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Wednesday, June 17, 2026

दंतेवाड़ा जिले के बचेली में सरकारी शराब दुकान में प्रिंट रेट से अधिक वसूली और अवैध बिक्री पर गंभीर सवाल

 ब्रेकिंग बचेली

लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़

रिपोर्टर   असीम पाल दंतेवाड़ा


दंतेवाड़ा जिले के बचेली में सरकारी शराब दुकान में प्रिंट रेट से अधिक वसूली और अवैध बिक्री पर गंभीर सवाल



बचेली, दंतेवाड़ा | 17 जून 2026


बचेली स्थित शासकीय विदेशी मदिरा दुकान में ग्राहकों से प्रिंट रेट से अधिक दाम वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि दुकान में खुलेआम एमआरपी से 10 से 50 रुपए तक ज्यादा लेकर शराब बेची जा रही है। बिल न देने और विरोध करने पर बदसलूकी करने की घटनाएं भी सामने आई हैं।


शहर में अवैध बिक्री का जाल

सिर्फ सरकारी दुकान ही नहीं, बचेली शहर के कई मोहल्लों, चौक-चौराहों और ढाबों पर अवैध रूप से शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। इन जगहों पर भी मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। सरकारी दुकान बंद होने के बाद रात में दोगुने-तिगुने दाम पर शराब बेचना आम बात हो गई है। इससे आम जनता की जेब पर सीधा बोझ पड़ रहा है।


जनता के सवाल: जिम्मेदार कौन?

इस पूरे मामले पर बचेली की जनता के मन में कई गंभीर सवाल हैं:

1. संरक्षण किसका? अवैध कारोबार किसकी छत्रछाया में फल-फूल रहा है? इसे बढ़ावा कौन दे रहा है?

2. प्रशासन मौन क्यों? पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन अवैध बिक्री रोकने में नाकाम क्यों है? छापेमारी और कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

3. तकनीक से दूरी क्यों? जब पूरा देश डिजिटल हो रहा है, तो शराब दुकानों में डिजिटल पेमेंट, QR कोड स्कैनिंग और ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम क्यों लागू नहीं किया जा रहा? पारदर्शिता के लिए CCTV और पॉइंट ऑफ सेल मशीन अनिवार्य क्यों नहीं?

4. राजस्व का नुकसान: ओवर रेटिंग और अवैध बिक्री से सरकार को हर महीने लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है?


पुराना इतिहास, नया डर

स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पूर्व भी जिले में शराब दुकानों में करोड़ों रुपए के घोटाले उजागर हो चुके हैं। बारकोड में हेरफेर कर व्यक्तिगत लाभ कमाने के मामले सामने आए थे। जनता को डर है कि कहीं उसी 'गुण' को फिर से बढ़ावा तो नहीं दिया जा रहा?


जनता की मांग: जांच हो, पारदर्शिता आए

बचेली के जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि:

1. उच्च स्तरीय जांच: सरकारी दुकान में ओवर रेटिंग और शहर में हो रही अवैध बिक्री की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

2. डिजिटल सिस्टम लागू हो: सभी शराब दुकानों में अनिवार्य रूप से डिजिटल पेमेंट, कंप्यूटराइज्ड बिलिंग और CCTV लगाए जाएं। रेट लिस्ट बड़ी और साफ जगह पर चस्पा हो।

3. सख्त कार्रवाई: दोषी कर्मचारियों, सेल्समैन और अवैध कारोबारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। लाइसेंस निरस्त किए जाएं।

4. राजस्व सुरक्षा: पारदर्शी व्यापार से सरकार को मिलने वाला पूरा राजस्व सुनिश्चित किया जाए, ताकि उसका उपयोग दंतेवाड़ा के विकास में हो सके।


यह सिर्फ शराब का नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल है। यदि समय रहते रोक नहीं लगी, तो यह अवैध कारोबार और भ्रष्टाचार का 'बंदरबांट' बन जाएगा। जिला प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर जनता के भरोसे को बहाल करना होगा, वरना भविष्य में कोई भी कानून को ठेंगा दिखाने से नहीं डरेगा।

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