भगवान जगन्नाथ रथयात्रा आज-भगवान जगन्नाथ , बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विशाल रथों में सवार होकर मौसी घर (गुंडीचा मंदिर) जाएंगे।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
भारत के उड़ीसा राज्य का पुरी क्षेत्र जिसे पुरुषोत्तम पुरी, शंख क्षेत्र, श्रीक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, भगवान श्री जगन्नाथ जी की मुख्य लीला-भूमि है। आज भगवान जगन्नाथ जी अपने भाई -बहन के साथ मौसी घर प्रस्थान करेंगे,
उत्कल प्रदेश के प्रधान देवता श्री जगन्नाथ जी ही माने जाते हैं। यहाँ के वैष्णव धर्म की मान्यता है कि राधा और श्रीकृष्ण की युगल मूर्ति के प्रतीक स्वयं श्री जगन्नाथ जी हैं। इसी प्रतीक के रूप श्री जगन्नाथ से सम्पूर्ण जगत का उद्भव हुआ है।
श्री जगन्नाथ जी पूर्ण परात्पर भगवान है और श्रीकृष्ण उनकी कला का एक रूप है। ऐसी मान्यता श्री चैतन्य महाप्रभु के शिष्य पंच सखाओं की है। पूर्ण परात्पर भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी में आरम्भ होती है.।
गुंडीचा मंदिर को गुंडीचा बाड़ी' भी कहते हैं। यह भगवान का जन्मस्थान है। इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि यहीं पर देवशिल्पी विश्वकर्मा ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी की प्रतिमाओं का निर्माण किया था। यात्रा की शुरुआत से पहले राजा सोने की झाड़ू से मार्ग और रथों को साफ करते हैं।





















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