सुशासन तिहार बना छलावा? रविदास मोहल्ला को दो साल से पानी के लिए तरसाया, सीएमओ के विरोधाभासी पत्रों ने खोली प्रशासन की पोल
बोर में पानी होने के वीडियो सबूत मौजूद, फिर भी "पानी नहीं" बताकर आवेदन निराकृत, लाखों की सामग्री खरीदी गई लेकिन हैंडपंप आज तक नहीं लगा
बिलाईगढ़। प्रदेश सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए चलाया जा रहा "सुशासन तिहार" नगर पंचायत बिलाईगढ़ में सवालों के घेरे में आ गया है। वार्ड क्रमांक 10 स्थित रविदास मोहल्ला के निवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही,
भेदभावपूर्ण रवैये और विरोधाभासी जवाबों के कारण उन्हें पिछले दो वर्षों से पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है, जबकि संबंधित बोर में पानी होने के प्रत्यक्ष एवं वीडियो प्रमाण मौजूद हैं।
मामले के अनुसार फरवरी 2024 में रविदास मोहल्ला में बोर की खुदाई कराई गई थी। खुदाई के दौरान भारी मात्रा में पानी निकलने का वीडियो आज भी मोहल्लावासियों के पास सुरक्षित है। इतना ही नहीं, वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद कन्हैया खूंटे स्वयं उस समय मौके पर मौजूद थे और बोर खुदाई के प्रत्यक्ष गवाह हैं।
इसके बावजूद जब सुशासन तिहार 2025 में दिनांक 08 अप्रैल 2025 को उक्त स्थल पर हैंडपंप लगाने आवेदन प्रस्तुत किया गया, तब सीएमओ सुशील चौधरी ने पत्र क्रमांक 147 दिनांक 09 मई 2025 जारी कर यह कहते हुए आवेदन निराकृत कर दिया कि संबंधित बोर में पानी नहीं है।
यहीं से पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया, क्योंकि एक ओर बोर में पानी निकलने के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर कार्यालयीन रिकॉर्ड में पानी नहीं होने का उल्लेख किया गया। इससे यह प्रश्न खड़ा हो गया कि आखिर सच क्या है? यदि पानी नहीं था तो खुदाई के समय निकला पानी किसका था और यदि पानी था तो जनता को झूठी जानकारी देकर आवेदन क्यों खारिज किया गया?
दो गर्मियां गुजर गईं, लेकिन नहीं लगा एक हैंडपंप
रविदास मोहल्ला के लोगों का कहना है कि पानी की समस्या को लेकर नगर पंचायत में लगातार आवेदन दिए गए, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। परिणामस्वरूप मोहल्ले के लोग लगातार दो भीषण गर्मी के मौसम में पेयजल संकट झेलते रहे।
स्थिति इतनी गंभीर है कि वर्ष 2026 के सुशासन तिहार में भी उसी स्थान पर पुनः हैंडपंप लगाने आवेदन देना पड़ा। लेकिन इस बार भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सीएमओ के दूसरे पत्र ने पहले पत्र की पोल खोल दी
दिनांक 02 जून 2026 को जारी पत्र क्रमांक 269 में सीएमओ ने पूर्व निराकरण का हवाला देते हुए लिखा कि बोर की गहराई और केसिंग की जांच कराई जाएगी तथा भंडार गृह में हैंडपंप सामग्री उपलब्ध होने अथवा राशि प्राप्त होने पर स्थापना की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 2025 में बोर में पानी नहीं होने की बात कहकर आवेदन खारिज कर दिया गया था, तो 2026 में उसी बोर की गहराई और केसिंग की जांच कराने की आवश्यकता क्यों पड़ गई?
यदि बोर पूरी तरह अनुपयोगी था तो जांच किस बात की? और यदि जांच आवश्यक है तो पहले पानी नहीं होने का निष्कर्ष किस आधार पर निकाल लिया गया?
इन दोनों पत्रों के बीच मौजूद विरोधाभास ने नगर पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
14.71 लाख की सामग्री खरीदी, फिर भी कहा सामग्री नहीं है!
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि नगर पंचायत के भुगतान अभिलेखों के अनुसार दिनांक 02 मार्च 2026 को मेसर्स रमेश हार्डवेयर के नाम से लगभग 14 लाख 71 हजार 122 रुपये की लागत से बोर एवं हैंडपंप सामग्री खरीदी गई है।
ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जब लाखों रुपये की सामग्री खरीदी जा चुकी थी, तब 02 जून 2026 के पत्र में सामग्री उपलब्ध होने अथवा राशि प्राप्त होने पर हैंडपंप स्थापना की बात क्यों लिखी गई?
क्या खरीदी गई सामग्री वास्तव में भंडार गृह में उपलब्ध नहीं थी? यदि थी तो रविदास मोहल्ला को उससे वंचित क्यों रखा गया? यदि नहीं थी तो खरीदी गई सामग्री कहां गई?
रविदास मोहल्ला के साथ भेदभाव या प्रशासनिक उदासीनता?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रविदास मोहल्ला की उपेक्षा सुनियोजित तरीके से की जा रही है। उनका कहना है कि यदि यही समस्या किसी प्रभावशाली वार्ड में होती तो शायद वर्षों तक समाधान लंबित नहीं रहता।
लोगों का कहना है कि सुशासन तिहार में आवेदन लेने के बाद भी यदि एक हैंडपंप तक नहीं लगाया जा सके, तो फिर ऐसे आयोजनों का उद्देश्य क्या रह जाता है?
सुशासन तिहार पर बड़ा सवाल
रविदास मोहल्ला का मामला अब केवल एक हैंडपंप का नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन के दावों की वास्तविकता का प्रतीक बन गया है।
जब एक ओर सरकार सुशासन तिहार के माध्यम से समस्याओं के त्वरित समाधान का दावा कर रही है और दूसरी ओर एक मोहल्ला दो वर्षों से पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भटक रहा है, तब जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है—
क्या सुशासन तिहार वास्तव में जनसमस्याओं के समाधान का माध्यम है, या फिर केवल आवेदन लेकर फाइलों में बंद कर देने का एक सरकारी आयोजन?
रविदास मोहल्ला के निवासियों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा तत्काल हैंडपंप स्थापना की मांग की है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला साबित हो सकता है।






















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