सी एन आई न्यूज रिपोर्टर रमेश श्रीवास्तव पिथौरा 9977708864
पिथौरा मछली बाजार में प्रतिबंध के बावजूद मछली की आवक, सवालों के घेरे में सप्लाई चेन
पिथौरा, छत्तीसगढ़ : 15 जून से छत्तीसगढ़ में नदी, तालाब और बांधों में मछली मारने पर प्रदेश सरकार का वार्षिक प्रतिबंध लागू है। मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखकर ये पाबंदी 15 जून से 15 अगस्त तक रहती है। इसके बाद भी पिथौरा के स्थानीय मछली बाजार में रोजाना मछली बिक रही है। इससे लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि प्रतिबंध के दौरान मछली आ कहां से रही है।
बाजार की हकीकत
सुबह 6 बजे से पिथौरा सब्जी मंडी के पास मछली बाजार सज जाता है। रोहू, कतला, मांगुर और पंगेशियस जैसी मछलियां थोक और फुटकर में बिक रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की मांग बनी हुई है।
तो मछली आ कहां से रही?
मछली विभाग के नियम के मुताबिक प्रतिबंध सिर्फ प्राकृतिक जलस्रोतों पर लागू होता है। बाजार में दिख रही मछलियों की 3 संभावित सप्लाई लाइन सामने आ रही हैं:
1. फिश फार्म/एक्वाकल्चर : तालाब और निजी फार्म में पाली गई मछली पर प्रतिबंध नहीं लगता। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बस्तर-दुर्ग क्षेत्र के फार्म से पंगेशियस और मांगुर की सप्लाई रोज होती है।
2. कोल्ड स्टोरेज का स्टॉक : 15 जून से पहले पकड़ी गई मछली को बर्फ में रखकर बेचा जा रहा है। ऐसी मछली देखने में ताजी लगती है पर दाम थोड़ा ज्यादा होता है।
ग्राहक कन्फ्यूज
खरीदने आए लोगों का कहना है कि प्रतिबंध के समय मछली मिलना अच्छी बात है पर ये असली ताजी नदी की है या फार्म की, इसकी पहचान आम आदमी नहीं कर पाता।
फिलहाल पिथौरा बाजार में मछली की बिक्री रुकी नहीं है। असली सवाल ये है कि प्रशासन फार्म की मछली और अवैध शिकार की मछली में फर्क कैसे करेगा, ताकि प्रजनन काल का मकसद पूरा हो सके।


















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