रिपोर्टर अरविंद तिवारी
नई दिल्ली - ‘मेक इन इंडिया’ अभियान इक्कीसवीं सदी के भारत की जरूरत है और यह हमें हमारी क्षमता दिखाने का अवसर देता है। दुनियां भारत को एक विनिर्माण महाशक्ति के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण , भारत के सकल घरेलू उत्पाद का पंद्रह प्रतिशत है , लेकिन मेक इन इंडिया से पहले अनंत संभावनायें हैं और हमें भारत में एक मजबूत विनिर्माण आधार बनाने के लिये पूरी ताकत से काम करना चाहिये।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज उद्योग जगत आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की अपील करते हुये उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा "मेक इन इंडिया फार द वर्ल्ड" विषय पर आयोजित बेबिनार को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने उद्योग जगत से कहा कि उन वस्तुओं के आयात में कटौती के प्रयास होने चाहिये जिनका उत्पादन भारत में हो सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि बजट में आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ के लिये की गई घोषणायें उद्योग जगत एवं भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसा विशाल देश सिर्फ एक बाजार बनकर रह जाये तो हम कभी प्रगति नहीं कर पायेंगे और ना ही हमारी युवा पीढ़ी को मौके मिलेंगे। वैश्विक महामारी के दौर में भी हम देख रहे हैं कि विश्व में सप्लाई चेन किस तरह तहस-नहस हुई है। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति भारतीयों की रूचि पर प्रकाश डालते हुये कहा कि इसमें देश नेतृत्व कर सकता है। साथ ही उन्होंने चिकित्सा उपकरणों में ”मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल देते हुये कहा कि हमें चिकित्सा उपकरणों के आयात को कम करने पर ध्यान देना चाहिये। पीएम ने कहा इलेक्ट्रिक वाहनों , विशेष इस्पात और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में ‘मेक इन इंडिया’ समय की जरूरत है। उन्होंने खनन , कोयला और रक्षा जैसे क्षेत्रों के खुलने से अपार संभावनाओं का जिक्र करते हुये कहा कि आपको वैश्विक मानकों को बनायें रखना होगा और आपको विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा भी करनी होगी। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित करने के लिये महामारी और अन्य अनिश्चितताओं के दौरान आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की ओर इशारा किया। उन्होंने जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट मैन्युफैक्चरिंग के अपने आह्वान का भी जिक्र किया जो उन्होंने लाल किले की प्राचीर से किया था। प्रधानमंत्री ने सेमी-कंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों में नई मांग और अवसरों का उदाहरण देते हुये कहा कि इसमें निर्माताओं को विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को दूर करने की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिये। इसी तरह स्टील और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों को स्वदेशी विनिर्माण के लिये ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर हम राष्ट्रीय सुरक्षा के चश्मे से देखें तो आत्मनिर्भर भारत और भी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उद्योगों को अपने उत्पादों के विज्ञापनों में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ के बारे में बात करनी चाहिये। पीएम ने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘वोकल फॉर लोकल’ का दायरा दीपावली पर ‘दीया’ खरीदने से कहीं आगे जाता है। उद्योग जगत को अपने उत्पाद के विज्ञापन में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ की बात करनी चाहिये। उन्होंने निजी क्षेत्र से अपने मार्केटिंग और ब्रांडिंग प्रयासों में स्थानीय और आत्मनिर्भर भारत के लिये आगे बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि आप अपनी कंपनी के उत्पादों पर गर्व करें और अपने भारतीय ग्राहकों में भी गर्व की भावना पैदा करें। इसके लिये कुछ सामान्य ब्रांडिंग पर भी विचार किया जा सकता है। पीएम ने कहा डाक और रेलवे नेटवर्क के एकीकरण से छोटे उद्यमों और दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्याओं का समाधान होगा। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लियज घोषित पीएम डिवाइन के मॉडल का उपयोग करके क्षेत्रीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। इसी तरह विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम में सुधार से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा बजट में ऋण सुविधा और प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से एमएसएमई को महत्वपूर्ण महत्व दिया गया है। सरकार ने एमएसएमई के लिये छह हजार करोड़ रुपये के आरएएमपी कार्यक्रम की भी घोषणा की है। बजट में बड़े उद्योगों और एमएसएमई के लिये , किसानों के लिये नये रेलवे लॉजिस्टिक्स उत्पादों को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में युवा प्रतिभायें और कुशल मानव संसाधन हैं और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिये इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

















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