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Thursday, June 3, 2021

सीजी कल्चर कंपिटीशन में अमृतेश पांडेय प्रथम

 



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


भिलाई -- छत्तीसगढ़ में निवासरत आदिवासियों की बोली , जनजाति , सांस्कृतिक गतिविधियां एवं रहन-सहन इत्यादि विषयों पर श्रम निकेतन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामुल (भिलाई) द्वारा आयोजित आनलाइन प्रतियोगिता में विद्यालय के कक्षा बारहवीं के छात्र अमृतेश पांडेय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस कार्यक्रम मे उन्होंने सर्वप्रथम  राज्य की विभिन्न बोलियो को देखते हुये मगधी , उड़िया , भतरी , हल्बी , सदरी , तुरी , गदबा , खड़िया , मांझी , मंझवार , दंडामी , भुंजिया , अभूझमाडिया , गोंडी और मुड़िया भाषा पर विस्तृत प्रकाश डाला। फिर उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में निवासरत आदिवासियों की जनजातियों के बारे में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य एक जनजाति बाहुल्य राज्य है , छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की कुल 42 जनजातियां पायी जाती हैं जिसमे सर्वप्रमुख "गोंड" जनजाति को मानी जाती है। इसके अलावा यहां आदिवासियों की जनजातियों में कंवर , बिंझवार , भतरा , हल्बा , बैगा , मुंडा और उरांव जनजाति भी काफी जनसंख्या में है। तत्पश्चात उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में प्रकाश डालते हुये कहा कि  छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकतर दक्षिण छत्तीसगढ़ अर्थात् "बस्तर" क्षेत्रों में निवासरत है। वहां के आदिवासियों का प्रमुख त्योहार "बस्तर का दशहरा" को माना जाता है। पचहत्तर दिनों की लंबी अवधि तक चलने वाला बस्तर दशहरा बस्तर के आदिवासियों की अमूल्य धरोहर है। जिस पर ना केवल छत्तीसगढ़ राज्य और भारत देश को अपितु पूरे विश्व को गर्व होता है। इसमें काछानगादी , जोगीबिठाई , मावली , चातरा , भीतर - रैनी, बाहर - रैनी तथा मुरिया दरबार इत्यादि प्रमुख रस्में होती है।आदिवासियों की वाद्ययंत्रों के बारे में उन्होंने कहा कि सिंगबाजा सबसे महत्वपूर्ण वाद्ययंत्र है। आदिवासियों की रहन- सहन के बारे में कहा कि वे हमारी तरह शहरों में सीमेंट , ईंट से घर बनाकर नहीं रहते बल्कि वे आज भी जंगलों में मिट्टी से , घास - भूसा व लकड़ी इत्यादि से घर बनाकर अपना जीवन व्यतीत करते है। उनके वेशभूषा के बारे में बताया कि आदिवासी महिलायें साड़ी के साथ - साथ उसमें छत्तीसगढ़ी आभूषण पुतरी , दुलरी , सुता , रुपिया , कड़ा , ककनी , कटहर , टोरा , करधन और कौड़ी पहनती है , साथ ही पुरुष कुर्ता व धोती धारण करते है। छत्तीसगढ़ के ये आदिवासी आज भी अपनी संस्कृतियों को बचाये रखे है। वे लोग शहरों की तरफ बिल्कुल नहीं आना चाहते बल्कि वे आज भी उन्हीं इलाकों में जंगलों में रहना पसंद करते हैं। बताते चलें कि इस प्रतियोगिता में कुल ग्यारह छात्र छात्राओं ने भाग लिया जिसमें अमृतेश पांडेय को प्रथम , भूमिका देवांगन को द्वितीय और ओम गुप्ता को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।

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