Breaking

अपनी भाषा चुने

POPUP ADD

सी एन आई न्यूज़

सी एन आई न्यूज़ रिपोर्टर/ जिला ब्यूरो/ संवाददाता नियुक्ति कर रहा है - छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखण्ड, बिहार, महाराष्ट्रा,  बंगाल, पंजाब, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटका, हिमाचल प्रदेश, वेस्ट बंगाल, एन सी आर दिल्ली, कोलकत्ता, राजस्थान, केरला, तमिलनाडु - इन राज्यों में - क्या आप सी एन आई न्यूज़ के साथ जुड़के कार्य करना चाहते हो ◘ सी एन आई न्यूज़ (सेंट्रल न्यूज़ इंडिया) से जुड़ने के लिए हमसे संपर्क करे : हितेश मानिकपुरी - मो. नं. : 9516754504 ◘ मोहम्मद अज़हर हनफ़ी - मो. नं. : 7869203309 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ आशुतोष विश्वकर्मा - मो. नं. : 8839215630 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ शिकायत के लिए क्लिक करें - Click here ◘ फेसबुक  : cninews ◘ रजिस्ट्रेशन नं. : • Reg. No.: EN-ANMA/CG391732EC • Reg. No.: CG14D0018162 

Saturday, October 10, 2026

जंगल-जंगल, गांव-गांव मलेरिया से जंग: पांच कर्मवीरों का जज्बा बेमिसाल, सुविधाएं सीमित फिर भी सेवा में दिन-रात तैनात!

 जंगल-जंगल, गांव-गांव मलेरिया से जंग: पांच कर्मवीरों का जज्बा बेमिसाल, सुविधाएं सीमित फिर भी सेवा में दिन-रात तैनात!



खैरागढ। साल्हेवारा, बकरकट्टा और भाजीडोंगरी के वनांचल में दवा छिड़काव अभियान को गति — दुर्गम बस्तियों तक पहुंच रहे कर्मठ कर्मचारी, स्थायी रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का इंतजार


साल्हेवारा। जंगलों की पगडंडियां, दूरस्थ गांव, सीमित संसाधन और रात गुजारने के लिए कभी पंचायत भवन तो कभी उपलब्ध स्थान का सहारा। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद पांच कर्मवीर पूरी निष्ठा, लगन और जिजीविषा के साथ वनांचल में मलेरिया की रोकथाम के लिए जुटे हुए हैं। 




इनका लक्ष्य केवल दवा छिड़काव करना नहीं, बल्कि ग्रामीण जनजीवन को मलेरिया और मच्छरजनित बीमारियों के खतरे से बचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना है।


छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के वनांचल साल्हेवारा, बकरकट्टा, भाजीडोंगरी तथा आसपास की पंचायतों में चल रहे इस अभियान में सुपरवाइजर जयपाल जंघेल के साथ दवा छिड़काव कार्यकर्ता भरत राम, धनीराम जंघेल, देवसिंह जंघेल एवं अशोक जंघेल अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। पिछले लगभग दो माह से लगातार क्षेत्र में सक्रिय इस दल की मेहनत ग्रामीण स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है।


सरकारी कार्ययोजना में दर्ज है मलेरिया रोधी छिड़काव अभियान


खंड चिकित्सा अधिकारी, छुईखदान द्वारा जारी अग्रिम मलेरिया रोधी दवा छिड़काव कार्यक्रम वर्ष 2026 के दस्तावेज में विभिन्न गांवों के लिए जनसंख्या, मकानों की संख्या, कार्य दिवस और छिड़काव की निर्धारित तिथियों का विवरण दिया गया है।


दस्तावेज के अनुसार, साल्हेवारा समूह के अंतर्गत खादी, नवागांव और साल्हेवारा के लिए छिड़काव कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इन प्रविष्टियों में कुल जनसंख्या 5,397 तथा कुल 14 कार्य दिवस दर्ज हैं। यह कार्ययोजना बताती है कि वनांचल के गांवों तक मलेरिया रोधी गतिविधियां पहुंचाने के लिए मैदानी स्तर पर काम किया जा रहा है।


दिनभर गांवों में मेहनत, रात में पंचायत भवनों का सहारा


इन पांचों कर्मचारियों की कार्यशैली की खासियत है कि वे दुर्गम गांवों तक पहुंचकर अपने दायित्व को पूरा करने का प्रयास करते हैं। दिनभर एक गांव से दूसरे गांव तक जाना, निर्धारित क्षेत्रों में दवा छिड़काव करना और फिर अगले दिन के काम के लिए तैयार रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।


क्षेत्र में रात्रि विश्राम की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण जहां पंचायत भवन में जगह मिल जाती है, वहीं ठहर जाते हैं। कभी-कभी उपलब्ध सुविधाओं के अनुरूप ही रात गुजारनी पड़ती है। इसके बावजूद उनके कदम रुकते नहीं। अगले दिन फिर वही जंगलों के रास्ते, वही गांव और वही जनसेवा का संकल्प!


यही इन कर्मियों की जिजीविषा है—परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना।


दो साल बाद फिर छिड़काव शुरू होने की चर्चा


स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में लगभग दो वर्षों तक दवा छिड़काव नहीं हुआ था और अब इसे फिर से शुरू किया गया है। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त घोषित किए जाने की धारणा के बीच छिड़काव बंद रहा था। हालांकि, इस अवधि में छिड़काव बंद रहने के वास्तविक कारणों तथा राज्य या जिले की मलेरिया-मुक्त स्थिति के संबंध में संबंधित स्वास्थ्य विभाग से आधिकारिक पुष्टि किया जाना आवश्यक है।


मलेरिया की रोकथाम के लिए समय पर जांच, मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर नियंत्रण, आवश्यकतानुसार दवा छिड़काव और लोगों में जागरूकता महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में वनांचल की दूरस्थ बस्तियों तक स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियां पहुंचाने वाले मैदानी कर्मचारियों की भूमिका और भी अहम हो जाती है।


कर्मठता का सम्मान जरूरी, स्थायी रोजगार पर भी हो विचार


इन कर्मचारियों की मेहनत की सराहना के साथ उनकी रोजगार संबंधी स्थिति भी ध्यान देने योग्य है। मिली जानकारी के अनुसार, इनकी नौकरी स्थायी नहीं है। यदि यह जानकारी सही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि दुर्गम वनांचल में स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में जुटे कर्मचारियों को रोजगार की स्थिरता, उचित पारिश्रमिक, आवागमन और सुरक्षित रात्रि विश्राम जैसी सुविधाएं कितनी मिल पा रही हैं।


जनहित के काम में समर्पण दिखाने वाले कर्मचारियों को केवल जिम्मेदारी सौंप देना ही पर्याप्त नहीं है। उनके कार्य के अनुरूप आवश्यक संसाधन, सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना भी संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।


पांच नाम, एक संकल्प—जनता को बीमारी से बचाना


सुपरवाइजर जयपाल जंघेल और दवा छिड़काव कार्यकर्ता भरत राम, धनीराम जंघेल, देवसिंह जंघेल तथा अशोक जंघेल का प्रयास बताता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक ताकत उन मैदानी कर्मियों में भी बसती है, जो दुर्गम इलाकों में पहुंचकर अपना काम करते हैं।


इनका कार्य भले ही सुर्खियों में कम आता हो, लेकिन गांवों तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाने में इसका महत्व कम नहीं है। इनकी कर्मठता को पहचान मिलनी चाहिए और इनकी समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।


वनांचल की पगडंडियों पर चलकर मलेरिया के विरुद्ध मोर्चा संभालने वाले इन पांचों कर्मवीरों को सलाम! जनसेवा का यह जज्बा प्रशंसा का पात्र है—अब जरूरत है कि इनके समर्पण के साथ इनकी सुविधाओं और रोजगार की चिंता भी की जाए।



No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.

Hz Add

Post Top Ad