खुरई में सिस्टम 'लाचार', जनता 'लाचार': सीवर कंपनी और नपा की जुगलबंदी ने सड़क को बनाया 'मौत का कुआं'
तत्कालीन SDM का 10 मई का 'अल्टीमेटम' हुआ फुस, अगस्त बीतने के बाद भी नहीं टूटी जिम्मेदार महकमों की नींद
खुरई। विकास के दावों की धज्जियां उड़ाती और प्रशासनिक अमले के खोखले वादों की पोल खोलती एक तस्वीर खुरई के पुराना जनपद चौराहा से ग्रामीण थाने की ओर जाने वाले मार्ग पर साफ देखी जा सकती है।
सीवरेज कंपनी की बेलगाम कार्यप्रणाली और खुरई नगर पालिका की अनदेखी के कारण यह मुख्य सड़क अब आम जनता और मासूम बच्चों के लिए हादसों का 'ट्रैप' बन चुकी है।
समीक्षा बैठकों में तत्कालीन SDM मनोज चौरसिया ने 10 मई 2026 तक सड़क मरम्मत की डेडलाइन तय की थी। लेकिन अफसोस! अगस्त खत्म होने को आया है और डेडलाइन कागजों में दफन होकर रह गई। सड़क सुधरना तो दूर, सीवर कंपनी के अधकचरे काम ने इसकी हालत पहले से भी ज्यादा बदतर कर दी है।
सीवर कंपनी का 'खोदो और भूलो' मॉडल, नपा बनी मूकदर्शक
शहर में सीवरेज लाइन बिछाने के नाम पर जिस तरह बेतरतीब खुदाई की गई, उसने पूरी सड़क का भूगोल ही बदल दिया है।
सीवर कंपनी की मनमानी: सड़क खोदकर उसे जस का तस छोड़ देना सीवर कंपनी का शगल बन चुका है। गड्ढों का सही भराव (रेस्टोरेशन) न किए जाने से मानसून की पहली ही बारिश में पूरी सड़क कीचड़ और पानी का समंदर बन गई।
नगर पालिका का निकम्मापन:
ठेकेदार कंपनी पर शिकंजा कसने में नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। नपा की इस अनदेखी का खामियाजा प्रतिदिन यहाँ से गुजरने वाले सैकड़ों स्कूली वाहनों और हजारों नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
"ड्रेस खराब होती है, आए दिन गिरकर चोटिल होते हैं" — मासूमों का दर्द
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान जब इस जानलेवा मार्ग से गुजर रहे स्कूली बच्चों से बात की गई, तो तंत्र की नाकामी का असली चेहरा सामने आया।
"हम रोज डर-डरकर स्कूल जाते हैं। पानी भरे गड्ढों से जब गाड़ियां गुजरती हैं, तो कीचड़ से हमारी ड्रेस खराब हो जाती है। कई बार गड्ढे न दिखने के कारण हम साइकिल-गाड़ी से गिर जाते हैं और चोट लग जाती है।"
— पीड़ित स्कूली छात्र
वहीं, स्थानीय निवासी अर्पित मिश्रा ने आक्रोश जताते हुए कहा कि सड़क पर गड्ढे नहीं, बल्कि गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ रही है। आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन कान में तेल डाले बैठा है।
नपा AE की लाचारी: "जल्द बनेगा रोड"... पर वह 'जल्द' कब आएगा?
जब 10 मई की डेडलाइन बीत जाने और जनता के आक्रोश पर
नगर पालिका के सहायक अभियंता (AE) से जवाब माँगा गया, तो हमेशा की तरह एक ही रटा-रटाया बयान मिला—"सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाया जाएगा।"
बड़ा सवाल:
क्या नगर पालिका किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?
डेडलाइन का मजाक उड़ाने वाली सीवर कंपनी पर नपा मेहरबान क्यों है?
बैठकों में तय होने वाली समय-सीमाएं क्या केवल कागजी खानापूर्ति के लिए होती हैं?
जनता अब खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है। सवाल यह है कि लापरवाही की चादर ओढ़े खुरई नगर पालिका और सीवर कंपनी की नींद कब टूटेगी?



















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