छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर पद्म विभूषण तीजन बाई जी के निधन से शोक की लहर,
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आर टी आई जागरुकता संगठन ने दी विनम्र श्रद्धांजलि
बालोद। छत्तीसगढ़ की माटी की सुपुत्री, लोक संस्कृति और पंडवानी गायन को विश्व पटल पर अमिट पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई जी के अवसान की खबर से पूरे प्रदेश सहित बालोद जिले में गहरा शोक व्याप्त है।
उनके निधन पर बालोद राष्ट्रीय मानवाधिकार टीम के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़िया संस्कृति के एक गौरवशाली युग का अंत बताया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार टीम के प्रदेश अध्यक्ष प्रशासनिक प्रकोष्ठ भरत लाल साहू ने बताया तीजन बाई जी सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और संघर्ष की प्रतीक थीं। उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों से निकलकर विश्व मंच पर अपनी कला का लोहा मनवाया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आर टी आई जागरुकता संगठन भारत छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष मिडिया प्रकोष्ठ पुनीत सेन ने कहा, उनका जाना लोक कला जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। छत्तीसगढ़ महतारी ने आज अपनी एक महान सुपुत्री को खो दिया है।


















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