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Tuesday, March 1, 2022

युवा वैज्ञानिक गौरव चंद्राकार के मार्गदर्शन में संस्कार शिक्षण संस्थान के तीन छात्राओं की टीम ने बनाया यह जादुई चस्मा है।




28 फरवरी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर नया अविष्कारबाल वैज्ञानिकों ने बनाया नींद भगाने वाली स्मार्ट चस्मावाहन चलाते समय नींद झपकी आते ही चश्मा करेगा अलर्ट, बजने  लगेगी घंटी

युवा वैज्ञानिक गौरव चंद्राकार के मार्गदर्शन में संस्कार शिक्षण संस्थान के तीन छात्राओं की टीम ने बनाया यह जादुई चस्मा है।

महासमुंद पिथौरा/ 'आवश्कता ही अविष्कार की जननी है' यह कहावत आपने भी सुनी होगी। जिससे सच में कर दिखाया है छत्तीसगढ़ महासमुंद जिला के पिथौरा संस्कार शिक्षण संस्थान के युवा शिक्षक एवं कक्षा नवमी में पढ़ने वाले तीन छात्रों की टीम ने नींद भगाने वाली चस्मा के अविष्कार कर।




संस्कार शिक्षण संस्थान पिथौरा के संचालक एवं युवा वैज्ञानिक शिक्षक गौरव चंद्राकर के मार्गदर्शन में पायल बरिहा ,तेजस्वी डडसेना तथा उनकी टीम में  तीन बाल वैज्ञानिकों ने किया है नया आविष्कार। रात को गाड़ी चलाते समय अक्सर झपकी आने से  सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनता है। जिससे देश में हर वर्ष कई लोगों को अपनी जान माल गंवानी पड़ती है। इससे निपटने के लिए तीन विद्यार्थियों की टीम ने एक कारगर तरीका खोज निकाला है। उन्होंने एक ऐसा चश्मा तैयार किया है, जिसमें लगा अलार्म सिस्टम ड्राइवर को झपकी आते ही बजने लगती है। छात्रों ने इसका नाम स्मार्ट चश्मा रखा है। उनका मानना है कि इस प्रोजेक्ट का अगर व्यावसायिक उत्पादन होने लगे तो बड़ी तादाद में झपकी आने से होने वाली घटनाओं को रोका जा सकेगा। क्योंकि ज्यादातर सड़क दुर्घटना का कारण चालक के नींद आने से घटित होती है।


इस नई तकनीक के इजाद करने वाली टीम के पायल बरिहा, तेजस्वी डडसेना,जितिका डडसेना संस्कार शिक्षण संस्थान  में रिसर्च कार्य एवं कन्या शाला पिथौरा  कक्षा नवमी एवं 11वीं पढ़ाई कर रही है उन्होंने बताया कि समाचार पत्र पत्रिकाओं, टीवी अखबारों के माध्यम से गाड़ी चलाते समय चालक को नींद की झपकी आ जाने से  काफी लोग दुर्घटना का शिकार होने की खबरों से आहत होकर ही इस प्रोजेक्ट को बनाने का विचार आया। साथ इस टीम के जान पहचान वालों की इसी तरह के दुर्घटना होने से भी समस्या का निदान ढुढंने के लिए प्रेरित हुए।


इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग तीन माह लगा है,1 नवंबर से शुरुआत किया गया जो 25 फरवरी  को बनकर तैयार हुआ। ट्रायल के पश्चात  28 फरवरी विज्ञान दिवस के दिन इस प्रोजेक्ट का लांचिंग किया जाएगा इसे बनाने में युवा वैज्ञानिक गौरव चंद्राकर अनुसंधान केंद्र गड़बेड़ा संस्कार शिक्षण संस्थान पिथौरा के संचालक के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है।गौरव चंद्राकार ने बताया कि चश्मे में आइआर सेंसर, बजर (अलार्म), वाइब्रेशन सेंसर और एलईडी लाइट लगाई गई है। इसको गाड़ी चलाते समय आसानी से पहना जा सकेगा।

झपकी आते ही बजेगा अलार्म

गाड़ी चलाने वाले शख्स को जैसे ही झपकी आएगी, इसमें लगा सेंसर अलर्ट हो जाएगा और बजने लगेगा। इसके साथ ही इसमें लगी लाइट भी जलने लगेगी। जिससे चालक सतर्क हो जाएगा।हालांकि, हर इंसान की पलके झपकती हैं। इसके लिए छात्रों ने इस पर समय निर्धारित करने का विकल्प भी दिया है। इससे पलक झपकने के समय के हिसाब से झपकी आने के समय को सेट कर दिया जाएगा। जैसे झपकी एक सेकंड के लिए आती है तो चश्मे के अलर्ट सिस्टम को दो से लेकर पांच सेकंड के बीच सेट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसको बनाने में करीब 600 रुपये की लागत आई है।

हेलमेट में भी लगाया जा सकता है यह सिस्टम

दोपहिया वाहन चालकों के लिए इसे हेलमेट में भी लगाया जा सकता है। इसके लिए तकनीक के उपकरणों का इस्तेमाल हेलमेट के शीशे में करना होगा। इसके बाद यह हेलमेट चश्मे की तरह की काम करने लगेगा। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट का इस्तेमाल अस्पतालों में आई ब्लिंक टेस्ट के लिए किया जा सकेगा। 

इस प्रोजेक्ट के तैयार होने से संस्कार शिक्षण संस्थान ,शाला परिवार के शिक्षक व पालक काफी प्रसन्न हैं। अविष्कार करने वाली टीम को हर संभव सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

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