सी एन आई न्यूज रिपोर्टर रमेश श्रीवास्तव पिथौरा
छत्तीसगढ़ जिला स्तरीय मानव संगोष्ठी का सफल आयोजन ग्राम तेंदुकोना के नवनिर्मित कपीश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ।
पिथौरा। छत्तीसगढ़ जिला स्तरीय मानस संगोष्ठी का सफल आयोजन ग्राम तेन्दूकोना के नवनिर्मित कपीश्वर महेश्वर मंदिर प्रांगण में सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी में प्रथम वक्ता श्री सुरीतराम पटेल, द्वितीय वक्ता सुश्री जया गौतम, भगवताचार्य चित्रकूट धाम, तृतीय वक्ता श्री बुधेश्वर डडसेना, अरंड तथा चतुर्थ वक्ता भक्तिन दीदी हेमलता, बरतुंगा ने रामचरित मानस के अयोध्याकांड के प्रथम दोहे “श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि...” पर सारगर्भित व्याख्यान दिए।
संगोष्ठी में कौड़िया-फुलझर क्षेत्र के प्रसिद्ध मानस प्रवक्ता सुरीतराम पटेल ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में गुरु का सर्वोच्च स्थान है। रामचरित मानस के प्रारंभ में तुलसीदास ने गुरु की वंदना की है। गुरु वह है, जो शिष्य के मन के विकारों क्रमशः काम, क्रोध, मद और लोभ की दर्पण की तरह सफाई करते हैं।
चित्रकूट धाम की भगवताचार्य जया गौतम ने कहा कि वर्तमान परिवेश में समाज में व्याप्त विसंगतियों से निजात पाने के लिए रामचरित मानस का जन-जन में व्याप्त होना और जनमानस द्वारा उसे आत्मसात किया जाना आवश्यक है। गुरु की वंदना करते हुए तुलसीदास ने कहा कि गुरु मन रूपी दर्पण को साफ करते हैं, ताकि उसमें दैवीय और मानवीय गुणों का अंकुरण हो सके।
पिथौरा क्षेत्र के प्रसिद्ध रामायण प्रवक्ता बुधेश्वर डडसेना ने कहा कि तुलसी बाबा ने गुरु के चरणों को कमल की रज के समान बताया है। जैसे पानी का प्रवाह और जमाव कितना भी गहरा क्यों न हो, कमल पानी में डूबता नहीं है, उसी प्रकार गुरु अपने शिष्य को संसार रूपी भवसागर में डूबने नहीं देते, बल्कि वैतरणी पार कराते हैं।
बरतुंगा ग्राम निवासी भक्तिन हेमलता जी ने कहा कि रामचरित मानस में केवल भगवान राम की लीला का वर्णन भर नहीं है, बल्कि समाज के आदर्श स्वरूप का चित्रण है। राम भारतीय जनमानस की आत्मा हैं और सनातन परंपरा में गुरु सर्वोच्च हैं।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक पं. भागीरथी दुबे ने समस्त वक्ताओं एवं श्रोताओं का अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से जिलेभर में मानस के प्रवचनकारों और मंडलियों में नई चेतना और सक्रियता का संचार होगा। पं. राहुल पांडे ने लिखित आलेख के माध्यम से विषय के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी के सफल संचालन में भजन सम्राट रामप्रवेश पारकर, शिक्षक रामनारायण साहू, मानसिंग दीवान, जीवन साहू, महंत सुकालु साहेब, जिला कार्यकारी अध्यक्ष नोहर दास साहू, भगवताचार्य द्वय देवराज मिश्रा जी, राहुल महाराज, पं. कृष्ण कुमार शर्मा, उमेश दीक्षित, पत्रकार मनोहर साहू, लक्ष्मण साहू, व्याख्याकार सीताराम चौधरी, देवराम डड़सेना अमरुवा, प्रेमचंद डड़सेना, पन्ना यादव, चैतराम यादव, भागवत साहू, मनीराम, भगवान यादव सहित अनेक लोगों का योगदान रहा।
तेन्दूकोना से दीवान परिवार, अग्रवाल परिवार एवं जिला भर से पहुंचे मानस प्रेमी, भजन गायक, व्याख्याकार, सत्संग प्रेमी बंधुजन एवं मातृशक्ति ने रामकथा का श्रवण कर संगोष्ठी को सफल बनाया।
अंत में छत्तीसगढ़ मानस संगठन जिला महासमुंद अध्यक्ष परमेश्वर डड़सेना, विनोद दीवान अध्यक्ष बागबाहरा एवं पं. भागीरथी दुबे ने सभी वक्ताओं, अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित मानस प्रेमियों के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।


















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