मानव देह मिला है तो श्रेष्ठ कर्म करें : भाई श्यामसुंदर पटेल
बेलटिकरी में एकदिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन, मानस गायन से भक्तिमय हुआ माहौल
बिलाईगढ़। विकासखंड बिलाईगढ़ के ग्राम बेलटिकरी में ग्रामवासियों के सहयोग से एकदिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आसपास के विभिन्न ग्रामों से पहुंचे मानस गायकों ने रामचरितमानस का गायन कर श्रोता समाज को आनंदित किया।
इस अवसर पर ग्राम चुरेला से भैयाराम साहू एवं बोधन साहू, दर्रा से परसराम पटेल, धारा शिव से सुखराम साहू एवं लीलाराम पटेल, जोरा से अजय साहू, बूटीपाली से बुधराम साहू, मलुहा से अशोक चंद्रा, माहुलडीह से दौलत वैष्णव, गदहाभाठा से घनश्याम सिदार, गोविंदवन से मनमोहन साहू, नगर पंचायत भटगांव से भीमेश्वर आदित्य, नगर पंचायत बिलाईगढ़ से प्रवीण सोनी एवं नुतन साहू, आरंगी से राजू तथा ग्राम बेलटिकरी से डोलकुमार जायसवाल, मोहनलाल साहू, रूपसिंग यादव सहित अन्य मानस गायकों ने अपनी प्रस्तुति दी।
ट्रांस महानदी क्षेत्र के प्रमुख रामायणी एवं श्रीराधा-कृष्ण मंदिर समिति शिवरीनारायण के प्रवक्ता ग्राम बांसउरकुली निवासी भाई श्यामसुंदर पटेल भी कार्यक्रम में उपस्थित हुए और कथा का वाचन किया। अपने सारगर्भित प्रवचन में उन्होंने अयोध्या कांड का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्य को सदैव श्रेष्ठ कर्म करना चाहिए। अच्छे कार्यों का परिणाम भी अच्छा ही होता है। व्यक्ति को ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे स्वयं के साथ परिवार, गांव, समाज और देश का भी हित हो।
उन्होंने कहा कि यह मानव शरीर हमें भगवत्कृपा से भगवत्प्राप्ति एवं भगवत्प्रेम की प्राप्ति के लिए मिला है। समस्त सृष्टि में भगवान का ही स्वरूप विद्यमान है, इसलिए संसार की सेवा करना भी भगवान की सेवा के समान है। गोस्वामी तुलसीदासजी ने इसी भाव को व्यक्त करते हुए कहा है—
“जड़ चेतन जग जीव जत, सकल राममय जानि।
बंदऊँ सबके पद कमल, सदा जोरि जुग पानि।।’’
भाई श्यामसुंदर पटेल ने आगे कहा कि भगवत्भजन, नामसंकीर्तन, सत्संग और कथाश्रवण से व्यक्ति के मन को मानसिक शांति मिलती है। इसलिए अपने कर्तव्य कर्मों के साथ यथासंभव सत्संग, कथाश्रवण और नाम-सुमिरन भी जीवन में करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि धन कमाना और परिवार का पालन-पोषण करना आवश्यक है, लेकिन धन-संपत्ति यहीं रह जाती है। मृत्यु के बाद व्यक्ति के साथ उसके अच्छे कर्म ही जाते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में इंगेश्वर प्रसाद साहू, लखनलाल साहू, फत्तेराम, जीवधन साहू, कृष्णकुमार जायसवाल, मोहनलाल साहू, रूपसिंग यादव एवं डोलकुमार जायसवाल सहित ग्रामवासियों का सराहनीय योगदान रहा।



















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.