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Saturday, August 22, 2026

पखांजूर: सूरजगढ़ माइंस के ओवरलोडेड वाहनों ने स्टेट हाईवे की सड़कों को किया तबाह, हादसों का बढ़ा खतरा। ​

 पखांजूर/कांकेर से CNI NEWS शंकर सरकार की रिपोर्ट। मो-6268535584


पखांजूर: सूरजगढ़ माइंस के ओवरलोडेड वाहनों ने स्टेट हाईवे की सड़कों को किया तबाह, हादसों का बढ़ा खतरा।


सुरजगढ़ माइंस से भारी वाहनों के लगातार आवागमन के कारण स्टेट हाईवे-25 (मुख्य मार्ग बांदे से लेकर दुर्गूकोंदल तक) की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। इस मार्ग पर बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए चलना दूभर हो गया है।

​क्षमता से तीन गुना अधिक लोड

जानकारी के अनुसार, इस सड़क की सहन क्षमता 25 से 30 टन की है। हालांकि, सूरजगढ़ माइंस से जुड़े 60 से 70 टन वजनी ओवरलोडेड वाहन रोजाना इस मार्ग पर दौड़ रहे हैं। भारी वाहनों के इस अत्यधिक दबाव के कारण ही सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

​विरोध प्रदर्शन और ठंडे बस्ते में मामला

सड़क की दुर्दशा को लेकर पखांजूर क्षेत्र के कई संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। यहां तक कि सत्ताधारी दल के एक स्थानीय नेता ने भी खुलकर विरोध जताते हुए कांकेर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। इसके अलावा कपसी के स्थानीय संगठनों ने भी भारी प्रदर्शन किया। हालांकि, माइंस प्रबंधन द्वारा सड़क पर नाममात्र की मरम्मत (गड्ढे पाटने) के कार्य को कुछ संगठनों ने 'विकास' मान लिया और धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में जाता दिखा।

​हाईकोर्ट जाने की तैयारी और प्रशासन की चुप्पी

इसके बावजूद कुछ संगठन और स्थानीय नागरिक अब भी लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं। हाल ही में एक स्थानीय अधिवक्ता (वकील) का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने इसे जनहित का मुद्दा बताते हुए माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में याचिका (पिटीशन) दायर करने की बात कही है। यह मुद्दा दैनिक समाचार पत्रों की सुर्खियों से लेकर सोशल मीडिया तक छाया हुआ है।

​PWD की लापरवाही और बढ़ता खतरा

बड़गांव से लेकर कोंडे तक सड़क पर सैकड़ों जानलेवा गड्ढे हो चुके हैं, जिससे आए दिन दुपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। पहले इस मार्ग की रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) की थी, लेकिन माइंस की गाड़ियां शुरू होने के बाद से विभाग ने भी मरम्मत कार्य से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है।

​तमाम विरोध और जनआक्रोश के बाद भी स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इस जानलेवा समस्या पर कोई सख्त कदम उठाते हैं या यह मामला भी हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में ही पड़ा रहेगा।

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