आज भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती,एक राष्ट्र, एक निशान, एक विधान" ( Uniform Civil Code ) के प्रणेता
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
भारत सरकार द्वारा 06 जुलाई को डां.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, औद्योगिक विकास एवं राष्ट्रीय एकता के प्रति योगदान का स्मरण किया जाता है। डां.श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र पुनर्निर्माण में स्वदेशी नीतियों के दृढ़ समर्थक थे।
डॉ.मुखर्जी ने अपनी दूरदर्शी सोच से देश में शिक्षा,स्वास्थ्य व औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने और सामरिक दृष्टि से भारत को सशक्त बनाने में अहम योगदान दिया।
उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार चिरकाल तक प्रासंगिक रहेंगे।
ऐसे अप्रतिम राष्ट्रनायक की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (6 जुलाई 1901 - 23 जून 1953) एक प्रखर राष्ट्रवादी, शिक्षाविद और भारतीय जनसंघ (आधुनिक भाजपा की वैचारिक जननी) के संस्थापक थे।वे स्वतंत्र भारत भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री रहे,
मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने.।
राजनीतिक सफर: वे स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री थे, लेकिन नेहरू-लियाकत समझौते के विरोध में उन्होंने 1950 में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
भारतीय जनसंघ की स्थापना: वर्ष 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहायता से उन्होंने 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना की, वे जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने के प्रबल समर्थक थे। इसके लिए उन्होंने "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे" का ऐतिहासिक नारा दिया.
निधन: परमिट प्रणाली का विरोध करते हुए 1953 में जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, और वहीं रहस्यमय परिस्थितियों में 23 जून 1953 को उनका निधन हो गया था।


















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