आईजीकेवी पेंशनरों की मांगों के समाधान में पेंशनर्स महासंघ की पहल,
पीपीओ जारी होने के बाद धरना समाप्त
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
रायपुर- भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के सहयोगी इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर शिक्षक संघ के तत्वावधान में कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) के पेंशनरों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों द्वारा अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 27 जुलाई 2026 से चलाया जा रहा शांतिपूर्ण धरना मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई और लंबित पेंशन प्रकरणों में पीपीओ जारी होने के बाद समाप्त हो गया। पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ ने भी लगातार प्रयास किए।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में वित्त सचिव रोहित यादव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और आईजीकेवी के पेंशनरों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। वित्त सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति से चर्चा कर समाधान निकालने का भरोसा दिलाया था।
इसके साथ ही महासंघ के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल से कई बार मुलाकात कर पेंशनरों की समस्याओं पर चर्चा की। प्रत्येक बैठक में कुलपति का रुख सकारात्मक रहा।
कुलपति ने वित्त विभाग से नियुक्त वित्त नियंत्रक के साथ समन्वय के अभाव को पेंशन संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बताते हुए समाधान के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया।
इस पूरे मामले के समाधान में भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी एवं विश्विद्यालय प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक एन के चौबे की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने लगातार विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव एवं वित्त नियंत्रक से संपर्क कर पेंशनरों की समस्याओं को उनके समक्ष रखा तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए लगातार चर्चा करते रहे। उनके निरंतर प्रयासों से विश्वविद्यालय प्रशासन और पेंशनर्स महासंघ के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण मदद मिली।
पेंशनर्स महासंघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान प्रमुख रूप से पांच बिंदुओं की ओर आकर्षित किया था। कृषि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ शासन के पेंशन एवं महंगाई राहत संबंधी आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य है और वर्ष 2023 तक शासन के आदेशों के अनुरूप डीआर का भुगतान किया जाता रहा। लेकिन वर्ष 2023 के बाद पेंशनरों को शासन के आदेश के अनुरूप महंगाई राहत नहीं मिलने से अलग-अलग मामलों में 2 माह से लेकर 13 माह तक का एरियर लंबित है।
दूसरी प्रमुख समस्या यह रही कि 42 प्रतिशत महंगाई राहत के बाद सीधे 50 प्रतिशत महंगाई राहत का आदेश जारी किया गया, जबकि बीच में 46 प्रतिशत महंगाई राहत का आदेश जारी नहीं किया गया।
लगभग 10 से 12 पेंशनरों के पेंशन प्रकरण वर्षों से लंबित हैं और पीपीओ जारी नहीं होने के कारण उन्हें 90 प्रतिशत पेंशन का ही भुगतान किया जा रहा था। इन प्रकरणों के निराकरण में देरी का लिखित कारण भी संबंधित पेंशनरों को उपलब्ध नहीं कराया गया।
महासंघ ने विश्वविद्यालय में आय के स्रोत से पेंशन फंड के निर्माण संबंधी प्रावधान का पालन सुनिश्चित करने तथा पेंशन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग भी रखी।
एक महत्वपूर्ण मुद्दा प्राध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु से जुड़ा हुआ था। विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश से प्राध्यापकों को 65 वर्ष की आयु तक सेवा का लाभ दिया गया है और यह व्यवस्था आज भी जारी है। इसके बावजूद पेंशन की गणना 62 वर्ष की सेवा के आधार पर की जा रही है, जबकि अप्रैल 2024 तक सेवानिवृत्त हुए प्राध्यापकों को 65 वर्ष की सेवा को आधार मानकर पेंशन गणना का लाभ दिया गया है। महासंघ ने इस विसंगति को दूर कर समान रूप से पेंशन लाभ देने की मांग की।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय प्रशासन स्तर पर सकारात्मक पहल हुई। 5 अगस्त को लंबित महंगाई राहत संबंधी कार्रवाई तथा 19 अगस्त को 24 पेंशनरों के पीपीओ जारी किए गए। इससे पेंशनरों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी प्रकार लंबे समय रुके महंगाई राहत को 58% करने के आदेश भी जारी कर दिया गया लंबित पेंशन प्रकरणों के निराकरण की दिशा में हुई इस कार्रवाई के बाद आईजीकेवी के शिक्षकों एवं प्रोफेसरों का धरना समाप्त कर दिया गया।
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, वित्त सचिव रोहित यादव तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों के सकारात्मक सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है।
महासंघ ने कहा कि शेष लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण होना चाहिए। पेंशनरों की न्यायसंगत मांगों के समाधान के लिए महासंघ आगे भी लगातार प्रयास करता रहेगा।


















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