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Thursday, October 1, 2026

साइबर अपराधी आपकी एक छोटी-सी चूक का इंतजार करता है, सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा। कबीरधाम पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” का सातवां सप्ताह, जिले के थाना-चौकी क्षेत्रों में पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश। पुलिस ने बताया—डर, लालच और जल्दबाजी को हथियार बनाकर लोगों को निशाना बनाते हैं साइबर ठग।

 साइबर जागृति अभियान" जिला - कबीरधाम (छत्तीसगढ़)। दिनांक-01.10.2026


साइबर अपराधी आपकी एक छोटी-सी चूक का इंतजार करता है, सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा।



कबीरधाम पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” का सातवां सप्ताह, जिले के थाना-चौकी क्षेत्रों में पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश।


पुलिस ने बताया—डर, लालच और जल्दबाजी को हथियार बनाकर लोगों को निशाना बनाते हैं साइबर ठग।


कबीरधाम पुलिस द्वारा आमजन को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2026 से 02 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे “साइबर जागृति अभियान” के सातवें सप्ताह में आज जिले के समस्त थाना एवं चौकी क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। थाना एवं चौकी प्रभारियों के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने क्षेत्रवासियों से सीधे संवाद करते हुए साइबर अपराध के स्वरूप, अपराधियों की कार्यप्रणाली और बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।


कबीरधाम पुलिस टीम के द्वारा अपने अपने थाना चौकी क्षेत्र में नागरिकों को समझाया गया कि आज इंटरनेट और डिजिटल माध्यम हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, UPI भुगतान, सोशल मीडिया, ऑनलाइन खरीदारी, नौकरी, शिक्षा और अन्य सेवाओं ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास करते हैं।


क्या है साइबर अपराध।


मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग या किसी अन्य डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति को धोखा देना, उसकी गोपनीय जानकारी हासिल करना, पैसे की ठगी करना, डिजिटल खाते का दुरुपयोग करना अथवा किसी अन्य प्रकार का नुकसान पहुंचाना साइबर अपराध के अंतर्गत आता है।


साइबर ठग लोगों को कैसे फंसाते हैं।


साइबर अपराधी अक्सर पहले व्यक्ति का भरोसा, डर या लालच हासिल करते हैं। इसके बाद वे बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, रिश्तेदार, कस्टमर केयर कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बनकर बातचीत कर सकते हैं। कई बार फर्जी लिंक, फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्रोफाइल या नौकरी एवं निवेश के आकर्षक प्रस्तावों का सहारा लिया जाता है।


पुलिस टीम के द्वारा जानकारी दिया गया कि साइबर अपराधी व्यक्ति को सोचने और सत्यापन करने का समय नहीं देना चाहते। इसलिए वे “अभी पैसे भेजिए”, “अभी OTP बताइए”, “अभी लिंक खोलिए” या “वरना आपका खाता बंद हो जाएगा” जैसी बातों से जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए दबाव बनाते हैं।


साइबर अपराधियों का मुख्य उद्देश्य।


साइबर ठगी का प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति से पैसा अथवा उसकी संवेदनशील डिजिटल जानकारी हासिल करना होता है। OTP, PIN, पासवर्ड, बैंक विवरण, कार्ड की जानकारी अथवा मोबाइल पर प्राप्त सत्यापन कोड हासिल कर अपराधी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं।


एक गलती से बचने के लिए ये सावधानियां जरूरी।


OTP, ATM PIN, UPI PIN, CVV और पासवर्ड कभी किसी के साथ साझा न करें। कोई व्यक्ति बैंक, पुलिस या किसी सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर फोन करे, तब भी ऐसी गोपनीय जानकारी साझा न करें।


UPI PIN पैसा प्राप्त करने के लिए नहीं होता। पैसा भेजने, रिफंड देने या पुरस्कार दिलाने के नाम पर कोई UPI PIN डालने को कहे तो सावधान हो जाएं।


अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले रुकें। KYC, बैंक खाता, बिजली बिल, पार्सल, नौकरी, पुरस्कार, लोन या किसी अन्य बहाने से आए संदिग्ध लिंक की सत्यता पहले जांचें।


किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड न करें। इससे मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग हो सकता है।


सोशल मीडिया पर सावधानी बरतें। परिचित के नाम से बने फर्जी अकाउंट, अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन दोस्ती, पैसे की मांग, संदिग्ध वीडियो कॉल या निजी तस्वीरों के नाम पर ब्लैकमेल जैसी घटनाओं से सतर्क रहें।


नौकरी, निवेश, लोन अथवा ऑनलाइन कमाई के आकर्षक प्रस्तावों पर बिना सत्यापन के पैसे न लगाएं। अत्यधिक लाभ का लालच साइबर ठगी का माध्यम हो सकता है।


“डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान।


पुलिस ने नागरिकों को बताया कि कोई व्यक्ति पुलिस, CBI, ED, TRAI अथवा किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी दे और पैसे जमा कराने का दबाव बनाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में कॉल समाप्त कर संबंधित विभाग अथवा स्थानीय पुलिस थाना या साइबर सेल थाना से आधिकारिक माध्यम से स्वयं संपर्क कर सत्यापन करें।


ठगी हो जाए तो समय गंवाए बिना उठाएं कदम।


कबीरधाम पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि साइबर ठगी होने पर शर्म, डर या संकोच के कारण चुप न रहें। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित लेनदेन पर आवश्यक कार्रवाई की संभावना रहती है।


साइबर आर्थिक ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। साथ ही संबंधित बैंक अथवा भुगतान सेवा प्रदाता को तत्काल सूचना दें।


ठगी से संबंधित Transaction ID/UTR, मोबाइल नंबर, स्क्रीनशॉट, चैट, लिंक, बैंक विवरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखें। इन्हें डिलीट न करें, क्योंकि ये जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।


कबीरधाम पुलिस की अपील— स्वयं जागरूक रहें, परिवार और आसपास रहने वाले परिचित को भी जागरूक करें।


पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि साइबर सुरक्षा की जानकारी केवल स्वयं तक सीमित न रखें। घर के बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के प्रत्येक सदस्य को भी OTP, PIN, संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया ठगी और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े जोखिमों के बारे में जानकारी दें।


साइबर अपराध से बचने का सबसे सरल मंत्र है—रुकें, सोचें, जांचें और फिर कार्यवाही करें। अनजान कॉल, संदेश, लिंक या पैसे की मांग पर तत्काल विश्वास न करें। सामने वाले की पहचान और उसके दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।


कबीरधाम पुलिस द्वारा 15 अगस्त से प्रारंभ किया गया “साइबर जागृति अभियान” कल 02 अक्टूबर 2026 को अपने सातवें सप्ताह के साथ समापन दिवस पर पहुंचेगा। अभियान के माध्यम से जिले के विभिन्न थाना एवं चौकी क्षेत्रों में लगातार आमजन तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया है।


कबीरधाम पुलिस का संदेश


“साइबर ठगी से बचने की पहली सुरक्षा है—किसी भी अनजान व्यक्ति पर ऑनलाइन भरोसा करने से पहले सत्यापन करना।”


साइबर अपराध हेल्पलाइन – 1930


राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल – www.cybercrime.gov.in

CNI NEWS कवर्धा छत्तीसगढ़ से अनवर खान की रिपोर्ट

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