बीजापुर छत्तीसगढ़।
शक्ति उपासना का महापर्व : आज से शुरू हुई नवरात्रि
जानिए पंचांग घट स्थापना मुहूर्त और संपूर्ण विधि विधान ।
नवरात्रि पावन पर्व पर जगदीश शर्मा की रिपोर्ट ।
भारतीय सनातन संस्कृति में शक्ति और साधना के सबसे पर्व शरदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है
हिंदू पंचांग के अनुसार आज अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि और वर्ष 2026 के इस पावन पर्व का प्रथम दिन।
नवरात्रि के इस प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
आइए जानते है पंचांग के हिसाब से तिथियों की घट स्थापना के शुभ मुहूर्तों ओर पूजा के बारे में।
पंचांग और विवरण ।
अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरम्भ १० अक्टूबर 2026 की रात्रि 9:16 बजे से और समापन 11 अक्टूबर रात्रि 9:30 तक।
उदय तिथि के अनुसार नवरात्रि और कलश स्थापना मुख्य रूप से 11अक्टूबर को ही मान्य है।
माता का आगमन इस बार रविवार की दिन ही माता का आगमन नवरात्रि का आगमन होने के कारण दुर्गा का आगमन हुआ है जिसे शास्त्रों में बेहद शुभ उत्तम वर्षों और सुख समृद्धि का प्रतीक माना गया है ।
घट स्थापना (कलश स्थापना ) के शुभ मुहूर्त हिंदू धर्म मे नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व है।
आज घट स्थापित करने के लिएमुहूर्त इस प्रकार है।
प्रात काल शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 से सुबह 10:12 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त यानि दोपहर का समय 11:44 से दोपहर 12:31 तक (यदि आप सुबह नहीं कर पाए तो इस दौरान भी कलश स्थापित कर सकते है।)
सफाई और मंदिर की सजावट , सबसे पहले अपने घर के मंदिर की साफ सफाई करें। और गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
जौ ( खेती बोना) एक साफ मिट्टी के बर्तन या वेदी में पवित्र मिट्टी बिछाए और जौ का बीज बोए। इसमें प्रतिदिन जल छिड़कना होताहै।
कलश स्थापना :- तांबे या पीतल के कलश (घड़ा ) में शुद्ध जल भरे और उसमें एक सिक्का, सुपारी, अक्षत (चावल) और दुर्वा डालें ।
आम के पत्ते और नारियल:- कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं। इसके बाद कलश के ऊपर लाल कपड़े में लिपटा जटा वाला नारियल रखें।इस तैयार कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के ठीक पास स्थापित करें।
माता का आहवन :- अब गणेश जी और मां शैल पुत्री का ध्यान करते हुए कलश पर रोली , अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
अखंड दीप प्रजवलन:- यदि आपके यहाँ परंपरा है तो पूजा स्थल पर घी या तेल का अखंड दीपक प्रज्वलित करें।
प्रथम स्वरूप की पूजा और मां शैल पुत्री को सफेद वस्तुए पसंद है।
शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को मुख्य रूप से गाय के शुद्ध घी का भोग लगाया जाता है। और उनके पसंद की सफेद बस्तु भी अर्पित कर सकते है।
सफेद वस्तुएं और सफेद मिठाईया:- चूंकि मां शैल पुत्री को सफेद रंग अति प्रिय है। इसीलिए आप उन्हें खीर ,सफेद बर्फी, पेड़ा और मावा (खोया) से बनी शुद्ध सात्विक मिठाइयां का भोग लगा सकते हो।
फल और मिश्री ,ताजे फल का भोग लगाना चाहिए।
पूजा के दौरान चमेली के पुष्प अर्पित कर सकते है उन्हें यह अति प्रियऔर पसंद भी हैं उनके प्रिय भोग अर्पित करें और धूप दीप दिखाए ।दुर्गा चालीसा का पाठ अवश्य करें । माता रानी की कृपा से आप सभी जीवन में सुख शांति , आरोग्य और ऐश्वर्य का संचार हो।


















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