एक बार फिर CNI NEWS - खबर का असर: BEO कार्यालय के आसपास की झाड़ियों की हुई सफाई,
1300 शिक्षकों की सर्विस बुक और अधिकारी के स्थानांतरण पर अब भी सवाल
खिड़की के पास रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा, कथित रूप से गायब सर्विस बुक की जांच और 10 साल से पदस्थ BEO पर कार्रवाई को लेकर DEO की चुप्पी बरकरार
बिलाईगढ़। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय बिलाईगढ़ की अव्यवस्थाओं और शिक्षकों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद आखिरकार कार्यालय के अगल-बगल और पीछे उगी झाड़ियों की सफाई करा दी गई है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कार्यालय से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याओं का समाधान होना बाकी है। ऐसे में अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि BEO कार्यालय में लगभग 1300 शिक्षकों की सर्विस बुक सहित महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा, कार्यालय की खुली खिड़कियों, आगजनी के संभावित खतरे और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी को लेकर सवाल उठाए गए थे। CNI NEWS पर खबर प्रकाशित होने के बाद झाड़ियों की सफाई होना राहत की बात है, लेकिन क्या केवल सफाई करा देना ही विभाग की जिम्मेदारी पूरी होने के लिए पर्याप्त है?
सर्विस बुक की सुरक्षा पर अब भी सवाल
कार्यालय में रखे शिक्षकों के महत्वपूर्ण सेवा अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। पूर्व में कुछ शिक्षकों की सर्विस बुक गायब होने संबंधी शिकायतें और आरोप भी सामने आए हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में सवाल है कि क्या DEO इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे? क्या संबंधित अभिलेखों का सत्यापन कराकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी शिक्षकों की सर्विस बुक सुरक्षित और उपलब्ध हैं? यदि दस्तावेज गायब पाए जाते हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई होगी या नहीं?
अनेक शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं गायब होने का आरोप, FIR के लिए थाने में आवेदन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकासखंड बिलाईगढ़ अंतर्गत कार्यरत अनेक शिक्षकों की सर्विस बुक कार्यालय से गायब होने का आरोप लगाया गया है। शिक्षक संगठनों के कुछ पदाधिकारियों ने आशंका जताई है कि नई सर्विस बुक तैयार करने की प्रक्रिया की आड़ में अनियमितता की जा सकती है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 25 से 30 शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं कार्यालय से गायब होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसकी वास्तविक संख्या और परिस्थितियों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो पाएगी।
शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, शिक्षिका स्नेहलता ठाकुर की सेवा पुस्तिका गायब होने की बात उनकी उपस्थिति में सामने आई थी। खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित शिक्षिका को BEO कार्यालय बुलाकर सेवा पुस्तिका सही-सलामत पाए जाने का प्रमाण पत्र लिखवाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की बात भी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसके साथ ही कथित रूप से गायब सेवा पुस्तिकाओं के स्थान पर नई कोरी सेवा पुस्तिकाएं लेकर उन्हें संधारित किए जाने की चर्चा है। इन सभी तथ्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि नई सेवा पुस्तिकाओं के संधारण की स्थिति में उनकी बारीकी से जांच होनी चाहिए। नौकरी की शुरुआत से लेकर वर्तमान समय तक अलग-अलग आहरण-संवितरण अधिकारियों के हस्ताक्षर और संबंधित अभिलेखों का मिलान किया जाना जरूरी है। मूल सेवा पुस्तिकाओं में समय-समय पर पदस्थ रहे अधिकारियों के हस्ताक्षर एवं अन्य प्रविष्टियों का सत्यापन कर यह पता लगाया जा सकता है कि नई तैयार की गई पुस्तिकाओं में सभी आवश्यक विवरण सही तरीके से दर्ज हैं या नहीं।
इसी तरह, शासकीय प्राथमिक शाला ओटगन, संकुल जोरा के सेवानिवृत्त प्रधानपाठक गोपाल रौशिक की सेवा पुस्तिका भी कार्यालय से गायब होने की बात सामने आई है। संबंधित शिक्षक के परेशान होने के बाद शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया। इसके बाद BEO सत्यनारायण साहू द्वारा बिलाईगढ़ थाना प्रभारी के समक्ष FIR दर्ज करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी मिली है। अब यह जांच का विषय है कि कितनी सेवा पुस्तिकाएं वास्तव में गायब हैं, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या किसी स्तर पर जानबूझकर लापरवाही बरती गई है।
10 साल से पदस्थ BEO के स्थानांतरण पर निर्णय कब?
BEO सत्यनारायण साहू के लंबे समय से बिलाईगढ़ में पदस्थ रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या विभाग उनके पदस्थापना और स्थानांतरण से संबंधित नियमों की समीक्षा करेगा? क्या जिला शिक्षा अधिकारी इस संबंध में उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजेंगे? फिलहाल इस विषय में किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
रिश्वत प्रकरण के बाद भी BEO की कुर्सी पर बने रहने को लेकर सवाल
BEO सत्यनारायण साहू के कार्यकाल में पूर्व BEO पी.के. शर्मा के निधन के बाद उनके स्वत्वों के भुगतान के एवज में कथित रिश्वत प्रकरण सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्यालय में रिश्वत लेते हुए बाबू रथराम बंजारे को ACB की टीम ने रंगे हाथ पकड़ा था। इस प्रकरण में रथराम बंजारे के साथ BEO सत्यनारायण साहू के विरुद्ध भी अपराध दर्ज किए जाने और गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। बताया जाता है कि श्री साहू गिरफ्तारी के बाद जमानत पर हैं। इस मामले में न्यायालयीन प्रकरण की वर्तमान स्थिति और संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अभिलेखों से किया जाना आवश्यक है।
सूत्रों के हवाले से BEO सत्यनारायण साहू के विरुद्ध भ्रष्टाचार का प्रकरण रायगढ़ न्यायालय में विचाराधीन होने की बात सामने आई है। यह भी बताया गया है कि विगत 28 अक्टूबर को उनकी न्यायालय में पेशी थी। आरोप है कि वे न्यायालयीन कार्यों के लिए अपने साथ संकुल शैक्षिक समन्वयक विजय साहू को भी लेकर जाते हैं, जिससे विजय साहू के पदस्थ शाला का शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इस संबंध में संबंधित स्कूल की उपस्थिति और विभागीय रिकॉर्ड की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
दूसरी ओर, विजय साहू की पत्नी हेमलता साहू, जो प्राथमिक शाला टेड़गीडीपा में पदस्थ हैं, उनके नियमित रूप से स्कूल नहीं जाने के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि उनके स्थान पर किराए के शिक्षक से बच्चों को पढ़वाया जाता है। इस संबंध में पूर्व में टीवी और वेब न्यूज चैनलों पर भी समाचार प्रसारित होने की बात कही गई है। इन आरोपों की पुष्टि स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर, निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित शिक्षकों के पक्ष के आधार पर की जानी चाहिए।
BEO सत्यनारायण साहू के विरुद्ध न्यायालयीन प्रकरण लंबित होने और उनकी प्राचार्य पद पर पदोन्नति रोके जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पदोन्नति रोके जाने के वास्तविक कारणों की पुष्टि विभागीय आदेश से होना आवश्यक है। इन परिस्थितियों में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि वह संबंधित मामलों के अभिलेखों की जांच कर नियमानुसार निर्णय ले।
टेड़गीडीपा प्राथमिक शाला में किराए के शिक्षक से पढ़ाई कराने का आरोप
टेड़गीडीपा प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक-शिक्षिकाओं के नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंचने और एक निजी शिक्षक से बच्चों को पढ़वाए जाने का आरोप लगाया गया है। आरोपों के अनुसार, प्रधानपाठक हेमलता साहू और अन्य संबंधित शिक्षकों की उपस्थिति तथा अध्यापन व्यवस्था की जांच जरूरी है। यदि बिना विभागीय अनुमति के किसी निजी व्यक्ति से नियमित रूप से अध्यापन कराया जा रहा है, तो यह भी जांच का विषय है कि इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी या नहीं और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
शिक्षा व्यवस्था में बच्चों का नियमित अध्यापन, शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। इसलिए इस मामले में केवल स्कूल स्तर पर ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
खबर प्रकाशित होने के बाद DEO ने किया औचक निरीक्षण
समाचार पत्रों एवं वेब न्यूज चैनलों में खबर प्रकाशित होने के बाद 28 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मीनारायण पटेल द्वारा टेड़गीडीपा प्राथमिक शाला का औचक निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई है। निरीक्षण के दौरान प्रधानपाठक हेमलता साहू अपने से कनिष्ठ शिक्षक को प्रभार दिए बिना अवकाश पर पाई गईं, जबकि सहायक शिक्षक बोधीलाल कत्थाकार अनुपस्थित पाए गए। बताया गया है कि DEO ने दोनों को कारण बताओ सूचना जारी किया है।
इस कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि स्कूल स्तर पर कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी या नहीं। यदि स्कूल में अनियमितताओं की शिकायतें पहले से सामने आ रही थीं, तो उनकी निगरानी और निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों से भी जवाब मांगा जाना चाहिए। शिक्षक संगठनों और पालकों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि संबंधित BEO सत्यनारायण साहू के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों सामने नहीं आई है।
मांग—लापरवाह BEO को तत्काल हटाया जाए
विकासखंड बिलाईगढ़ में शिक्षा गुणवत्ता की पुनर्स्थापना, शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं की सुरक्षा, कथित रूप से गायब दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच और स्कूलों में नियमित अध्यापन सुनिश्चित करने के लिए BEO सत्यनारायण साहू को तत्काल प्रभाव से हटाए जाने की मांग उठ रही है। साथ ही, सेवा पुस्तिकाओं से संबंधित शिकायतों, रिश्वत प्रकरण की वर्तमान स्थिति और टेड़गीडीपा प्राथमिक शाला में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित किए जाने की मांग की जा रही है।
अब DEO की कार्रवाई का इंतजार
झाड़ियों की सफाई से खबर का असर जरूर दिखाई दिया है, लेकिन कार्यालय में दस्तावेजों की सुरक्षा, कथित रूप से गायब सर्विस बुक की जांच और लंबे समय से पदस्थ अधिकारी के संबंध में उठे सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं। क्या जिला शिक्षा अधिकारी संबंधित शिकायतों की जांच कराएंगे? क्या शिक्षकों के सेवा अभिलेखों का सत्यापन होगा? क्या जांच में लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी?
बिलाईगढ़ के शिक्षकों, शिक्षक संगठनों और आम लोगों की निगाहें अब जिला शिक्षा अधिकारी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। झाड़ियों की सफाई के बाद विभागीय जिम्मेदारी का अगला चरण दस्तावेजों की सुरक्षा, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।





















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