भ्रष्टाचार का बोलबाला, ईमानदार का मुंह काला?
क्योंकि ये इंडिया है मेरी जान
बिरसा / सालेटेकरी।ईमानदार लोग व ईमानदारी तो जैसे भारत से ऐसे गायब हो रहे है जैसे नौजवानों के सिर से बाल।संतरी से लेकर मंत्री,चपरासी से लेकर अफसर तक सबके सब को हरा हरा चारा ही दिखता है।महीना चाहे ज्येष्ठ का हो या आषाढ का ये सावन आने का इंतजार नही करते इनके लिये बारह महीने सावन के ही होते है। देश की जनता कोरोना महामारी से कराह रही है लेकिन अपने आप को जनता का सेवक कहने वालों को इससे मतलब नही है इनका तो एक ही फंडा है अपना काम बनता भाड़ में जाये जनता।बालाघाट जिले के लोगो को कोरोना लॉकडाउन में जब दवाई,इलाज व खाने के लाले थे तब न कोई सरकारी कर्मचारी इनके पास पहुंचा था और न ही कोई नेता।लॉकडाउन में कई लोगो ने आम बीमारी की वजह से दम तोड़ दिया वजह थी सही समय पर इलाज का न मिलना।आज वही लोग कोरोना काल मे भी लोगों को लूटने से बाज नही आ रहे हैं।देश मे जब जब आपदा आती है तब तब भ्रस्टाचार जमकर होता है।आज सरकारी कर्मचारी व अधिकारियों का अच्छाखासा तनख्वाह है लेकिन वगैर चढ़ावे के कोई भी काम नही होता है।ग्रामपंचायत से लेकर कलेक्ट्रट तक के बिना चढ़ावे के आप का काम बनने वाला नही है।ऐसा भी नही है कि देश मे ईमानदार नेता,सरकारी कर्मचारी व अधिकारियों की कमी है लेकिन ईमानदार लोगो की चलती कहाँ है जैसे कि बालाघाट के पूर्व पुलिस कप्तान गौरव तिवारी की ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के लोग कायल थे गौरव तिवारी ने बड़े बड़ो की पोल खोलने ही वाले थे कि उनका ट्रांसफर कर दिया गया,दूसरे जिले में भी गौरव तिवारी ने अपनी ईमानदारी दिखाई तो वहां से भी इस अधिकारी को विदा कर दिया गया लेकिन अपने होनहार अफसर की बेवजह से की गई विदाई से जनता में आक्रोश फैल गया जिसको शांत करने के लिए भोपाल से सफाई आयी कि गौरव तिवारी की आवश्कता दूसरे जिले में ज्यादा है इसी कारण ट्रांसफर किया गया तब जाकर सड़क पर गयी जनता शांत हुई। जो अधिकारी ज्यादा ईमानदारी दिखाता है उसको स्थान्तरित कर इधर से उधर नचाया जाता है और जो अधिकारी चाटूकारिता, जी हजूरी कमाऊ पूत बनकर रहता है उसकी पांचों उंगलियां घी में रहती हैं।वैसे देखा जाय तो रिश्वत लेना व देना दोनों जुर्म है लेकिन इसकी परवाह किसको है।कोरोना लॉक डाउन ने लोगो की कमर तोड़ दिया।रही सही कसर को खाद्य तेल व डीजल पेट्रोल ने पूरा कर दिया।सब कुछ तो वही है पर हर सामान की कीमत में आग क्यों लगी है?अब तो गरीब भी कह रहा है कि भले ही हमे हमारी योजनाओं में कटौती कर दो पर महंगाई पर लगाम लगा दो।बालाघाट जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य भले ही लोगो से दूर है लेकिन शराब और सट्टा हर गली हर बाजार में आसानी से मिल जाता है क्योंकि ये इंडिया है मेरी जान।क्या हर पांच किलोमीटर पर शराबभट्टी खुलवाकर सरकार का मन नही भर रहा है जो हर गांव में शराब की विक्री करवा रही है?आखिर किसके इशारे पर बेची जाती है अवैध शराब?जो व्यक्ति शराब पीता है उसको आप घर पहुंचा कर शराब दे रहे है तो उस गरीब के घर मे कलह तो होगी ही और फायदे में रहेगा शराब माफिया जो चंद नोट देकर सारे प्रशासन पर रौब डालता है कि जो करना है वह कर लो प्रशासन हमारी जेब मे है।कुछ दिनों में यह गाना आ जायेगा कि जहां डाल डाल पर.....अरे नही भई गलती हो गयी जहां गांव गांव में मिलती दारू,सट्टा और भ्रष्टाचार का रेला वह है भारत देश हमारा क्योंकि यह है इंडिया मेरी जान।


















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