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Sunday, October 4, 2026

शिक्षा के साथ संस्कार आने वाली पीढ़ी की शक्ति

 जिला सिवनी मध्यप्रदेश

लखनादौन,,

शिक्षा के साथ संस्कार  आने वाली पीढ़ी की शक्ति



सी. एन. आई. न्यूज सिवनी 

लखनादौन चातुर्मास  में मुनि श्री १०८ निर्वेगसागर जी महाराज संसंघ के पावन सान्निध्य में  पटेल जैन मंदिर मे आयोजित श्री 1008 इंद्रध्वज महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के अवसर पर आज जैन पाठशाला के बच्चों द्वारा पूजन-पाठ किया गया

आज  प्रवचन में महाराज श्री ने बदलते परिवेश में शिक्षा के साथ संस्कारों की आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को अच्छे विद्यालयों में शिक्षा तो मिल रही है, लेकिन केवल शिक्षा ही जीवन को पूर्ण नहीं बनाती। ज्ञान के साथ चारित्र और संस्कार का होना भी आवश्यक है

महाराज श्री ने सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्र की एकता को समझाते हुए अंधे और लंगड़े दो मित्रों का उदाहरण दिया। जिस प्रकार दोनों ने एक-दूसरे की कमी को अपनी शक्ति से पूरा कर मेले का आनंद लिया, उसी प्रकार ज्ञान जीवन को दिशा देता है और चारित्र उस दिशा में चलने की शक्ति देता है।

बदलते समय में परिवार छोटे हुए हैं और माता-पिता के पास बच्चों के लिए सुविधाएँ देने का समय तो कभी-कभी कम हो जाता है। ऐसे में जैन पाठशाला बच्चों के संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। बच्चों को स्कूल के साथ पाठशाला भेजना और उन्हें धर्म एवं संस्कारों के वातावरण से जोड़ना प्रत्येक अभिभावक की जिम्मेदारी है

इस अवसर पर लखनादौन की अनेक बालिकाओं ने पाठशाला प्रभारी एवं शिक्षिका बनकर निस्वार्थ भाव से अपना समय देने का नियम लिया और जैन बच्चों को जैन धर्म, धार्मिक शिक्षा एवं संस्कार प्रदान करने का संकल्प लिया  उनका यह समर्पण वास्तव में आने वाली पीढ़ी के निर्माण की सेवा है।

महाराज श्री ने बच्चों को प्रोत्साहित करने का संदेश देते हुए कहा कि पाठशाला से मिलने वाला छोटा-सा प्रोत्साहन भी बच्चों के मन में बहुत बड़ा उत्साह पैदा करता है। इसलिए माता-पिता बच्चों को पाठशाला भेजें, उन्हें प्रोत्साहित करें और धर्म के प्रति उनकी रुचि बढ़ाएँ

प्रवचन में धर्म को जीवन का सच्चा मित्र बताते हुए महाराज श्री ने कहा कि धर्म करना कठिन नहीं है, आवश्यकता केवल दृढ़ मानसिकता और संकल्प की है। यदि व्यक्ति बुराइयों को छोड़ने का संकल्प कर ले तो वही संकल्प उसके भीतर आत्मशक्ति उत्पन्न करता है।

स्कूल से शिक्षा

पाठशाला से संस्कार

धर्म से जीवन की दिशा

और संकल्प से आत्मशक्ति मिलती है

आज के बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण ही आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और श्रेष्ठ बनाने का सबसे सुंदर प्रयास है।

विधान में जैन समाज सभी श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्म लाभ ले रहे है,,

जिला ब्यूरो छब्बी लाल कमलेशिया की रिपोर्ट

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