अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की आखिरी मन की बात में देशवासियों को संबोधित करते हुये कहा कि चार दिन बाद यह साल बीतने वाला है। मन की बात की अगली कड़ी अब वर्ष 2021 में होगी। चार दिन बाद नये साल की शुरूआत होने वाली है। इस साल कई चुनौतियांँ और संकट आये लेकिन हमने नया सामर्थ्य पैदा किया है। मोदी ने मन की बात में नये साल, आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पाद, वन्यजीव, युवाओं की सोच और कश्मीर के केसर , कोरोना वायरस , तेन्दुओं की आबादी , समुद्र तटों की सफाई और लोगों के उन्हें भेजे गये पत्रों पर चर्चा जैसे कई मुद्दों पर बात की। उन्होने कहा कि देश में नया सामर्थ्य पैदा हुआ है. इस नई सामर्थ्य का नाम आत्मनिर्भरता है। मुझे अभी जो पत्र मिले हैं उनमें ज्यादातर बातों में बीते वर्षों के अनुभव और नये साल के संकल्प हैं। पीएम ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुये बताया कि देश पर काफी संकट आये लेकिन हमने हर संकट का हिम्मत से सामना किया है। देश के सम्मान में सामान्य मानवी ने इस बदलाव को हमसूस किया है। मैंने देश में आशा का एक अद्भुत प्रवाह भी देखा है। कोरोना वायरस के कारण साल 2020 काफी उथल-पुथल भरा रहा। वोकल फॉर लोकल ये आज घर-घर में गूंँज रहा है। ऐसे में अब यह सुनिश्चित करने का समय है कि हमारे प्रोडक्ट्स विश्वस्तरीय हों। जो भी ग्लोबल बेस्ट है, वह हम भारत में बनाकर दिखायें। इसके लिये हमारे उद्यमी साथियों को आगे आना है।
आज शहादत का भी दिन
अत्याचारियों से, देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाज को बचाने के लिये कई बलिदान दिये गये हैं। आज ही के दिन 27 दिसंबर को गुरु गोविंद जी के बेटों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें, लेकिन उन्होंने कम उम्र में भी गजब का साहस दिखाया। दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊंँची होती रही, मौत सामने मंडरा रही थी, लेकिन फिर भी वे टस-से-मस नहीं हुये। इस शहादत ने संपूर्ण मानवता को , देश को नई सीख दी। आज ही के दिन गुरु गोविंद सिंह जी की माता जी- माता गुजरी ने भी शहादत दी थी। पीएम मोदी ने देश में शेर, बाघ और तेंदुओं की आबादी बढ़ने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे आनंद और गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि का श्रेय सरकार के साथ संरक्षण की दिशा में जुटी सिविल सोसाइटी और संस्थाओ को भी दिया। पीएम ने कहा कि गीता हमें हमारे जीवन के हर सन्दर्भ में प्रेरणा देती है। गीता की विशिष्टता ये भी है कि ये जानने की जिज्ञासा से शुरू होती है जब तक जिज्ञासा है, तब तक जीवन है। गीता की ही तरह, हमारी संस्कृति में जितना भी ज्ञान है, सब, जिज्ञासा से ही शुरू होता है। वेदांत का तो पहला मंत्र ही है – ‘अथातो ब्रह्म जिज्ञासा’ अर्थात, आओ हम ब्रह्म की जिज्ञासा करें. गीता, हमें, हमारे जीवन के हर सन्दर्भ में प्रेरणा देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, गीता इतनी अद्भुत ग्रन्थ क्यों है ? वो इसलिये क्योंकि ये स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की ही वाणी है. लेकिन गीता की विशिष्टता ये भी है कि ये जानने की जिज्ञासा से शुरू होती है।


















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