उपचार प्रारंभ किया। सर्पदंश के प्रोटोकॉल के अनुसार एंटी स्नेक वेनम सहित सभी आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं और उपचार उपलब्ध कराए गए। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने कई घंटों तक लगातार बच्ची की निगरानी की। उपचार के दौरान उसकी श्वसन क्रिया, हृदय गति और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों पर लगातार नजर रखी गई। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य टीम ने पूरी तत्परता और समर्पण के साथ कार्य करते हुए बच्ची को हर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

स्वास्थ्य कर्मियों के अथक प्रयासों और समय पर मिले उपचार का सकारात्मक परिणाम सामने आया। कुछ ही घंटों में बच्ची की हालत में सुधार दिखने लगा और धीरे-धीरे वह खतरे से बाहर आ गई। जब चिकित्सकों ने बच्ची को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया तो परिजनों ने राहत की साँस ली। परिवार के सदस्यों ने जिला अस्पताल की पूरी टीम, विशेष रूप से डॉ. त्रिभुवन जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बेटी को नया जीवन मिला है। यह घटना बताती है कि समय पर अस्पताल पहुंचना और चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना गंभीर स्थिति में जीवनरक्षक साबित हो सकता है।


सर्पदंश में समय से डॉक्टरी उपचार ही सबसे कारगर


डॉ. त्रिभुवन जायसवाल ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक, टोना-टोटका अथवा घरेलू उपचार में समय न गंवाएं। मरीज को तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाएं। सर्पदंश के मामलों में समय पर दिया गया उपचार ही जीवनरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित होता है।

CNI NEWS कवर्धा छत्तीसगढ़ से अनवर खान की रिपोर्ट

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