स्पेशल स्टोरी
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*प्राश्चित के राम नाम*
एंकर - रामायण से जुड़ी यह पंक्ति लगभग हर भारतीय ने सुनी होगी
"राम नाम आधार जिन्हें वो जल में राह बनाते हैं
जिन पर कृपा राम करें वो पत्थर भी तिर जाते हैं।"
जिसका शाब्दिक अर्थ है कि राम के नाममात्र से जल में राह बनाई जाती है और जिस पर राम की कृपा हो जाती है वह पत्थर भी पानी में तैर उठता है, इसी तर्ज पर नरसिंहपुर केंद्रीय जेल के कैदी अब राम नाम के सहारे कारागार ने पश्चाताप के राम नाम का लेख लिख अपराध रूपी समुद्र को पार करने का प्रयास कर रहे है,
अब तक एक जेल में बंदियों द्वारा 2 करोड़ 21 लाख से अधिक राम नाम लिखा जा चुका है।
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नरसिंहपुर जिले में स्थित केंद्रीय जेल अपने नवाचारों के लिए जाना जाता है जेल अधीक्षक शेफाली तिवारी के नेतृत्व में इस जेल में कभी इको फ्रेंडली दीपक बनाए जाते हैं तो कभी कैदियों द्वारा बनाये समान को जेल कैफ़े में बेचा जाता है।
लेकिन इस बार कैदियों ने जो कार्य किया है वह अपने आप में एक रिकॉर्ड है जिला जेल में बंद कैदियों ने बीते 3 सालों में दो करोड़ 21 लाख से अधिक बार राम नाम लिखा है और उसे राम नाम बैंक में जमा भी करवाया जा रहा है।
Walk throw - Reporter
नरसिंहपुर जिला जेल में नरसिंहपुर के ही एक समाजसेवी सी बी नेमा के द्वारा जेल प्रबंधन के कैदियों के द्वारा राम नाम लिखने के लिए राम नाम लेखन पुस्तिका उपलब्ध कराएंगे कराई गई जिसके बाद जेल प्रबंधन ने कैदियों को उनकी इच्छा से राम-राम लिखने की बात कही,
तो कैदी तैयार हुए और राम नाम लेखन शुरू किया, धीरे-धीरे राम नाम का यह जादू ऐसा चला कि कैदियों ने 3 सालों के अंदर 2 करोड़ 21 लाख से अधिक बार राम नाम लिख दिया और यह काम निरंतर जारी है।
बाइट सी बी नेमा, समाजसेवी।
जब हमने राम नाम लिखने को लेकर जेल के कैदियों से बात की तो उन्होंने बताया कि राम का नाम लिख कर हम अपने अपराधों का प्रायश्चित कर रहे हैं और हमें होने वाले तनाव से शांति मिलती है राम नाम लिखने से हमें अपने द्वारा किए गए अपराध का अपराधबोध होता है और राम नाम के सहारे हम मानसिक रूप से समाज से पुनः जुड़ने का प्रयास करते है।
बाइट - कैदी 1
बाइट - कैदी 2
जेल पाठशाला में पदस्थ शिक्षक पंचपति बताते हैं कि यहां जो कैदी आते है उन्हें हम पढ़ना लिखना भी सिखाते है और लिखना और लिखावट सुधारने का सबसे अच्छा तरीका राम नाम लेखन जो कैदियों के द्वारा किया जाता है और कुछ तो ऐसे कह दी जो पहले निरीक्षण थे अब तो राम नाम लेखन करते हैं और उनकी लिखावट बड़ी सुंदर है साथ ही राम नाम लिखने से इनका पश्चाताप भी पूरा होता है।
बाइट पंचपति पटैल, जेल शिक्षक
जब हमने जेल अधीक्षक शैफाली तिवारी इस बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि यहां कैदी अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए सीताराम लेखन करते हैं और अपने अपराधों का प्रायश्चित करते हैं। यहां कैदी खुद की इच्छा से हमसे राम नाम लेखन की पुस्तिकाएं मंगाते हैं और राम नाम लेखन करते हैं यदि कोई कैदी पुस्तिका को आधा लिखने के बाद उसकी सजा पूरी हो जाती है तो वह अपने साथी कैदी को वह पुस्तिका दे जाता है जिसे वह पूरी करता है हमारे जेल में बंद कैदियों के द्वारा बीते 3 सालों में 2 करोड़ 21 लाख से अधिक राम नाम लिखा जा चुका है।
बाइट शैफाली तिवारी, जेल अधीक्षक

















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