ब्रह्मलीन हुये पद्मश्री रमेश बाबा
ब्रज सहित जड़खोर गोधाम में शोक की लहर
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जड़खोर - ब्रज चौरासी कोस क्षेत्र के हृदयस्थल एवं बरसाना स्थित माताजी गौशाला और मान मन्दिर के संचालक ब्रज विभूति , विरक्त संत पद्मश्री रमेश बाबा (88 वर्षीय) आज ब्रह्मलीन हो गये। उनके गोलोक गमन से पूरे ब्रज और संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई है , उनका अन्तिम संस्कार बुधवार को किया जायेगा। उन्होंने अपना पूरा जीवन ब्रज की सेवा, गौ सेवा और यमुना जी की रक्षा के लिये समर्पित कर दिया था। मथुरा-वृंदावन में उन्होंने हजारों एकड़ भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर हरियाली और गौचर भूमि के रूप में विकसित किया। भारत सरकार ने उनके इस अतुलनीय योगदान के लिये उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। वे केवल संत नहीं , बल्कि ब्रज की आत्मा थे। उनका जाना ब्रज के लिये एक युग का अंत है। राधा रानी की अनन्य भक्ति , गौ सेवा और ब्रज के प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा के लिये अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले रमेश बाबा के जाने से ब्रजभूमि ने अपना एक सच्चा संत , सेवक और पर्यावरण प्रहरी खो दिया है। उनका जाना केवल ब्रज क्षेत्र ही नहीं , बल्कि दुनियां भर में फैले उनके लाखों श्रद्धालुओं और पर्यावरण प्रेमियों के लिये एक अपूरणीय क्षति है। श्रीजड़खोर गोधाम / श्रीमलूकपीठ आश्रम वृंदावन के संत परिकर , भक्त परिकर एवं गोभक्त समाज ने अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजली अर्पित करते हुये इसे ब्रज के एक युग का अंत बताया है। उनका त्याग , तपस्या और पर्यावरण संरक्षण का संदेश आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। बताते चलें रमेश बाबा का जन्म 1938 में पौष मास कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को प्रयागराज में हुआ था।विख्यात ज्योतिषाचार्य बलदेव प्रसाद शुक्ल इनके पिता थे। इनकी माता का नाम हेमेश्वरी देवी थी। इस दंपती ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से रामेश्वरम में पुत्र कामेष्टि यज्ञ किया था। इनके ज्योतिषाचार्य पिता ने इनका ललाट देखते ही घोषणा कर दी थी कि यह बालक गृहस्थ ग्रहण ना कर ब्रह्मचारी ही रहेगा। वर्ष 1954 में वे 16 वर्ष की आयु में ही बरसाना आ गये। यहां वे राधारानी मंदिर में मृदंग बजाते थे। इस दौरान उन्होंने बरसाने में ही ब्रह्मांचल पर्वत पर मान मंदिर आश्रम बनाया और ठाकुर मान बिहारी की सेवा की। वर्ष 2007 में रमेश बाबा ने दो गोवंशी के साथ माताजी गोशाला का संचालन किया। आज माताजी गोशाला एशिया की सबसे बड़ी गोशाला बन गई और यहां 65 हजार गायों का यहां संरक्षण हो रहा है। उनके गो सेवा और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को देख उन्हें वर्ष 2019 में पद्मश्री सम्मान से विभूषित किया गया। वर्ष 1968 में रमेश बाबा ने ब्रजवासियों के साथ ब्रज चौरासी कोस की राधारानी ब्रजयात्रा निकाली। आज प्रतिवर्ष बीस हजार श्रद्धालु नि:शुल्क ब्रजयात्रा करते हैं। इनके रहने और खाने की व्यवस्था मान मंदिर आश्रम की ओर से की जाती है।


















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